फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   PIL in Supreme Court Challenges Reduction of NEET-PG 2025-26 Qualifying Cut-Off

NEET PG: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नीट पीजी कटऑफ का मुद्दा, याचिका दायर, एनबीईएमएस के फैसले को चुनौती

Fri, 16 Jan 2026 07:29 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 16 Jan 2026 07:29 PM IST
सार

NEET PG 2025 Cut-Off row: नीट-पीजी 2025-26 की कट-ऑफ घटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में इसे मनमाना बताते हुए कहा गया है कि इससे मेरिट, मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल शिक्षा के मानकों पर गंभीर असर पड़ेगा।
 

विज्ञापन
PIL in Supreme Court Challenges Reduction of NEET-PG 2025-26 Qualifying Cut-Off
नीट पीजी की कटऑफ कम करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

नीट-पीजी 2025-26 के लिए योग्यता कट-ऑफ प्रतिशत घटाने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस के खिलाफ दाखिल की गई है, जिसमें क्वालिफाइंग कट-ऑफ को कम किया गया था।

विज्ञापन


यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि विवादित नोटिस के माध्यम से कट-ऑफ को असामान्य रूप से बेहद कम, यहां तक कि शून्य और नकारात्मक स्तर तक घटा दिया गया है।
विज्ञापन


मामला एक नजर में:

  • 13 जनवरी को एनबीईएमएस ने नीट पीजी की कटऑफ संशोधित की।
  • इस संशोधन में कट-ऑफ प्रतिशत को बहुत कम कर दिया गया, यहां तक की शून्य कर दिया गया।
  • इस बदलाव के बाद -40 अंक पाने वाला भी मेडिकल की पढ़ाई के लिए योग्य हो गया था।
  • नोटिस जारी होने पर इस फैसले का विरोध होने लगा।
  • डॉक्टर संगठनों समेत अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • एनबीईएमएस के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है यह फैसला

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में इसे संवैधानिक चुनौती बताते हुए कहा गया है कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के लिए योग्यता मानकों में की गई यह कटौती मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इससे मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा पैदा होता है।

याचिका में कहा गया है कि चिकित्सा कोई सामान्य पेशा नहीं है, बल्कि यह सीधे मानव जीवन, शारीरिक अखंडता और गरिमा से जुड़ा हुआ है। केवल खाली सीटें भरने के आधार पर इस तरह का निर्णय मेरिट को समाप्त करता है, प्रतियोगी परीक्षा को महज औपचारिकता में बदल देता है और जीवन से जुड़े क्षेत्र में पेशेवर मानकों के पतन को संस्थागत रूप देता है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि पीजी स्तर पर मेरिट में की गई यह ढील राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

क्या है मामला?

नीट-पीजी 2025‑26 के लिए एनबीईएमएस ने 13 जनवरी 2026 को एक नोटिस जारी किया, जिसमें पीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए योग्यता कट‑ऑफ को असामान्य रूप से कम कर दिया गया। इसे आरक्षित वर्ग के लिए -40 अंक तक कर दिया गया। एनबीईएमएस के इस फैसले का विरोध हो रहा था और अब फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed