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आईआईटी: छात्र आत्महत्या पर बढ़ी चिंता, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति? क्या है नया प्रस्ताव?
Sun, 11 Oct 2026 02:01 PM IST
शिवम तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sun, 11 Oct 2026 02:01 PM IST
सार
IIT Mental Health: देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेषज्ञों का अलग कैडर बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक के स्वीकृत पद शामिल हो सकते हैं। उच्चतम न्यायालय की राष्ट्रीय कार्यबल ने शिक्षकों के प्रशिक्षण की कमी पर चिंता जताई है। जानिए, इस प्रस्ताव में क्या है और संस्थानों में पहले से कौन सी पहल चल रही हैं।
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IIT Mental Health
- फोटो : AI Generated
विस्तार
देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों यानी आईआईटी में छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशेषज्ञों का अलग कैडर बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक जैसे विशेषज्ञों के लिए नियमित पद बनाए जा सकते हैं। आईआईटी के निदेशकों के अनुसार, इसका उद्देश्य परिसर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को हाल में हुई छात्रों की मौतों का नतीजा नहीं माना जा रहा है। निदेशकों ने बताया कि इस विषय पर कम से कम दो वर्षों से चर्चा चल रही है।
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छात्र आत्महत्या की घटनाओं ने क्यों बढ़ाई चिंता?
इस वर्ष कई आईआईटी परिसर छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के कारण चर्चा में रहे हैं। 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिसर में विरोध प्रदर्शन हुए और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई। इससे पहले अगस्त में आईआईटी दिल्ली के एक छात्र की भी आत्महत्या से मौत हुई थी। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने विद्यार्थियों पर पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़े दबाव को समझने तथा समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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क्या परिसर में पहले से मिलती है मानसिक स्वास्थ्य सहायता?
शिक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष संसद को बताया था कि सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, भारतीय प्रबंधन संस्थानों, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य या परामर्श केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें पूर्णकालिक अथवा आवश्यकता के अनुसार आने वाले पेशेवर परामर्शदाता, नैदानिक मनोवैज्ञानिक और कुछ संस्थानों में मनोचिकित्सक भी उपलब्ध हैं। हालांकि, आईआईटी निदेशक के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था विद्यार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। कुछ संस्थान बाहरी मोबाइल अनुप्रयोगों के माध्यम से भी सहायता देते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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