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UPSC Prelims: सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा संपन्न, कठिन सवालों ने परीक्षार्थियों को उलझाया, कटऑफ कम रहने की संभावना

Mon, 11 Oct 2021 04:55 AM IST
Kuldeep Singh एजूकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजूकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 11 Oct 2021 04:55 AM IST
सार

विशेषज्ञों की माने तो पहली नजर में इस साल भी कटऑफ पिछले साल के आसपास ही रहेगा। दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में आईएएस कोचिंग इंस्टीट्यूट अभिव्यक्ति के डायरेक्टर सुनील सिंह का कहना है कि इस बार भी कटऑफ पिछले साल के आधार पर ही जाने की संभावना है। जीएस के 100 प्रश्नों में अगर किसी अभ्यार्थी ने 45-50 प्रश्नों का सही-सही उत्तर दे दिया और नेगेटिव मार्किंग में नहीं फंसे तो वह मुख्य परीक्षा की तैयारी कर सकता है।

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यूपीएससी की सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा - फोटो : social media

विस्तार

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज की प्रारंभिक परीक्षा संपन्न हो गई। देशभर में आयोजित इस परीक्षा में बड़ी संख्या में परीक्षार्थी शामिल हुए। इस बार इतिहास, राजनीतिक विज्ञान अर्थशास्त्र से प्रश्नों की संख्या अधिक और छात्रों के समझने योग्य थी तो वहीं कंप्रीहेंसन वाला पार्ट छात्रों के लिए उलझाऊ रहा।

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गणित और रिजनिंग के प्रश्न पिछली बार की परीक्षा से कुछ आसान रहा। विशेषज्ञों की माने तो पहली नजर में इस साल भी कटऑफ पिछले साल के आसपास ही रहेगा। यूपीएससी को अनुवाद कार्य पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चे प्रश्नों को बेहतर समझ सके। हिंदी वाले प्रश्न में भाषा-प्रवाह अस्वभाविक लगता है। 
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यूपीएससी ने कठिन प्रश्नों का चयन किया था, कटऑफ भी कम रहने की संभावना
द स्टडी एन इंस्टीट्यूट फॉर आईएएस के डायरेक्टर मणिकांत सिंह ने बताया कि इस बार के प्रश्नों में भी यूपीएससी ने कठिन प्रश्नों का चयन किया था। लिहाजा कटऑफ भी कम रहने की संभावना है। इतिहास विषय से ज्यादा संख्या में प्रश्न इसबार पूछे गए थे। जिसमें प्राचीन, मध्य व आधुनिक इतिहास से प्रश्न थे। इस विषय पर ज्यादा कमांड रखने वाले बच्चों का उत्तर ज्यादा सटीक होंगे। क्योंकि 20-22 प्रश्न इस विषय से पूछे गए थे। राजनीतिक शास्त्र से भी स्तरीय प्रश्न रहे है। भूगोल में प्रश्नों की संख्या कम रही है।
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परीक्षार्थी अभी यह तय ना करें उनका परफार्मेंस अच्छा नहीं हुआ है 
परंतु पर्यावरण और व्यवहारिक विज्ञान से अच्छी संख्या में प्रश्न रहे है। भारतीय अर्थव्यवस्था वाले खंड में प्रश्नों की संख्या अधिक तो नहीं है परंतु जो भी प्रश्न पूछे गए है वे स्तरीय व अपने स्वरूप में अवधाराणात्मक है। कुछ प्रश्न अपने स्वरूप में अपरंपरागत है। जैसे खेल विषय से। सबसे बढ़कर, प्रश्न को अधिक से अधिक जटिल बनाने का प्रयास किया गया है। पर्यावरण से संबंधित प्रश्न भी कुछ ज्यादा ही जटिल बनाए गए थे। इसलिए अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की तैयारी जारी रखें। कटऑफ नीचे आ सकता है। इसलिए अभी यह तय ना करें उनका परफार्मेंस अच्छा नहीं हुआ है। 

50 प्रतिशत अंक लाने वाले मुख्य परीक्षा की तैयारी कर सकते है
दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में आईएएस कोचिंग इंस्टीट्यूट अभिव्यक्ति के डायरेक्टर सुनील सिंह का कहना है कि इस बार भी कटऑफ पिछले साल के आधार पर ही जाने की संभावना है। जीएस के 100 प्रश्नों में अगर किसी अभ्यार्थी ने 45-50 प्रश्नों का सही-सही उत्तर दे दिया और नेगेटिव मार्किंग में नहीं फंसे तो वह मुख्य परीक्षा की तैयारी कर सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार इतिहास विषय से 22-25 प्रश्न पूछे गए थे। खेल से आमूमन प्रश्न नहीं होते थे लेकिन इस बार खेल संबंधित प्रश्न भी पूछे गए। साथ ही राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए थे। इसके साथ ही सीसैट में भी क्वालिफाइंग नंबर लाने की आवश्यकता होगी।

क्या कहते है छात्र
कुछ छात्रों के लिए इस बार का प्रश्न कठिन रहा तो कुछ छात्रों के लिए आसान रहा। हालांकि हिंदी में परीक्षा की तैयारी करने वालों को पूछे गए प्रश्न के पैटर्न से जरूरी परेशानी बढ़ी। लक्षिता शर्मा ने बताया कि प्रश्न मॉडरेट था। सभी मुख्य विषयों से प्रश्न पूछे गए थे। परीक्षार्थी उदय ठाकुर का कहना है कि सिलेबस के आधार पर प्रश्नों को पूछा गया था। सभी विषय का मिलाजुला प्रश्न आया था। कुछ प्रश्न जरूरी दुविधा वाले थे।


इसबार रिजनिंग और गणित खंड में आसान प्रश्न पूछे गए थे।  हिंदी माध्यम में परीक्षा देने वाले छात्रों को प्रश्न पढ़ने और समझने में जरूरी परेशानी हुई। क्योंकि कठिन शब्दों का चयन इस बार भी यूपीएससी ने किया था।  

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