Education for Bharat:अब वेदों और आधुनिक तकनीक के संगम से बनेगा 'नया भारत', एआई से डरें नहीं- एम. जगदीश कुमार
Amar Ujala Education for Bharat: एजुकेशन फॉर भारत के छठे पैनल में यूजीसी के पूर्व चेयरमैन ने एनईपी कार्यान्वयन: क्या काम कर रहा है, आगे क्या है? पर चर्चा की। चलिए जानतें है पैनल की मुख्य बातें...
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हमें मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से हटकर अपने देश की संस्कृति आधारित शिक्षा व्यवस्था की जरूरत थी, इसलिए नई शिक्षा नीति (एनईपी) महत्वपूर्ण है। यह बात पूर्व यूजीसी चेयरमैन और वरिष्ठ शिक्षाविद एम. जगदीश कुमार ने शुक्रवार को 'अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025' कॉन्क्लेव में कही।
'एनईपी इम्प्लीमेंटेशन: वॉट्स वर्किंग, वॉट्स नेक्स्ट' विषय पर अपने की-नोट संबोधन में श्री कुमार ने भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर दिया। स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि विवेकानंद जी ने कहा है कि शिक्षा का लक्ष्य खुद को ढूंढना होना चाहिए। 1800 के दौर में भारत में ऐसे कई स्कूल थे जो लिखना-पढ़ना और दूसरे स्किल सिखाते थे। हमें आज के दौर में भी ऐसे ही स्कूलों की जरूरत है।
वेद और आधुनिकता का संगम
कुमार ने कहा कि हमें वेद और उपनिषद को आधार बनाकर शिक्षा को बेहतर बनाना चाहिए। शिक्षा इस रूप में डिजाइन हो जो हमारी संस्कृति से जुड़ी रहे, साथ ही आधुनिक बदलावों को भी अपनाकर नई दुनिया में हमें आगे ले जाए।
अब हम और इंतजार नहीं कर सकते
देश के युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश में अपार प्रतिभा है, हमें बस उन्हें राह दिखाने और सही संसाधन मुहैया कराने की जरूरत है। हमें ऐसी शिक्षा नीति चाहिए जो युवाओं को तकनीक की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। जॉब के मौके बेहतर बनाने के लिए पढ़ाई को स्किल से जोड़ना जरूरी है। ऐसा करने में हमारी शिक्षा लंबे समय से असफल रही है। अब हम इंतजार नहीं कर सकते। हमें हमारी शिक्षा व्यवस्था बिना समय गंवाए बदलनी होगी।
एआई आज का सच है, इससे घबराएं नहीं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए पूर्व यूजीसी चेयरमैन ने शिक्षकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि एआई आज का सच है। यह शिक्षा की दुनिया में टीचर्स पर सबसे अधिक असर डालेगा। हमें इस चिंता को दूर करने की जरूरत है। हर दौर में जब कोई नई तकनीक आती है तो उसके मानव संसाधन पर असर डालने की आशंका रहती है। प्रिंटिंग प्रेस और कंप्यूटर तकनीक के ईजाद के समय भी यही हुआ था। धीरे-धीरे यह चिंता दूर हो जाएगी और हम इसे अपना लेंगे।
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