उत्तराखंड में इस क्लास तक पढ़ेंगे बच्चे संस्कृत, NCERT की किताबें भी मिलेंगी सस्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रोत्साहन के लिए स्कूलों में संस्कृत पढ़ना इस कक्षा तक अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही अब छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें सस्ती उपलब्ध होंगी।
जिन छात्रों को बाजार से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पाठ्यक्रम की पुस्तकें खरीदनी हैं, उनके लिए अब आसानी हो जाएगी। उन्हें बाजार में सस्ती पुस्तकें मिल सकें, इसके लिए निर्धारित दरों से कम पर निविदाएं आमंत्रित करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
इसके लिए निर्धारित दरों से कम पर निविदाएं आमंत्रित करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है। जब निविदाएं कम दरों पर जारी होंगी तो पुस्तकें सस्ती मिलेंगी। इसका फायदा पांच-छह लाख स्कूली बच्चों को मिलेगा। इसके साथ ही कक्षा तीन से पांच तक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी।
एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम की पुस्तकों को छापने के लिए 28 नवंबर के शासनादेश में संशोधन किया गया है। संशोधित शासनादेश सचिव विद्यालयी शिक्षा डॉ. भूपेंदर कौर औलख की ओर से जारी कर दिया गया है।
खुले बाजार में सशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकों के लिए यह आदेश जारी किया गया है कि एनसीईआरटी और एससीईआरटी की पुस्तकों के कागज की खरीद और छपाई के लिए अलग-अलग निविदाएं जारी की जाएंगी। इसके साथ ही पाठ्य पुस्तकों के बिक्री मूल्य के लिए एससीईआरटी द्वारा निर्धारित दरों से कम पर ही निविदा आमंत्रित की जाएगी।
छात्रों को कक्षा छह से पढ़ाई जाएगी एनसीईआरटी की संस्कृत की पुस्तक
उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रोत्साहन के लिए कक्षा तीन से एससीईआरटी की पुस्तक पढ़ाई जाती हैं। इसे लागू रखा जाएगा। छात्रों को कक्षा छह से एनसीईआरटी की संस्कृत की पुस्तक पढ़ाई जाएगी। एससीईआरटी को संस्कृत की पुस्तक छपवाने का आदेश दिया गया है।
एससीईआरटी भी अलग-अलग निविदाओं आमंत्रित करके पुस्तकें छपवाएगा। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की निशुल्क वितरित की जाने वाली पुस्तकों की निविदाएं भी परिषद के मानकों की न्यूनतम दर पर निर्धारित करने के लिए कहा गया है।
क्रय/निविदा समिति के अध्यक्ष महानिदेशक
क्रय/निविदा समिति का अध्यक्ष महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को बनाया गया है। पारिदर्शिता बनाए रखने के लिए इसमें राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त गंगा प्रसाद शर्मा को भी सदस्य के रूप में नामित किया गया। समिति में विभागीय अधिकारी भी रहेंगे। इसके साथ ही महानिदेशक को अधिकार दिया गया है कि वह अपनी मर्जी से किसी अन्य व्यक्ति को समिति के सदस्य के रूप में नामित कर सकते हैं।
अगले सत्र से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होना है। यह प्रयास है कि 15 जनवरी तक पुस्तकें प्रकाशित हो जाएं जिससे समय से छात्रों की पढ़ाई शुरू हो सके।
-अरविंद पांडेय, विद्यालयी शिक्षा मंत्री
कमेंट
कमेंट X