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महाराष्ट्र: एक छात्र को पढ़ाने के लिए रोज 5 किमी पैदल चलते हैं शिक्षक, घने जंगल के बीच निभा रहे अपना वादा

Sun, 13 Sep 2026 12:01 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 13 Sep 2026 12:01 PM IST
सार

हर सुबह शिक्षक जीवन मिथारी एक छात्र को पढ़ाने के लिए घने जंगल से करीब 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान उन्हें बारिश, जंगली जानवरों और खराब रास्तों जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे छात्र की पढ़ाई का वादा निभाने के लिए हर दिन स्कूल पहुंचते हैं।

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Teacher Walks 5 Km Through Dense Forest Every Day to Teach One Student
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI

विस्तार

हर सुबह ज्यादातर शिक्षक गाड़ी या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से स्कूल जाते हैं। लेकिन जीवन मिथारी एक छात्र को पढ़ाने के लिए रोज घने जंगल से करीब 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस रास्ते में उन्हें बारिश, जंगली जानवरों और बिना सड़क वाले मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ता है।

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55 साल के जीवन मिथारी पिछले 13 साल से इसी तरह स्कूल जा रहे हैं। वे महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के गगनबावड़ा तालुका में स्थित कवलटेक धनगरवाड़ा के जिला परिषद स्कूल में पढ़ाते हैं। यह गांव सिंधुदुर्ग जिले की सीमा के पास एक दूर-दराज इलाके में स्थित है।

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इस गांव में बिजली नहीं है और स्कूल तक गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं। सबसे नजदीकी सड़क से 2.5 किलोमीटर दूर होने की वजह से, मिथारी को स्कूल आने-जाने के लिए रोज 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

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अच्छी सुविधाओं वाली पोस्टिंग छोड़कर चुना मुश्किल रास्ता

मिथारी ने PTI को बताया, "मैं 26 जुलाई, 2013 को वहां गया था। तब से मैं वहां काम कर रहा हूं।"

इस दूर-दराज स्कूल में ट्रांसफर लेने का उनका फैसला किसी हिम्मत वाले काम से कम नहीं था। वहां जाने से पहले, मिथारी कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के चेयरमैन रह चुके थे। उन्होंने बताया कि उनके साथी शिक्षकों ने एक बार कहा था कि उनके जैसे प्रभावशाली लोग अक्सर अच्छी सुविधाओं वाले स्कूलों में पोस्टिंग पा लेते हैं, जबकि दूसरों को मुश्किल और दूर-दराज इलाकों में काम करना पड़ता है।


मिथारी ने याद करते हुए कहा, "मैंने कहा कि मैं जाऊंगा।" उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ट्रांसफर मांगा और उस दूर-दराज स्कूल को चुना।

छात्रों की संख्या घटी, लेकिन शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं

कभी इस स्कूल में छात्रों की संख्या काफी ज्यादा हुआ करती थी। कवलटेक धनगरवाड़ा और आनंदुर धनगरवाड़ा से मिलकर बने इस छोटे से गांव में पहले 70 से 100 परिवार रहते थे। लेकिन 2000 के बाद, रोजगार की तलाश में कोल्हापुर शहर की ओर पलायन के कारण यहां की आबादी धीरे-धीरे कम हो गई, जिससे बच्चों की संख्या भी घट गई।

इस साल, मिथारी के पास आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक छात्रा है: स्वरा बोडाके, जो तीसरी कक्षा में है। उसकी छोटी बहन, जो अभी औपचारिक शिक्षा के लिए काफी छोटी है, वह भी क्लास में आती है क्योंकि गांव में कोई आंगनवाड़ी (सरकार द्वारा चलाया जाने वाला महिला और बाल देखभाल केंद्र) नहीं है। उम्मीद है कि वह अगले साल पहली कक्षा में दाखिला लेगी।

हालांकि, कम दाखिलों के बावजूद मिथारी का समर्पण कम नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "भले ही मेरे पास कम बच्चे हों, मुझे अपना काम करते रहना है।"

जंगल के रास्ते में तेंदुए और गौर का भी खतरा

इस रास्ते पर चलने में जोखिम भी है। यहां अक्सर गौर (जंगली भैंसा), तेंदुए और दूसरे जंगली जानवर आते-जाते रहते हैं। मिथारी ने बताया कि रास्ते में उनका सामना गौर से हुआ है और गांव वालों ने उन्हें सिखाया है कि अगर जानवर अकेला हो या झुंड में हो, तो अलग-अलग तरह से कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "आखिरकार, हम उनके इलाके में जा रहे हैं।"

एक बार बस्ती के पास एक तेंदुए ने एक युवा बैल को मार डाला। इसके बाद वन अधिकारियों ने एक ट्रैप कैमरा लगाया और उस जानवर की सैकड़ों तस्वीरें लीं। मिथारी को सलाह दी गई कि स्कूल आते-जाते समय वे रास्ते में कहीं बैठें या रुकें नहीं।

शिक्षक ने कहा, "मैं भी एक इंसान हूं। मुझे भी डर लगता है। लेकिन समय के साथ, यह आदत बन गई है।"

बारिश में छोटे बच्चों के लिए 11 किमी चलना मुश्किल

बच्चों के लिए दूसरा विकल्प व्यावहारिक नहीं है। मिथारी के अनुसार, धुंडावाड़े में सबसे पास के स्कूल तक जाने के लिए छोटे बच्चों को हर तरफ लगभग 5.5 किलोमीटर, यानी रोजाना करीब 11 किलोमीटर का सफर करना होगा। मॉनसून के दौरान, 6 से 9 साल के बच्चों के लिए ऐसा सफर करना बहुत मुश्किल होगा।

यहां के लोग मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर खेती, जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने और जामुन, करवंद और दूसरे जंगली फलों जैसे वन उत्पादों पर निर्भर हैं। गौर के बार-बार आने से अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों ओर दोहरी बाड़ लगाई गई है।

मई 2029 में रिटायर होने वाले मिथारी का कहना है कि इतना लंबा पैदल चलना अब रोजाना की कसरत जैसा हो गया है।

स्कूल में कम बच्चों के दाखिले के बावजूद, उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूल की चारदीवारी बहुत जरूरी है।
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