पहल: क्षेत्रीय भाषाओं में डिक्शनरी जारी करेगी सरकार, 15 क्षेत्रों को कवर करना पहली प्राथमिकता
भारत सरकार और शिक्षा मंत्रालय क्षेत्रीय भाषाओं के मूल शब्दकोशों पर काम कर रहा है। जिससे कि क्षेत्रीय भाषाओं पर पकड़ को मजबूत बनाया जा सके और इनके शब्द आसानी से मिल सकें और इनका ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो सके।
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Dictionaries of Regional Languages: भारतीय शिक्षा मंत्रालय का वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी) 10 भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दावली विकसित करने के लिए काम कर रहा है। जिससे कि क्षेत्रीय भाषाओं पर पकड़ को मजबूत बनाया जा सके और इनके शब्द आसानी से मिल सकें और इनका ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो सके।
संस्कृत, बोडो, संथाली, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, नेपाली, मणिपुरी, सिंधी, मैथिली उन 22 भाषाओं में शामिल हैं, जिन्हें भारत की आठवीं अनुसूची में आधिकारिक भाषाओं के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, तकनीकी अवधारणाओं और वैज्ञानिक शब्दों को समझाने के लिए शब्दावली की कमी के कारण उनमें बहुत कम अध्ययन सामग्री का बाजार में उपलब्ध हो पाती है।
वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली तीन से चार महीनों में प्रत्येक भाषा में 5,000 शब्दों के साथ मूल शब्दकोशों को जारी करेगा। ये डिजिटल रूप से, बिना किसी शुल्क के और खोज योग्य प्रारूप में उपलब्ध होंगे। प्रत्येक भाषा में 1,000-2,000 प्रतियाँ छपी होंगी।
15 क्षेत्रों को कवर करना पहली प्राथमिकता
सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, पत्रकारिता, लोक प्रशासन, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणीशास्त्र, मनोविज्ञान, भौतिकी, अर्थशास्त्र, आयुर्वेद और गणित सहित 15 क्षेत्रों को कवर करना पहली प्राथमिकता है। इससे विश्वविद्यालय और मिडिल और सीनियर दोनों स्कूलों के लिए पाठ्यपुस्तकें बनाना संभव होगा।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी), ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेन और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी)-नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) जैसे एंट्रेंस एग्जाम्स के लिए कंटेंट तैयार करने में मदद के लिए इन डिक्शनरी को राज्यों शिक्षा बोर्ड, विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग स्कूल और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में बांटा जाएगा।
1950 में, 14 भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा सूची में शामिल किया गया था। बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 2004 में, कोंकणी, मणिपुरी और सिंधी को 1992 में और सिंधी को 1967 में पेश किया गया था। शिक्षा मंत्रालय के सीएसटीटी के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश नाथ झा ने कहा, "इन 10 भाषाओं में सामग्री और भाषाई संसाधनों की कमी है, जिससे इन भाषाओं में सीखने की सामग्री की कमी हो रही है।
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