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Education for Bharat: तकनीक को केवल मनोरंजन न मानें, इसे 'छात्र-हितैषी' और हर भाषा में सुलभ बनाना जरूरी

Sat, 06 Dec 2025 01:04 PM IST
जागृति न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: जागृति Updated Sat, 06 Dec 2025 01:04 PM IST
सार

Amar Ujala Education for Bharat: अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत की शुरुआत हो चुकी है। पहले पैनल में Uolo सीईओ पल्लव पांडे, डीपीएस मथुरा रोड प्रिसिंपल डॉ. राम सिंह, रयान इंटरनेशनल की प्रिसिंपल सुधा सिंह ने अपनी बात रखी।
 

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Education for Bharat Experts spoke  Bharat-first edtech model will bridge digital divide
सुधा सिंह, प्रिंसिपल, रेयान इंटरनेशनल - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025 कॉन्क्लेव के पहले सत्र में शनिवार को  'डिजिटल गैप' और 'एडटेक मॉडल' पर गंभीर मंथन हुआ। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित चर्चा में शिक्षाविदों ने माना कि भारत में डिजिटल शिक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 'भारत-फर्स्ट' मॉडल अपनाना अनिवार्य है। 

 
Education for Bharat Experts spoke  Bharat-first edtech model will bridge digital divide
अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत पैनल के पहले सत्र में बोले विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला
चर्चा में रयान इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल सुश्री सुधा सिंह ने भारत की प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "शिक्षा के क्षेत्र में हम निरंतर प्रयास करते रहेंगे। देश में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं और तकनीक के साथ हम काफी आगे बढ़ चुके हैं। यद्यपि अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है, लेकिन हमने उपलब्धियां भी कम नहीं पाई हैं।"

शिक्षा और तकनीक दोनों में आगे बढ़ रहा भारत : सुधा सिंह
सुधा सिंह ने कहा कि भारत शिक्षा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका लाभ तभी सार्थक है जब यह गांव और सेमी-अर्बन इलाकों के स्कूलों तक पहुंचे। अगर तकनीक दूर-दराज के बच्चों तक नहीं पहुंचेगी तो देश साथ नहीं बढ़ सकेगा। उन्होंने बताया कि शहरों में बच्चे ब्लॉग बना रहे हैं, शिक्षक डिजिटल टूल्स से पढ़ा रहे हैं, लेकिन इसे पूरे देश में फैलाने के लिए शिक्षकों को लगातार ट्रेनिंग और तकनीकी मजबूती की जरूरत है। उन्होंने एडटेक में सोशल-इमोशनल लर्निंग और ह्यूमन डेप्थ जैसे पहलुओं को शामिल करने पर जोर दिया और कहा कि टेक कंपनियों को इस दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए।
Education for Bharat Experts spoke  Bharat-first edtech model will bridge digital divide
अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत में बोले विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, डीपीएस मथुरा रोड के प्रिंसिपल डॉ. राम सिंह ने तकनीक के सही इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा, "तकनीक के साथ 'देश प्रथम' की भावना होनी चाहिए। इसे केवल मनोरंजन न मानें, बल्कि छात्र-हितैषी बनाने की जरूरत है।"
डॉ. सिंह ने आगे कहा, "तकनीक एकमात्र समाधान है जिससे हम बहुत ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। जहां चुनौतियां हैं, वहां अगर हम तकनीक पहुंचा सकें तो टीचिंग और लर्निंग बहुत प्रभावी होगी। यह हर भाषा में और हर बच्चे के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए पब्लिक और प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की जरूरत है और हमें इसके लिए 'रेडिनेस' का माहौल बनाना होगा।"

शहरों के हिसाब से तय हो एडटेक सेवाओं की कीमत: पांडेय
पल्लव पांडेय ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में तकनीकी शिक्षा की जरूरत और परिभाषा हर शहर में अलग होती है। इसलिए टीयर-1, टीयर-2 और टीयर 3 शहरों के हिसाब से एडटेक सेवाओं की कीमत तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में 27 फीसदी बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, जिनकी फीस पहले से ही अधिक होती है। कई परिवार अन्य खर्चे घटाकर बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं, ऐसे में महंगे एडटेक पैकेज उनके लिए बोझ बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल ही बच्चों की सबसे बड़ी सीखने की जगह हैं, इसलिए प्रोग्रामिंग जैसी तकनीकी शिक्षा को भी स्कूलों में मजबूत किया जाना चाहिए। हम कितना सिखा रहे हैं नहीं, बच्चा कितना सीख पा रहा है, स्कूलों को इस पर ध्यान देना होगा।
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