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दिल्ली हाईकोर्ट: सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में 5-वर्षीय लॉ डिग्री के लिए CUET अनिवार्य है या नहीं, बताए यूजीसी

Wed, 13 Sep 2023 07:16 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सौरभ पांडेय Updated Wed, 13 Sep 2023 07:16 PM IST
सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूजीसी से एक हलफनामा दायर करने को कहा है जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि क्या केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5-वर्षीय कानून डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य है।

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Delhi High Court on UGC CUET mandatory for admission to 5-year law degree courses in central universities
Delhi high court - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूजीसी से एक हलफनामा दायर करने को कहा है जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि क्या केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5-वर्षीय कानून डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य है, क्योंकि इसके दो शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय प्रकट की थी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ का आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के उस फैसले के खिलाफ याचिका पर आया, जिसमें छात्रों को सीयूईटी के बजाय केवल CLAT-UG 2023 के आधार पर पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया गया था।

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अदालत ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि एक तरफ, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के संयुक्त सचिव द्वारा जारी पत्र में "स्पष्ट रूप से बताया गया कि कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी स्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी अनिवार्य था। याचिका के जवाब में यूजीसी के अवर सचिव द्वारा दायर एक हलफनामे में कहा गया है कि डीयू CLAT के माध्यम से 5 साल के कानून पाठ्यक्रम में छात्रों को प्रवेश दे सकता है।

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पीठ ने 12 सितंबर के आदेश में न्यायमूर्ति संजीव नरूला को भी शामिल किया, जिसमें कहा गया "यूजीसी के अध्यक्ष को एक हलफनामा दाखिल करने दें, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि प्रवेश देने के मामले में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अंडर-ग्रेजुएट पांच वर्षीय लॉ डिग्री कोर्स के लिए सीयूईटी अनिवार्य है या नहीं। इसे तीन दिनों के भीतर सकारात्मक रूप से किया जाना चाहिए।" 

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अदालत ने डीयू को यह बताने का भी निर्देश दिया कि क्या एकीकृत कानून पाठ्यक्रम में प्रवेश केवल इस वर्ष CLAT के आधार पर किया जाएगा या क्या बाद के वर्षों में भी यही पैटर्न अपनाया जाएगा। अदालत ने कहा "भले ही, वर्तमान मंजूरी केवल एक वर्ष के लिए है, विश्वविद्यालय को ऐसी मंजूरी के मामले में अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए पांच वर्षीय लॉ डिग्री कोर्स में प्रवेश के लिए परीक्षा के तरीके यानी सीयूईटी या सीएलएटी पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

अदालत ने मामले को 18 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से मामले में सहायता करने का अनुरोध किया। अपने हलफनामे में, उच्च शिक्षा संस्थानों के वित्त पोषण और मानकों के रखरखाव के लिए काम करने वाली शीर्ष संस्था यूजीसी ने अदालत को बताया है कि 5-वर्षीय कानून पाठ्यक्रम एक पेशेवर डिग्री कार्यक्रम है जिसमें प्रवेश के लिए छात्रों का चयन करने के लिए अलग-अलग मानदंडों की आवश्यकता हो सकती है।

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