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Teacher Day 2022: खुद की संतान नहीं तो स्कूल के बच्चों को अपनाया, अनोखी है स्कूटी वाली मैडम की कहानी

Mon, 05 Sep 2022 03:54 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Mon, 05 Sep 2022 03:54 PM IST
सार

Teacher Day 2022: स्कूटी वाली मैडम अरुणा की अपनी कोई संतान नहीं है। इसलिए उन्होंने स्कूल के बच्चों को ही अपनी संतान मान लिया। अरुणा बच्चों को पढ़ाई की सामाग्री अपने पैसों से ही दिलाती हैं।

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Teachers Day 2022 know Special Storie of Aruna Mahale MP Betul School Teacher Know Story of Scooter Wali Madam
Scooter Wali Madam Aruna - फोटो : Social Media

विस्तार

Teacher Day 2022: आज भारत में 05 सितंबर की तारीख को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। आज के दिन छात्र अपने शिक्षकों को अपने जीवन में प्राप्त सफलता के योगदान को याद करते हैं और शिक्षकों का धन्यवाद करते हैं। देशभर में ऐसे कई शिक्षक हैं जिन्होंने अपने योगदान से छात्रों के साथ-साथ आम जनता को भी प्रभावित किया है। ऐसी ही कहानी है मध्यप्रदेश के बेतुल की शिक्षिका अरुणा की, जिन्हें लोग स्कूटी वाली मैडम कह कर पुकारते हैं। आइए जानते हैं उनकी कहानी...

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बंद होते स्कूल को बचाया
अरुणा बैतूल जिले के भैंसदेही गांव में शिक्षिका है। यहां गांव से स्कूल की दूरी करीब 02 किमी है। स्कूल की दूरी के कारण कई छोटे बच्चों ने धीरे-धीरे स्कूल जाना बंद कर दिया। बच्चों की कम संख्या के कारण स्कूल के बंद होने की नौबत आ गई थी। ऐसे में स्कूल को बचाने का बीड़ा उठाया अरुणा ने। उन्होंने अपने प्रयास से गांव में जागरूकता फैला कर स्कूल को बचाया। 
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क्यों कहते हैं स्कूटी वाली मैडम?
अरुणा को गांव वाले स्कूल वाली मैडम क्यो कहते हैं, इसके पीछे की कहानी काफी प्यारी है। दरअसल, स्कूल की दूरी के कारण बच्चे जब स्कूल छोड़ रहे थे तब उन्होंने बच्चों को खुद की स्कूटी पर स्कूल छोड़ती हैं। उनके इसी कदम के कारण गांव में भी लोगों को प्रेरणा मिली और लोग अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने लगे। स्कूटी वाली मैडम अरुणा आज भी हर रोज 17 बच्चों को अपनी स्कूटी से स्कूल पहुंचाती हैं।

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बढ़ गई बच्चों की संख्या
स्कूटी वाली मैडम की कोशिश रंग लाने लगी और स्कूल में बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगी। अब अरुणा के स्कूल में बच्चों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ कर 85 हो गई है। आज भी अरुणा अपनी स्कूटी से बच्चों को स्कूल पहुंचाती हैं और स्कूल खत्म होने के बाद उन्हें घर वापस भी पहुंचाती हैं।

नहीं है अपनी कोई संतान
स्कूटी वाली मैडम अरुणा की अपनी कोई संतान नहीं है। इसलिए उन्होंने स्कूल के बच्चों को ही अपनी संतान मान लिया। अरुणा बच्चों को पढ़ाई की सामाग्री अपने पैसों से ही दिलाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने वेतन से ही स्कूल में एक एक अतिथि शिक्षक भी रखा है। उनकी इस कोशिश में अब उनके गांव वाले भी भागीदारी कर रहे हैं। गांव वाले भी अपने बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। 

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