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उत्तर प्रदेश की बेटी चला रही है अनोखा स्कूल, जानें बिना किताबों के कैसे और क्यों होती है पढ़ाई

Sun, 10 Nov 2019 11:03 AM IST
Mohit Mudgal एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 10 Nov 2019 11:03 AM IST
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up women running environment friendly school without books in dharmapuri village
मीनाक्षी - फोटो : bbc

उत्तर प्रदेश की मीनाक्षी, धर्मपुरी गांव में एक स्कूल चला रही हैं जहां न किताबें हैं और न ही पढ़ने वाला बाकी सामान। स्कूल में खेल का मैदान, लाइब्रेरी और खूब सारे पेड़ हैं। इस स्कूल में सामान्य पाठ्यक्रम के अलावा उपभोक्तावाद से दूरी बढ़ाना और प्रकृति के साथ मिल-जुल कर रहना सिखाया जाता है।

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बीबीसी से बात करते हुए मीनाक्षी ने बताया कि मुझे बचपन में स्कूल पर निबंध लिखने के लिए कहा गया। मैनें तब उस निबंध में लिखा था कि मेरे स्कूल में न तो शिक्षक होंगे और न ही किताबें,  मैं यहां उसे ही सच करने की कोशिश कर रही हूं।उन्होंने कहा हमारे यहां स्कूल की शुरुआत होती है बैग और पेंसिल से। जो उपभोक्तावाद को बढ़ावा देता है। उसके बाद बच्चों पर प्रतिस्पर्धा का दवाब बनाया जाता है। इस दवाब में बच्चा अपना व्यक्तित्व पूरी तरह खो देता है, और हिंसक बन जाता है।
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मीनाक्षी ने बताया कि हम यहां बच्चों को प्रतिस्पर्धा से दूर रखनें का ही प्रयास किया जाता हैं। जिसके लिए हम उन्हें पेड़-पौधों के पास रखते हैं, ताकि बच्चे पर्यावरण के पास रहें और उनका सही विकास हो सके। उन्होंने बताया कि हमने अपने स्कूल के कुछ बच्चों को पास के गांव में सर्वे के लिए भेजा कि वो लोगों से जाकर पूछें आज से तीस साल पहले उन्होंने पर्यावरण को कैसे देखा था और आज वे किन दिक्कतों का सामना कर रहें है। ऐसा कई सालों तक चला, फिर गांव वालों ने कहा कि आप लोग बस पूछते हो कुछ करते नहीं हो।

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मीनाक्षी ने कहा कि मैं बस इसी प्रश्न का इंतजार कर रही थी। फिर हमने गांव वालों से पूछा कि वे क्या चाहते हैं कि हम क्या करें, तो गांव वालों ने बताया कि उन्हें पानी की जरूरत है। पानी के बिना उनका जीवन अधूरा है। यहीं से शुरुआत हुई नागावथी नदी खोज परियोजना की।
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बता दें कि मीनाक्षी एक नदी के संरक्षण से भी जुडी हुई हैं। मीनाक्षी बताती है कि उनके स्कूल के बच्चों ने नदी के किनारें घुम-घुम कर किसानों से संरक्षण की बात की, उन्हें इसके लिए प्रयास करने के लिए मानाया। अब स्थानीय किसानों की मदद से स्कूल के बच्चें और मीनाक्षी, नागावथी नदी के संरक्षण के लिए काम कर रहें हैं।

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