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क्या है PUC सर्टिफिकेट, कैसे होती है गाड़ियों के प्रदूषण की जांच? इसके लिए देना होगा बड़ा जुर्माना

Mon, 09 Sep 2019 08:53 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 09 Sep 2019 08:53 PM IST
सार

  • नए मोटर व्हीकल कानून के बाद 10 गुना बढ़ गया प्रदूषण का जुर्माना
  • देश भर के प्रदूषण जांच केंद्रों पर लग रही है भीड़

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New Motor Vehicle Act 2019, How car or bike pollution is tested, Know PUC fine

विस्तार

सितंबर की पहली तारीख... जब से नया मोटर व्हीकल (अमेंडमेंट) एक्ट 2019 लागू हुआ है, तब से हर जगह सबसे ज्यादा भीड़ प्रदूषण केंद्रों पर बढ़ी है। लोग अपनी-अपनी गाड़ियों के प्रदूषण की जांच करवाने पहुंच रहे हैं। क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाण पत्र यानी PUC जरूरी है। ये कागज न होने पर आपको जुर्माने के तौर पर बड़ी रकम चुकानी पड़ सकती है।

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क्या होता है PUC? कैसे होती है गाड़ियों के प्रदूषण की जांच? इसके उचित कागज न होने पर कितना देना पड़ सकता है जुर्माना? इन सभी सवालों के जवाब आगे दिए जा रहे हैं।

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  • PUC का फुल फॉर्म है पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल। इसकी जांच को कहते हैं पीयूसी टेस्ट। इस जांच के बाद ही किसी गाड़ी को पीयूसी सर्टिफिकेट दिया जाता है।
     
  • यह सर्टिफिकेट एक निश्चित समय के लिए मान्य होता है। BS4 गाड़ियों के लिए यह समय सीमा एक साल की होती है। जबकि अन्य गाड़ियों के लिए एक बार किया गया प्रदूषण जांच और पीयूसी सर्टिफिकेट तीन महीने तक ही मान्य होता है।
     
  • अगर आपकी गाड़ी के पीयूसी सर्टिफिकेट की समय सीमा खत्म हो चुकी है, तो पकड़े जाने पर आपको इसके लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। नया कानून लागू होने से पहले जुर्माने की राशि पहली बार की गलती के लिए एक हजार और इसके बाद के लिए दो हजार रुपये थी।
     
  • वहीं, गाड़ी के प्रदूषण की जांच करवाकर नया सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए आपको सिर्फ 60 से 100 रुपये तक ही देने होंगे।

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  • भारत में गाड़ियों के प्रदूषण की जांच की प्रक्रिया सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स द्वारा विकसित की गई है।
     
  • प्रदूषण की जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण  के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
     
  • परिवहन विभाग के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन 217.7 टन कार्बन मोनोऑक्साइड, 84.1 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड और 66.7 टन हाइड्रोकार्बन्स का उत्सर्जन सिर्फ गाड़ियों से होता है।

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