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Hindi News ›   Education ›   NEP proposes changes in teacher recruitment process, adds classroom demo and interview after TET

शिक्षक बनने के लिए देना पड़ सकता है क्लासरूम डेमो, जानें और क्या होंगे बदलाव

Mon, 15 Jul 2019 03:05 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Mon, 15 Jul 2019 03:05 PM IST
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NEP proposes changes in teacher recruitment process, adds classroom demo and interview after TET
नई शिक्षा नीति में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के लिए क्या है प्रस्ताव - फोटो : अमर उजाला

साल 2017 में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट आई थी। इसमें बताया गया था कि भारत में कक्षा 5वीं के करीब आधे बच्चे कक्षा 2 की किताबें भी नहीं पढ़ पाते। इसमें यह भी कहा गया था कि हमारे शिक्षकों में जरूरी कौशल और प्रोत्साहन की भी कमी है। इसके बाद नीति आयोग की रिपोर्ट आई जिसमें शिक्षकों की शिक्षा और प्रशिक्षण का प्रस्ताव दिया गया। अब प्रस्तावित नई शिक्षा नीति में भी इस ओर ध्यान दिया गया है। आईए जानते हैं कि नई शिक्षा नीति में स्कूल शिक्षकों के लिए किन प्रावधानों का प्रस्ताव रखा गया है...

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शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार

नई शिक्षा नीति के अनुसार, हमारे देश में ऐसे शिक्षकों की कमी है जो पढ़ाने के सही तरीके जानते हों। वर्तमान में जो भर्ती प्रक्रिया है, उसमें शिक्षण के व्यवहारिक पहलू को शामिल ही नहीं किया गया है, जबकि यह जरूरी है। अभी शिक्षकों के लिए केंद्रीय या राज्यों के स्तर पर जो पात्रता परीक्षाएं ली जा रही हैं, उनके जरिये शिक्षण क्षमता को सही तरीके से परखा नहीं जा सकता।

  • इसलिए नई शिक्षा नीति में शिक्षक पात्रता परीक्षा के पैटर्न और टेस्ट मैटीरियल को मजबूत करने का प्रस्ताव है।
  • इतना ही नहीं, सब्जेक्ट टीचर्स को संबंधित विषय में उचित एनटीए स्कोर भी हासिल करना होगा। भर्ती के दौरान इस स्कोर को भी आधार बनाया जाएगा।
  • अगर शिक्षा नीति के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया के तहत स्कूल के क्लासरूम में डेमोंस्ट्रेशन या इंटरव्यू भी देना होगा।
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शिक्षकों की संख्या में ऐसे होगा सुधार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात ठीक करने के लिए करीब 10 लाख शिक्षकों की जरूरत है। शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां कई स्कूल तो सिर्फ एक शिक्षक की बदौलत चल रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए भी नई शिक्षा नीति में प्रस्ताव किया गया है। इसके अनुसार, आर्ट्स, फिजिकल एजुकेशन, वोकेशनल एजुकेशन और भाषाओं के लिए शिक्षकों की नियुक्ति एक स्कूल में करने के बजाय एक स्कूल कॉम्प्लेक्स में की जानी चाहिए।

स्कूल कॉम्प्लेक्स का मतलब किसी क्षेत्र में एक सेकेंडरी और कई प्री प्राइमरी स्कूलों से है। यानी किसी विषय से संबंधित शिक्षक कॉम्प्लेक्स के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों में वह विषय पढ़ाने जाएंगे।

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स्थानीय समुदाय के शिक्षक होंगे शामिल

किसी क्षेत्र में वहां के स्थानीय समुदाय के एक शिक्षक का होना भी जरूरी है। नई शिक्षा नीति इस बात पर भी जोर देती है कि स्कूल में एक ऐसा शिक्षक होना चाहिए, जिससे वहां के विद्यार्थी अपनी मातृ भाषा में खुल कर बात कर सकें। इसकी जरूरत दूरस्थ, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा है।

इसके लिए पारंपरिक स्थानीय कला, कृषि, आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे विभिन्न विषयों के स्थानीय विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा सकती है। 

इन सब के अलावा नई शिक्षा नीति में शिक्षकों समय-समय पर शिक्षकों के तबादले और उन्हें गैर शैक्षिक कार्यों से मुक्त रखने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

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