Samwad 2025: क्या होगा एआई का भविष्य, क्या छात्र इसके आगे टिक पाएंगे? जानें संवाद के मंच पर एक्सपर्ट क्या बोले
Amar Ujala Samwad: अमर उजाला संवाद के मंच पर एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार भी पहुंचे। उन्होंने एआई, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा पर काम की जानकारी दी।
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Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन एआई, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्टार्टअप सहित कई महत्वपूर्ण पर विषयों पर बातचीत करने के लिए एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार भी मंच पर पहुंचे। उन्होंने एआई और एआई प्रशिक्षण पर विस्तार से बात की। इसके साथ ही उन्होंने आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
प्रो. राजीव कुमार ने एआई पर बात करते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि एआई इंटीग्रेट तो कर दिया, लेकिन उसे पढ़ाएगा कौन...? इसी चैलेंज को समझते हुए टीचर्स को ट्रेंड किया गया। पिछले चार सालों में करीब 4.50 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है, जो इमर्जिंग एरियाज़ में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा एनईपी लागू होने के बाद से ही हमने तकनीकी शिक्षा की जरूरतों को समझा। इसके लिए आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी जैसे संस्थानों की कमेटी बनाकर छात्रों की जरूरतों और करिकुलम में संशोधनों पर चर्चा की गई। इसका नतीजा यह हुआ कि आज छात्र उच्च कोटि की तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
स्कूलों में बच्चों को एआई पढ़ाया जा रहा है: प्रो. राजीव
तकनीकी शिक्षा में एआई पर फोकस किया जा रहा है। वहीं, स्कूली स्तर पर भी एआई पढ़ाया जा रहा है। हर विषय और पाठ्यक्रम को एआई से इंटीग्रेट कर दिया गया है। हालांकि, इसमें एक बड़ी चुनौती यह थी कि एआई पढ़ाने वाले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, अब लाखों शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
आईआईटी-एनआईटी के शिक्षक दे रहे ट्रेनिंग
प्रो. राजीव ने बताया कि साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण दिया गया है, जो बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हैं। इनमें से कुछ शिक्षक बच्चों को एआई पढ़ा भी रहे हैं। इसके अलावा, आईआईटी, एनआईटी से करार किया गया है। शिक्षक यहां जाकर फिजिकल रूप से रहते हैं। आईआईटी, एनआईटी के शिक्षक इन प्रशिक्षकों को तैयार कर रहे हैं कि अपने कोर ब्रांच में एआई को लाया जा सकता है।
स्टार्टअप पर बात करते हुए कि एआईसीटीई, आईआईटी, एनआईटी और सरकार के प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलता है। आज आईटी सेक्टर में स्टार्टअप को एक बहुत बड़ा एकोसिस्ट बन गया है।
कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र जब जॉब मार्केट में कदम रखते हैं तो अक्सर ऐसा होता है कि जो वो सीख कर आए हैं, वह आउटडेटेड हो चुका होता है। कंपनी कहती है कि हमें अब इसकी जरूरत नहीं है। ऐसे में अपस्किलिंग और रिस्किलिंग भी एक अहम पहलु हैं। इस समस्या पर बात करते हुए प्रो. राजीव ने कहा, "एनईपी आने के बाद किसी भी अब किसी भी कोर्स में 50 फीसदी कोर्स स्किलिंग के हो सकते हैं।
भारत सरकार ने "स्वयं प्लस पोर्टल" शुरू किया। इसपर वह कंपनियां है जिनकी ओरिजिनल टेक्नोलॉजी हैं, जैसे माईक्रोसॉफ्ट, एनएनटी, गूगल और बजाज फाइनेंस आदि। ये कंपनियां पोर्टल पर विभिन्न कोर्स उपलब्ध कराती हैं। बच्चे इन कोर्सेज में हिस्सा लेकर सीख सकते हैं।
नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर (NSDC) ने स्किल आधारित करीब चार हजार कोर्स विकसित किए हैं। स्किल इंडिया योजना के तहत उच्च शिक्षा के स्किल डेवलपमेंट के करीब साढ़े चार हजार कोर्स हैं। खास बात यह है कि बच्चा जब इन कोर्स को पूरा करता है, तो उसके क्रेडिट उसकी डिग्री में जोड़े जा सकते हैं।
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