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Delhi CM: दिल्ली सरकार ने पेश किया स्कूल फीस वृद्धि विधेयक, शिक्षा को व्यावसायिक उद्यम मानने पर रोक

Fri, 08 Aug 2025 04:31 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Fri, 08 Aug 2025 04:31 PM IST
सार

Delhi CM Rekha Gupta: दिल्ली सरकार ने स्कूल फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए नया विधेयक पेश किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य शिक्षा को व्यावसायिक उद्यम बनने से रोकना और इसे सभी के लिए सुलभ बनाना है।

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Bill on school fee hikes underlines education not a commercial enterprise: Delhi CM
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता - फोटो : x/@gupta_rekha

विस्तार

Delhi CM: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली सरकार ने जो विधेयक लाया है, उसका मुख्य मकसद यह बताना है कि शिक्षा किसी भी तरह का व्यापार नहीं है। इस विधेयक के जरिए निजी स्कूलों की फीस बढ़ाने पर लगाम लगाई जाएगी ताकि शिक्षा सभी के लिए सस्ती और उपलब्ध रहे।

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शिक्षा मंत्री ने पेश किया स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक

गुप्ता ने संवाददाताओं से कहा, "यह पहली बार है कि कोई सरकार दिल्ली में स्कूली बच्चों के अभिभावकों के साथ खुलकर खड़ी है। आप अब बगलें झांक रही है क्योंकि भाजपा सरकार ने वह कर दिखाया जो वह दिल्ली में सत्ता में रहते हुए नहीं कर सकी।"

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दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने चल रहे मानसून सत्र के पहले दिन 'दिल्ली स्कूल शिक्षा पारदर्शिता, शुल्क निर्धारण एवं विनियमन विधेयक, 2025' पेश किया।
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इस विधेयक पर आज दिन में विधानसभा में चर्चा और पारित होने का कार्यक्रम है। सदन के सदस्यों को इसके प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित करने की भी अनुमति दी गई।

स्कूल फीस बढ़ोतरी विधेयक पर विपक्ष ने जताई आपत्ति

यह विधेयक दिल्ली के सभी निजी, मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस को इस उद्देश्य के लिए गठित समितियों के माध्यम से मूल्यांकन और अनुमोदन की त्रि-स्तरीय प्रणाली के माध्यम से विनियमित करने का प्रयास करता है, जिसमें उल्लंघन के मामले में कठोर दंड का प्रावधान है।

गुरुवार को, सूद ने कहा कि दिल्ली के सभी निजी और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को, चाहे वे कहीं भी स्थित हों, अब से अपनी फीस बढ़ाने से पहले सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि अब तक, केवल सरकारी आवंटित भूमि पर बने लगभग 350 स्कूलों को ही अपनी फीस बढ़ाने से पहले अनुमति लेनी होती थी।

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने विधेयक की आलोचना करते हुए कहा कि यह 350 से अधिक निजी स्कूलों को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के उन फैसलों से बचाने के लिए बनाया गया है, जो पहले उनकी फीस संरचनाओं की कड़ी निगरानी करते थे।



भारद्वाज ने दावा किया कि मौजूदा कानूनों और अदालती निर्देशों के तहत, इन स्कूलों को पहले से ही फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा निदेशक से अनुमति लेना आवश्यक था।

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