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मेडिकल पीजी: न रद्द और न ही स्थगित होंगी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं, उच्चतम न्यायालय ने किया इनकार

Fri, 18 Jun 2021 04:35 PM IST
वर्तिका तोलानी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: वर्तिका तोलानी Updated Fri, 18 Jun 2021 04:35 PM IST
सार

रीक्षार्थी-डॉक्टर कोविड-19 की ड्यूटी में लगे हुए हैं, इस तर्क के आधार पर हम परीक्षा स्थगित या रद्द नहीं कर सकते हैं। - सुप्रीम कोर्ट

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Supreme Court refuses to cancel or postpone final year PG medical exams AIIMS DELHI, NMC national medical council
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

सभी विश्वविद्यालयों को स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) के अंतिम वर्ष की मेडिकल परीक्षा रद्द या स्थगित करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कही। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की अवकाशकालीन पीठ ने कहा है कि परीक्षार्थी-डॉक्टर कोविड-19 की ड्यूटी में लगे हुए हैं, इस तर्क के आधार पर न ही परीक्षाएं रद्द की जा सकती है और न ही स्थगित। 

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जहां संभव था वहां हमने हस्तक्षेप किया - सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने अप्रैल में पहले ही एक एडवाइजरी जारी कर देश के विश्वविद्यालयों से अंतिम वर्ष की परीक्षा की तारीखों की घोषणा करते समय कोविड की स्थिति को ध्यान में रखने को कहा है। हमने हस्तक्षेप किया है जहां यह संभव था जैसे एम्स, नई दिल्ली द्वारा आयोजित आईएनआई सीईटी परीक्षा को एक महीने के लिए स्थगित करना। क्योंकि यहां हमने पाया है कि छात्रों को तैयारी के लिए उचित समय दिए बिना परीक्षा की तारीख तय कर दी गई थी। जिसका कोई औचित्य नहीं था।

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यह था पूरा मामला

दरअसल, 29 डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर कर यह अनुरोध किया था कि सुप्रीम कोर्ट एनएमसी को यह आदेश दे कि वह सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को उचित समय प्रदान करे।

कोर्ट ने जवाब में यह कहा
इस पर पीठ ने कहा कि हमे नहीं पता कि परीक्षा की तैयारी करने के लिए सही समय कितना हो सकता है। अदालत कैसे उचित समय तय कर सकती है? यह तो हर किसी का अपना-अपना होता है। सभी विश्वविद्यालय अपने इलाके में कोरोना की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए एनएमसी के परामर्श के आधार पर इसका फैसला करें।

देश में हर जगह भिन्न-भिन्न स्थिति

न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल देश में हर जगह कोरोना संक्रमितों की संख्या समान नहीं हो सकती। अप्रैल-मई में कोरोना की वजह से दिल्ली के हालात बहुत बुरे थे। लेकिन अब प्रति दिन बमुश्किल 200 मामले सामने आ रहे हैं। कर्नाटक में अभी भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं हैं। इसलिए हम विश्वविद्यालयों का पक्ष सुने बिना कोई फैसला नहीं ले सकते हैं।

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