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Hindi News ›   Delhi ›   DU allows four-year UG students to pursue PhD directly; AC members flag concerns

DU: डीयू में सीधे पीएचडी का नया रास्ता, चार-वर्षीय यूजी के बाद प्रवेश की अनुमति, AC के सदस्यों ने जताई चिंता

Sat, 25 Jul 2026 10:25 AM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Sat, 25 Jul 2026 10:25 AM IST
सार

DU PhD Admission: दिल्ली विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल के कुछ सदस्यों ने चिंता जताई है और इसके शैक्षणिक प्रभावों पर चर्चा की मांग की है।

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DU allows four-year UG students to pursue PhD directly; AC members flag concerns
दिल्ली विश्वविद्यालय, Delhi University - फोटो : University Of Delhi

विस्तार

DU: दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र अब सीधे PhD करने के लिए योग्य होंगे। शुक्रवार को एकेडमिक काउंसिल ने इसके लिए संशोधित नियमों को मंजूरी दी।

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यह फ़ैसला एकेडमिक काउंसिल (AC) की बैठक में मंज़ूर किए गए कई उपायों में से एक था। बैठक में 'स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग' (SOL) का नाम बदलकर 'सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन' (CDOE) करने, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के नाम पर स्कॉलरशिप शुरू करने और नए एकेडमिक प्रोग्राम शुरू करने को भी मंजूरी दी गई।
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PhD नियमों में संशोधन को 'रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल' (RIEC) की सिफारिशों पर विचार करने के बाद मंज़ूरी दी गई। संशोधित नियमों के तहत, चार साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी करने वाले छात्र डॉक्टरेट प्रोग्राम में दाखिले के लिए योग्य होंगे; काउंसिल ने इसके लिए जरूरी प्रावधानों को भी मंजूरी दे दी है।

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आरक्षण और फेलोशिप को लेकर उठी चिंता

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल (AC) के कुछ सदस्यों ने नए PhD नियमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि चार वर्षीय UG डिग्री के बाद सीधे PhD में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए आरक्षण के नियम स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इन छात्रों को मास्टर्स और एमफिल डिग्री धारकों के साथ एक ही श्रेणी में रखा गया है, जिससे आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


सदस्यों ने विश्वविद्यालय की नॉन-JRF फेलोशिप नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, प्रति विभाग केवल 16+1 छात्रों को फेलोशिप देने की सीमा तय कर दी गई है, जबकि अन्य पूर्णकालिक शोधार्थियों के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सीधे PhD में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए आरक्षण नियमों को साफ किया जाए और सभी नॉन-JRF शोधार्थियों को शोध कार्य के लिए पर्याप्त सहायता दी जाए।
 

SOL का नाम बदलने और नई छात्रवृत्ति को मंजूरी

एकेडमिक काउंसिल (AC) ने स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का नाम बदलकर सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (CDOE) करने को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव यूजीसी के 2022 के नियमों के अनुरूप किया जा रहा है। इसके साथ ही संस्थान के प्रमुख का पद भी प्रिंसिपल से बदलकर डायरेक्टर कर दिया जाएगा।

काउंसिल ने खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्वर्गीय अरुण जेटली छात्रवृत्ति शुरू करने को भी मंजूरी दी। 10 लाख रुपये के फंड से अगले 20 वर्षों तक हर साल तीन छात्रवृत्तियां दी जाएंगी, जिनकी कुल राशि 50,000 रुपये होगी। इनमें से कम से कम एक छात्रवृत्ति महिला छात्र के लिए आरक्षित रहेगी। इसके अलावा, 2026-27 सत्र से संस्कृत बौद्ध धर्म में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स तथा मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) कार्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी दी गई है।

नए स्किल कोर्स और रैंकिंग में सुधार पर चर्चा

एकेडमिक काउंसिल ने UGCF 2022 के तहत पांच नए स्किल एनहांसमेंट कोर्स शुरू करने को मंजूरी दी है। इनमें एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट, डिजाइन थिंकिंग, वेंचर डेवलपमेंट, एंटरप्रेन्योरियल कम्युनिकेशन एंड इन्वेस्टर पिचिंग तथा लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन लिटरेसी स्किल्स जैसे कोर्स शामिल हैं। इन कोर्सों का उद्देश्य छात्रों में उद्यमिता, नवाचार और व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देना है।

बैठक में सदस्यों ने कुलपति योगेश सिंह को दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त होने पर बधाई दी। इस दौरान कुलपति ने बताया कि QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दिल्ली विश्वविद्यालय ने बड़ी छलांग लगाई है। विश्वविद्यालय 2022 में 521-530 रैंक बैंड से आगे बढ़कर 2027 में 322वें स्थान पर पहुंच गया है, जिससे यह रैंकिंग में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया है।

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