AFSPA: क्या है अफस्पा? बंगाल में जिसकी हो रही है मांग, अब तक किन राज्यों में लग चुका कानून; जानें सबकुछ
AFSPA: पश्चिम बंगाल में हाल ही में बढ़ती राजनीतिक हिंसा, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और उग्रवाद जैसी घटनाओं के कारण अफस्पा की मांग की जा रही है। आइए जानते हैं अफस्पा कानून के बारें में, कब और क्यों लगाया जाता है।
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AFSPA: अफस्पा (Armed Forces Special Powers Act) एक ऐसा कानून है, जो भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है, ताकि वे उग्रवाद और आतंकवाद से प्रभावी रूप से निपट सकें। यह कानून उन क्षेत्रों में लागू किया जाता है, जहां सुरक्षा की स्थिति गंभीर हो। पश्चिम बंगाल में हाल ही में बढ़ती राजनीतिक हिंसा और असुरक्षा के कारण अफस्पा की मांग जोर पकड़ रही है। तो ऐसे में तो आइए जानते हैं कि क्या है अफस्पा कानून, इसे कब और क्यों लागू किया जाता है।
क्या है अफस्पा (AFSPA) कानून?
सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) एक संसदीय अधिनियम है, जो भारतीय सशस्त्र बलों और राज्य तथा अर्धसैनिक बलों को 'अशांत क्षेत्रों' में विशेष शक्तियां देता है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों में कानून और व्यवस्था बनाए रखना है, जो आतंकवाद, विद्रोह या क्षेत्रीय अखंडता के खतरे से जूझ रहे हैं। अफस्पा के तहत सुरक्षाबलों को अशांत क्षेत्रों में तलाशी लेने, गिरफ्तारी करने और आत्मरक्षा में बल प्रयोग करने की कानूनी छूट मिलती है। इसका उपयोग मुख्यतः आतंकवादी गतिविधियों या उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में किया जाता है, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
कब लाया गया कानून?
सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को 11 सितंबर 1958 को पारित किया गया था। इसे पहले भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में लागू किया गया, जहां उग्रवाद की समस्या तेजी से बढ़ रही थी। इसके बाद, 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं के कारण 1990 में वहां भी अफस्पा लागू किया गया। इस कानून के लागू होने के बाद से समय-समय पर इसके खिलाफ विरोध भी होता रहा है, क्योंकि कई लोग इसे नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध मानते हैं।
इन राज्यों में लग चुका है अफस्पा कानून
हाल के वर्षों में अफस्पा (AFSPA) को देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में लागू किया गया है, जहां उग्रवाद, जातीय तनाव या राजनीतिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। खासतौर पर पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों जैसे मणिपुर, असम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी माना गया।
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