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...तो साल में दो बार होगी बोर्ड परीक्षा, 10वीं-12वीं की तरह इन कक्षाओं में भी बोर्ड एग्जाम 

Wed, 17 Jul 2019 01:24 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Wed, 17 Jul 2019 01:24 PM IST
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Board Exams can be held twice a year, Also for class 3, 5 and 8th students, NEP recommends
Board Exam

स्कूलों में स्टूडेंट्स को तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा के लिए भी बोर्ड परीक्षा देनी पड़ सकती है। यह प्रवाधान नई शिक्षा नीति में प्रस्तावित है। अगर यह नई शिक्षा नीति लागू होती है, तो कक्षा 3, 5 और 8 में भी बच्चों को 10वीं और 12वीं बोर्ड की तरह ही परीक्षा देनी होगी। इस प्रस्तावित नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षा के वर्तमान प्रारूप के नकारात्मक प्रभावों के बारे में भी बताया गया है। आईए जानते हैं कि अभी बोर्ड परीक्षाओं का जो प्रारूप है, उसका बच्चों पर किस तरह बुरा प्रभाव पड़ रहा है...

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  • इस शिक्षा नीति में कहा गया है कि पूरी स्कूली शिक्षा के दौरान सिर्फ दो बार 10वीं और 12वीं में बोर्ड परीक्षा आयोजित करने से बच्चों पर काफी ज्यादा दबाव होता है।
     
  • स्कूली शिक्षा के सिर्फ अहम पड़ावों पर बोर्ड परीक्षा होने से ही कोचिंग की संस्कृति भी बेहद तेजी से बढ़ी है। क्योंकि बच्चे शुरुआती स्तर पर बोर्ड परीक्षा का तनाव महसूस नहीं करते हैं, उन्हें इस अहम पड़ाव पर बेहतर प्रदर्शन का भी दबाव रहता है। इस चक्कर में वे स्कूल और सेल्फ स्टडी से ज्यादा इन कुछ दिनों में कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं।
     
  • इन दो परीक्षाओं के दौरान बच्चों के जीवन में पढ़ाई के अलावा अन्य सभी जरूरी चीजें पीछे छूट जाती हैं।
     
  • बच्चों में विषयों को अच्छी तरह समझने, उस पर सोचने, विश्लेषण करने और सीखने की ललक पीछे रह जाती है। इसकी जगह उनमें ज्यादा से ज्यादा अंक लाने के दबाव में रटने, कोचिंग करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने लगता है।
     
  • बच्चों का पूरा फोकस सिर्फ कुछ महत्वपूर्ण विषयों और अंकों पर ही टिक जाता है। इससे उनका सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता।
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...तो क्या आसान हो जाएगी बोर्ड परीक्षा

  • प्रस्तावित नई शिक्षा नीति कहती है कि बोर्ड परीक्षाओं को आसान बनाया जाना चाहिए। इसमें इस तरह के बदलाव हों जिससे उनके रटने की नहीं, बल्कि सीखने की असल क्षमता की पहचान की जा सके।

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  • पाठ्यक्रम और बोर्ड परीक्षाओं को इस तरह डिजाइन किया जाए कि कोई भी स्टूडेंट जो स्कूल में लगतार क्लास अटेंड कर रहा है और विषयों के आधार को समझ रहा है, वह आसानी से बोर्ड परीक्षा में सफल हो सके।
     
  • इतना ही नहीं, इस शिक्षा नीति में साल में दो बार बोर्ड परीक्षा करवाने का भी प्रस्ताव है।

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  • इसके अलावा ये भी कहा गया है कि कंप्यूटराइज्ड लर्निंग एक बार सही मानकों पर आ जाए, तो असेसमेंट की सभी प्रक्रियाओं को कंप्यूटर मोड पर ही शिफ्ट किया जाना चाहिए। 
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