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नए एग्रिगेट कटऑफ के बावजूद आईआईटी की साख कायम, मैथ्स, कैमिस्ट्री व फिजिक्स से नहीं की छेड़छाड़

Fri, 15 Jun 2018 11:43 AM IST
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली Updated Fri, 15 Jun 2018 11:43 AM IST
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JEE Advance new aggregate cutoff issued, reputation of the IIT remains intact

दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले जेईई एडवांस परीक्षा पर रिजल्ट के बाद एग्रिगेट कटऑफ घटाकर एक्सटेंडेड मेरिट लिस्ट निकालने का दाग बेशक लगा है, लेकिन आईआईटी प्रबंधन ने एचआरडी के प्रेशर के बाद भी आईआईटी की साख और मैरिट को प्रभावित नहीं होने दी। दिग्गजों ने बीच का रास्ता निकाला और नए 13850 क्वालिफाई छात्र मेरिट में जोड़कर कुल छात्रों का आंकड़ा तो बढ़ा दिया, लेकिन सब्जेक्ट मेरिट कटऑफ कायम रखी।  

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सब्जेक्ट मेरिट के मिनिमम 36 अंकों को नहीं घटाया  
जेईई एडवांस की परीक्षा 360 अंक की थी, जिसमें मैथ्स, फिजिक्स व कैमिस्टी प्रति विषय 120-120 अंक का था। छात्रों को तीनों विषयों में 36 पास अंक लेने अनिवार्य होते हैं, यानी एक भी विषय में पास फीसदी न आने पर मेरिट में जगह नहीं मिलती है। इसके तहत जनरल वर्ग के लिए मैथ्स में 12 अंक, कैमिस्ट्री में 12 अंक व फिजिक्स में 12 अंक कम से कम अनिवार्य थे।
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जबकि ओबीसी के लिए 11 अंक तो एससी, एसटी व पीडब्ल्यूडी के लिए 6-6 अंक व प्रीपेटरटरी कोर्स रैंक लिस्ट(एसटी वर्ग के छात्र मैरिट में नहीं आते हैं, उन्हें आईआईटी एक साल की ट्रेनिंग के बाद बीटेक की पढ़ायी करवाता है) 3-3 अंक मिनिमम थे। एक्सटेंडेड मेरिट लिस्ट के दौरान कुल पास फीसदी अंकों में गिरावट की गयी, लेकिन सब्जेक्ट मेरिट कटऑफ में कोई अंक कम नहीं किए गए।  

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पूर्व आईआईटी डायरेक्टर ने फैसले का किया स्वागत 

पूर्व आईआईटी डायरेक्टर प्रो. गौतम बोहरा के मुताबिक, सरकार का फैसला सही है, क्योंकि एक-एक सीट महत्वपूर्ण होती है। सीट खाली रहने से छात्रों को नुकसान होता। हालांकि यह परंपरा न बनें, इसके तहत कटऑफ क्राइटिरिया पर आईआईटी को कुछ नियम बनाने होंगे, ताकि दोबारा रिजल्ट जारी होने के बाद एक्सटेंडेड कटऑफ लिस्ट निकालने की जरूरत न पड़ें।  

वहीं, आईआईटी के पूर्व डायरेक्टर प्रो. संजय धांढे ने कहा कि यह फैसला बेशक आईआईटी के लिए चौंकाने वाला है, लेकिन एससी व एसटी छात्रों की क्वालिफाइड लिस्ट में कमी के चलते लिया गया होगा। सरकार एससी व एसटी छात्रों को बराबरी का दर्जा देती है, ऐसे में उनकी सीट खाली रहने से गलत संदेश जाता। इसे गलत फैसले की बजाय स्वागत करना चाहिए कि कोई सीट खाली न रहे।  

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