MP Samwad 2025: संवाद में हुआ मेडिकल शिक्षा के उन्नयन पर मंथन, मंत्री विश्वास सारंग ने गिनाए सरकार के प्रयास
Amar Ujala Samwad 2025: पहली बार मध्य प्रदेश में आयोजित हो रहे 'अमर उजाला संवाद' कार्यक्रम में मेडिकल शिक्षा पर भी बात हुई। मंच पर पहुंचे मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने मेडिकल के क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को गिनाया।
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Amar Ujala MP Samwad 2025: मंच पर पहुंचे मध्य प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के मंत्री ने खेलों के उन्नयन और मेडिकल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर बात की। मंत्री ने कहा कि युवा को व्यवस्थित, संस्कारित, संयम और अनुशासन की परिपूर्णता में फिट करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेलों को प्राथिकता दी। पहली बार ऐसा कोई प्रधान मंत्री हुआ जो टीम इंडिया के हारने पर उनका हौसला बनाने के लिए ड्रेसिंग रूम में जाकर उनसे मिलता है। मंत्री ने कहा कि पहले ऐसा कहा जाता था कि "पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब" लेकिन अब इस सोच में बहुत बदलाव आया है। इस सोच को दमदार तरीके से पीएम मोदी ने स्थापित किया।
मंत्री ने बताया कि सरकार सिर्फ सरकारी नौकरी पर ध्यान न देकर एलीट सर्विसेज़ के क्षेत्र पर भी काम कर रहे हैं। जो खिलाड़ी अच्छा खेल रहा है वह सिर्फ सरकारी नौकरी तक की सोच न रखे, बल्कि उसे नौकरी देने वाला भी बनाया जाए। सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। खेलों के उन्नयन के लिए हमने अगल-अलग एकेडमियां बनाईं। इसके साथ ही खिलाड़ी खेल से जुड़ी एलाइट सर्विज की दिशा में भी आगे बढ़े इस दिशा में काम किया जा रहा है।
मेडिकल शिक्षा को बेहतर और सहभागिता बढ़ाने पर किया काम: मंत्री
एक सवाल के जवाब में मंत्री सारंग ने कहा, "पहले जब मैं मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर था तो मैंने एमपी में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल शुरू की। प्रधानमंत्री जी ने जब लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को अलग करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बात की, तो उन्होंने यही बात कही थी कि क्यों न इस देश में मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन भी हिंदी में या क्षेत्रीय भाषाओं में होनी चाहिए। हमने माननीय मोदी जी के निर्देश को चुनौती के रूप में लिया और निर्णय लिया कि हम एमपी में हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू करेंगे।"
हमने मेडिकल कॉलेजों की फैकल्टी से बात की उन्हें इसके लिए मनाया। भोपाल के मंदार में वॉर रूम बनाया और लगभग आठ महीनों की मेहनत के बाद मेडिकल प्रथम वर्ष के चार सब्जेक्ट का रूपांतरण किया। हमने ट्रांसलेशन नहीं किया, हमने ट्रांसलिटरेशन किया। जो हमने लॉन्च किया वो आज तक चल रहा है।
मेरी ऐसी सोच थी कि हम हिंदी और अंग्रेजी में लड़ाई नहीं कराना चाहते थे। हमने मेडिकल टर्मिनोलॉजी को नहीं बदला। हमने अंग्रेजी में चलने वाली किताबों का ट्रांसलिटरेशन इतनी बखूबी किया कि कहीं कोई दिक्कत नहीं होती।
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