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Economic Survey: इसलिए घट जाएगी भारतीय युवाओं की रोजगार पाने की क्षमता, सर्वेक्षण में चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 29 Jan 2026 08:17 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 29 Jan 2026 08:17 PM IST
सार

Economic Survey 2026: आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने डिजिटल लत पर चिंता जताई है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और गेमिंग का अत्यधिक उपयोग युवाओं की मानसिक सेहत, उत्पादकता और भविष्य को नुकसान पहुंचा सकता है। संतुलित डिजिटल आदतें अब जरूरी हैं।
 

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Economic Survey 2026 Warns: Rising Digital Addiction Threatens Youth Mental Health and Productivity in India
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Economic Survey 2025-26: आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने डिजिटल लत (डिजिटल एडिक्शन) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। सर्वे के मुताबिक, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अब भारत के युवाओं की मानसिक सेहत और कामकाजी उत्पादकता पर नकारात्मक असर डालने लगा है।

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बीते एक दशक में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में बहुत तेज प्रगति की है। सस्ते इंटरनेट डेटा, स्मार्टफोन की आसान उपलब्धता और 5G तकनीक के विस्तार ने इस बदलाव को रफ्तार दी है।

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देश के 85 प्रतिशत से ज्यादा घरों में स्मार्टफोन

साल 2014 में जहां देश में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या करीब 25.15 करोड़ थी, वहीं 2024 तक यह बढ़कर लगभग 96.96 करोड़ हो गई। आज डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की कुल आय में 11.74 प्रतिशत का योगदान दे रही है।

 
संकेतक स्थिति
इंटरनेट कनेक्शन (2014) 25.15 करोड़
इंटरनेट कनेक्शन (2024) 96.96 करोड़
डिजिटल अर्थव्यवस्था का योगदान 11.74%
FY25 अनुमानित योगदान 13% से अधिक
स्मार्टफोन वाले घर 85% से ज्यादा
 


वर्तमान स्थिति यह है कि भारत के 85 प्रतिशत से ज्यादा घरों में कम से कम एक स्मार्टफोन मौजूद है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं का उपयोग बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

साल 2025 की शुरुआत में ईवाई (EY) की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में भारतीयों ने कुल मिलाकर 1.1 लाख करोड़ घंटे अपने स्मार्टफोन स्क्रीन को देखते हुए बिताए।

अब चिंता का विषय सिर्फ तकनीक की पहुंच नहीं, बल्कि यह है कि लोग इसका इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं और इसका उनकी मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण में डिजिटल लत को ऐसी व्यवहारिक स्थिति बताया गया है, जिसमें कोई व्यक्ति डिजिटल उपकरणों या ऑनलाइन गतिविधियों से अत्यधिक या मजबूरी में जुड़ा रहता है, जिससे उसे मानसिक परेशानी होती है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। सर्वे के अनुसार, लगातार और जरूरत से ज्यादा इंटरनेट या कंप्यूटर का उपयोग मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा करता है।

लंबे समय में यह स्थिति लोगों की रोजगार पाने की क्षमता को कम कर सकती है, जीवनभर की कमाई घटा सकती है और इलाज पर होने वाले खर्च को बढ़ा सकती है।

सोशल मीडिया से गेमिंग तक: अलग-अलग प्लेटफॉर्म, अलग-अलग खतरे

सर्वे में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया की लत का सीधा संबंध चिंता, अवसाद, कम आत्मविश्वास और साइबर बुलिंग के तनाव से है। खासतौर पर 15 से 24 वर्ष की उम्र के युवाओं में इसके मामले ज्यादा पाए गए हैं।

वहीं, गेमिंग डिसऑर्डर से नींद में खलल, चिड़चिड़ापन, सामाजिक दूरी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं जुड़ी हुई हैं। ऑनलाइन जुआ और रियल-मनी गेमिंग के कारण आर्थिक तनाव, चिंता, अवसाद और आत्महत्या के विचार तक सामने आए हैं।

इसके अलावा, लगातार वेब सीरीज देखने (बिंज-वॉचिंग) और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म का अत्यधिक उपयोग भी खराब नींद, ध्यान की कमी और बढ़े हुए तनाव से जुड़ा पाया गया है।

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डाटा की कमी बड़ी चुनौती

भविष्य की चुनौतियों की बात करें तो सर्वे एक बड़ी कमी की ओर इशारा करता है कि देशभर में डिजिटल लत से जुड़ा ठोस और व्यापक डेटा उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर जानकारी की कमी के कारण सही और प्रभावी कदम उठाने में दिक्कत आती है। हालांकि, आने वाला दूसरा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण इस दिशा में उपयोगी और व्यवहारिक जानकारी देने की उम्मीद जगाता है।

दुनिया इस समस्या से निपटने के लिए क्या कर रही है?

दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, चीन, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन ने इस समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाए हैं। इनमें उम्र के आधार पर सोशल मीडिया पर पाबंदी, गेम खेलने की समय-सीमा तय करना, कक्षाओं में स्मार्टफोन पर रोक और डिजिटल मजबूती से जुड़े ढांचे शामिल हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण का समाधान पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का नहीं है, बल्कि संतुलन बनाने का है। इसमें स्कूलों में डिजिटल वेलनेस की शिक्षा देने, घर और दफ्तर में कुछ समय के लिए डिवाइस-फ्री माहौल बनाने, माता-पिता को जागरूक करने, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उम्र के अनुसार सुरक्षा उपाय लागू करने और काउंसलिंग सुविधाओं को बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

सर्वे के शब्दों में, डिजिटल तकनीक से बचना अब संभव नहीं है, लेकिन मानसिक सेहत और लंबी अवधि की उत्पादकता के लिए स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।

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