Hindi: भारतीय मूल के छात्रों ने बताई हिंदी की अहमियत, कहा- देश और संस्कृति से जुड़े रहना सिखाती है मातृभाषा
Hindi: बातचीत के दौरान लंदन में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि उनका जन्म भारत में हुआ था। वह पढ़ाई के लिए लंदन चली गईं थीं। उन्होंने बताया कि हिंदी से जुड़े रहने की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से मिली। माता-पिता ने ही उन्हें अपनी मातृ भाषा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
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Hindi: आज के समय में जहां चारों ओर अंग्रेजी भाषा का बोल बाला है, वहीं विदेशों में रहने वाले लोग हिंदी को काफी अहमियत देते हैं। विदेश में पढ़ने वाले कुछ छात्रों ने अमर उजाला से बातचीत की। खास बात यह है कि ये छात्र हिंदी सीख रहे हैं। विदेश में रहते हुए भी ये छात्र हिंदी भाषा से बहुत प्रभावित हैं। ये उन लोगों के लिए एक मिसाल हैं, जो अपनी मातृ भाषा हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं या समझते हैं कि अगर वह हिंदी बोलेंगे तो लोग उन्हें कम पढ़ा-लिखा समझेंगे।
इनमें से ज्यादातर छात्र भारतीय मूल के हैं। इनका मानना है कि उनकी जड़ें हिंदी से जुड़ी हैं, इसलिए वे इससे दूर नहीं होना चाहते हैं। कुछ छात्र हिंदी सीखने के लिए क्लास भी ले रहे हैं।
बातचीत के दौरान लंदन में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि उनका जन्म भारत में हुआ था। वह पढ़ाई के लिए लंदन चली गईं थीं। उन्होंने बताया कि हिंदी से जुड़े रहने की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से मिली। माता-पिता ने ही उन्हें अपनी मातृ भाषा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी बहुत खूबसूरत भाषा है
एक विदेशी महिला ने बताया कि वह 13 साल से हिंदी बोल और सीख रही हैं। उनके पति भारत के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि हिंदी बहुत खूबसूरत भाषा है और उन्हें हिंदी गाने पसंद हैं। भारतीय त्योहारों से भी वो बहुत प्रभावित होती हैं। खासतौर पर दीवाली और मकर संक्रांति उन्हें बहुत पसंद है।
एक-दूसरे की भाषा सीखना अच्छा है
एक छात्रा ने बताया कि वह 8 साल की आयु में विदेश चली गईं थीं। वह 3 साल से हिंदी सीख रही हैं। उनका कहना है कि यह अच्छा है कि हम एक दूसरे की भाषा सीखते हैं। भारत में लोग अंग्रेजी सीखते हैं, जबकि विदेश में लोग हिंदी की क्लास लेते हैं।
एक छात्र ने बताया कि वह 10 साल की आयु से हिंदी सीख रहा है। वह ऑनलाइन क्लास लेकर हिंदी सीख रहा है। हिंदी सीखने में बहुत रुचि है। उन्होंने बताया, "मेरी मां गुजरात से हैं इसलिए हिंदी से मेरा लगाव है। तुझमें रब दिखता है गाना बहुत पसंद है। श्रेया घोषाल के गाने पसंद हैं। हिंदी बोलने के साथ-साथ लिखना भी सीख रहे हैं।"
हिंदी फिल्में और गाने पसंद हैं
15 वर्षीय छात्र हिमांशु मिश्रा ने बताया कि वह यूके में रहते हैं। 4-5 साल से हिंदी सीख रहे हैं। माता-पिता भारतीय हैं। माता-पिता ने मातृभाषा हिंदी सीखने-बोलने के लिए प्रेरित किया। हिंदी गाने और फिल्में काफी पसंद हैं। हिमांशु ने बताया कि पहले वह अंग्रेजी सब-टाइटल के साथ हिंदी मूवी देखते थे, लेकिन अब उन्हें इसकी जरूरत नहीं पड़ती।
प्रिया भाटिया जन्म से विदेश में रहती हैं, वह 2018 से हिंदी सीख रही हैं। पहले उनकी माता ने उन्हें हिंदी सिखाई, बाद में इसके लिए उन्होंने क्लास ज्वाइन कर ली। लोगों से बात करने के लिए हिंदी सीख रही हैं। हिंदी गाने सुनती हैं। हिंदी की कविताएं उन्हें काफी पसंद हैं।
अपने देश और संस्कृति से जुड़े रहना बेहद जरूरी
एक अन्य छात्रा ने बताया कि वह हिंदी इसलिए सीख रही हैं, ताकि अपने माता पिता से अच्छे से बात कर सकें। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनका कहना है कि जब भी कोई भारतीय त्यौहार होता है, तो भाषा के कारण उन्हें अलग-थलग महसूस होता था। अपनी संस्कृति, परिवार और देश से जुड़े रहने के लिए वह हिंदी सीख रही हैं। उनका कहना है कि अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा सीखना-बोलना बुरा नहीं है, पर भारतीय होने के नाते हिंदी को नहीं भूलना चाहिए।
अनुभव के लिए ही सही, पर हिंदी सभी को सीखनी चाहिए
एक अन्य छात्र ऋषि ने बताया कि वह भारत में पैदा हुए और 3 साल की आयु में यूके चले गए। चूंकि भारतीय मूल के हैं इसलिए हिंदी सीख रहे हैं। हिंदी दूसरी भाषाओं से अलग है। अनुभव के लिए ही सही, पर हिंदी जरूर सीखनी चाहिए। हिंदी गाने और कविता पसंद हैं।
हिंदी में संस्कार हैं
वेस्टइंडीज मूल का एक 14 वर्षीय छात्र भी यहां उपस्थित रहा। वह भी हिंदी सीख रहा है। उसे हिंदी सीखने में काफी रुचि है। अपने आसपास के लोगों और दोस्तों को देखकर वह हिंदी सीखने के लिए प्रेरित हुआ। उसने कहा कि किसी भी भाषा को सीखने में समय लगता है। इस बात से नहीं डरना चाहिए लोग जज करेंगे। हिंदी में संस्कार, भावनाएं हैं। यह भाषा बेहद खास है।
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