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SAFALTA Talks युवाओं के कॅरिअर के लिहाज से भारत में पैकेजिंग इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल : सुरेश बंसल

Wed, 18 Sep 2024 11:57 AM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative
Media Solution Initiative Published by: Pushpendra Mishra Updated Wed, 18 Sep 2024 11:57 AM IST
सार

कहा, अगले 5 वर्षों में 200 बिलियन डॉलर की हो जाएगी पैकेजिंग इंडस्ट्री

विषय : ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स व पैकेजिंग सॉल्यूशन

अतिथि वक्ता : सुरेश बंसल, सीईओ व संस्थापक डीसीजीपैक

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SAFALTA Talks Future of packaging industry in India is bright in terms of career for youth:Suresh
ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सफलता.कॉम द्वारा ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स एवं पैकेजिंग सॉल्यूशन्स विषय पर आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में डीसीजी पैक के सीईओ व संस्थापक सुरेश बंसल ने ग्लोबल मार्केट ट्रेंड्स पर कहा कि बहुत सालों से, मैं कहूं 90 के दशक से भारत उत्पाद बनाने में पीछे है लेकिन सर्विस में आगे निकल गया। क्वालिटी और अच्छी पैकेजिंग दोनों ही जरूरी है एक्सपोर्ट के लिए। 90 के बाद के दशकों में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में भारत बहुत अच्छा करता गया। जिसमें खास सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में आज हम पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाए हुए हैं। क्योंकि इंजीनियरिंग औऱ टेक्नोलॉजी में जो भारत का टैलेंट था वह धीरे धीरे पूरे विश्व में फैल गया। आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, अमेरिका किसी भी देश की बात कर लें वहां की टॉप कंपनियों के ऊंचे पायदानों पर भारतीय पहुंच चुके हैं।

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21 वीं सदी में वैश्विक स्तर पर बढ़ा भारत का दबदबा

इधर देश सॉफ्टवेयर में लगातार अपनी गहराई पकड़ रहा है। आज हम प्रोजेक्ट्स, आउटसोर्सिंग, नॉलेज सेंटर्स व अनुसंधान में अपनी बेहतर पकड़ बना चुके हैं। आज हॉलीवुड की तमाम फिल्मों के इफेक्ट्स को भारत के स्टूडियोज से तैयार किया जा रहा है। एप्पल जैसी कंपनी भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स लगा चुकी है। विदेश की तमाम कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। भारत में स्टार्टअप इंडिया इकोसिस्टम डेवलप हो चुका है। कोविड-19 के बाद लगभग 2 लाख स्टार्टअप भारत में शुरू हो चुके हैं।

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इन स्टार्टअप्स में युवाओं ने रिसर्च, अनुसंधान व टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसे काम करके दिखा दिये हैं जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते थे। आज भारत विश्व भर के स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे सस्ता इलाज लोगों को उपलब्ध करा रहा है। देश में डिजिटल टेक्नोलॉजी का एक नया रस्ता खुला। एआई के नए ट्रेंड्स उसमें आईटी से एआई में जानें का बहुत ब़ड़ा स्कोप है। रोबोटिक्स में हमारे बहुत काम हो रहा है। डिजिटल मार्केटिंग औऱ डिजाइनिंग में बहुत सारा काम हो रहा है। विश्व भर में भारत के खादी की डिमांड बढ़ी है, यहां के सस्टेनेबल उत्पाद लोगों में रूचि पैदा कर रहे हैं। यहां बांस, धान की पराली व गन्ने के खरपतवार, तालाबों की बेल से भी उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं।

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भारत को अपने उत्पादों में गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना होगा

उन्होंने कहा कि भारत को अपने उत्पादों में गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना होगा। जो जूता आगरा या कानपुर में तैयार होता है वह बाजार में 600 रुपये में बिकता है। जबकि उसी चमड़े से जो जूता, स्विटजरलैंड, जर्मनी या चीन में तैयार होता है वह 10 हजार का बिकता है। वहीं स्विटजरलैंड उसी जूते को अपनी करेंसी में 60 हजार का बेचती है। कच्चा माल हमारा और आगरा का एक ही है लेकिन उनके काम करने के तरीके, छोटी छोटी चीजों पर बारीकी से काम का तरीका उन्हें बेहतर बनाता है।

 

डिजाइन प्रोस्पैक्ट पर भी काम करने की जरूरत है

ताइवान मौजूदा समय में डिजाइन का बड़ा सेंटर हैं। ताइवान ने डिजाइन इटली औऱ जर्मनी से सीखा है। जिसके कारण आज चीन में जो प्रोडक्ट तैयार हो रहे हैं उनकी पैकेजिंग और डिजाइन यूरोप के प्रोडक्ट्स से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन खोला गया। लेकिन भारत को पैकेजिंग के लिए दुनिया का सबसे बड़ा डिजाइन सेंटर तैयार करने की जरूरत है। जिसमें इटली, जर्मनी और ताइवान से डिजाइनर मौजूद रहें।

 

डिलीवरी कंपनियों ने खोले रोजगार के अवसर

उन्होंने भारत में इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बाद शुरू हुए परिवर्तनों पर बात की। जिसमें सुरेश बंसल ने कहा कि आज देश में ई-कॉमर्स सेक्टर का बहुत बड़ा उद्योग बन गया है। इसके अलावा आज कई कंपनियां ऐसी हैं जिनका कोई स्टोर नहीं है केवल ऑनलाइन एप के जरिये उन्होंने बिलियन डॉलर कारोबार खड़ा कर लिया है। जोमैटो, स्विगी ने रेस्टोरेंट से खाना लेकर कस्टमर तक पहुंचाने की सर्विस की शुरूआत की। उन्हें मौका ऐसे मिला कि पहले अच्छे रेस्टोरेंट में सीटें सीमित होती थीं। लोगों को खाने के लिए सीट के खाली होने का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन इन डिलीवरी कंपनियों के कारोबार से लाखों लोगों को नौकरियां मिल गईं।

 

भारतीय डाक सेवा को उन्नत बनने की जरूरत

भारत में भारतीय डाक खाने की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारत में डाक खाने द्वारा सर्विसेज जो बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थी नहीं की गई। जिसके कारण विदेशी कंपनियों, व निजी कंपनियों को आगे आकर पोस्टल काम करने का मौका मिल गया। आज चीन औऱ अमेरिका के पोस्ट ऑफिस किसी निजी एजेंसी से बेहतर डिलीवरी दे रहे हैं। अमेरिका में बैठा कोई व्यक्ति अगर चीन के किसी फॉर्मर से किसी चीज का ऑर्डर देता है जो चाइना पोस्ट उसे पैक कर 10-12 दिन में अमेरिका में बैठे उस व्यक्ति तक डिलीवर करवा देता है। भारत ने कोस्टल सर्विसेज भी हाल ही में शुरू की है। जिसे निजी कंपनियां सालों पहले शुरू कर चुकी हैं।

 

पर्यावरण-फ्रेंडली पैकेजिंग तैयार करने पर जोर

उन्होंने सस्टेनेबल प्रोडक्ट औऱ पैकिंग पर बात करते हुए कहा कि देश सस्टेनेबल गोल्स 2030 तक नेट जीरो उत्सर्जन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को घटाने की जरूरत है। ऐसे पैकिंग मटीरियल पर काम करने की जरूरत है जो आसानी से बॉयो डिकंपोज हो जाए। आजकल प्लास्टिक यूज बंद करने के बाद कंपनियों में कागज के बैग का चलन बढ़ गया है। जिसकी वजह से पेड़ों की कटाई बढ़ रही है। ऐसे में यह भी पर्यावरण की दृष्टि से अच्छे रुझान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मशरूम से पैकिंग मटीरियल तैयार करने पर काम शुरू किया गया। जोकि आसानी से पर्यावरण में डिकंपोज हो जाएंगे। इससे तैयार मटीरिटल को थर्माकोल से रिप्लेस किया गया। इसके अलावा ऊना में शी-बीड्स से पैकेजिंग मटीरियल तैयार किये गए जो पर्यावरण फ्रेंडली हैं। देश में बांस, धान की पराली से भी पैकेजिंग तैयार किया जा रहा है। गन्ने का भूसा बड़े पैमाने पर पैकेजिंग में इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

पैकेजिंग उद्योग में युवाओं के लिए हैं बहुत अवसर

बंसल ने कहा कि पैकेजिंग उद्योग में युवाओं के लिए बहुत अवसर हैं। आज आप किसी भी संस्थान से डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, डिजाइन स्किल्स, पैकेजिंग स्किल्स सीखकर इस इंडस्ट्री में अपना कॅरिअर बना सकते हैं। क्योंकि पैकेजिंग इंडस्ट्री आज 100 बिलियन डॉलर की है। जो अगले 5 सालों में 200 बिलियन डॉलर की हो जाएगी। इसी तरह एप्पल अगर भारत में 10 बिलियन डॉलर का कारोबार कर रहा है तो आने वाले सालों में ये कारोबार और बड़ा होगा। इसी तरह से हजारों कंपनियां भारत में आकर काम कर रही है। पिछले 10 सालों में देश के लाखों लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठकर मध्यमवर्गीय परिवार की श्रेणी में आए हैं। जिन्हें अच्छे ब्रांड और पैकेजिंग के उत्पादों का शौक है। ऐसे में ये इंडस्ट्री अभी सिर्फ 20% ग्रोथ कर पाई है। 142 करोड़ की आबादी वाले भारत में पैकेजिंग इंडस्ट्री के ग्रो करने का अभी बहुत स्कोप बाकी है।    

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