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Bihar Flood: बिहार का शोक कहलाती है कोसी नदी? जानिए क्या है इसके पीछे की वजह और इसमें इतनी बाढ़ क्यों आती है

Tue, 01 Oct 2024 05:24 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 01 Oct 2024 05:24 PM IST
सार

Bihar Flood: कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। इसमें हर साल बाढ़ आती है। हर साल बरसात के मौसम में बिहार भी चर्चा में आ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बिहार में इतनी ज्यादा बाढ़ आती क्यों है? क्या ये सिर्फ बारिश के कारण होता है? कोसी नदी क्यों बिहार का शोक कही जाती है?
 

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Bihar Flood 2024: Why is the Koshi river called the grief of Bihar, what are the reasons it floods so often?
बिहार में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

Bihar Flood: नेपाल में बीते दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश की वजह से से वहां के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है। भारी बारिश के दौरान कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। इसका दुष्प्रभाव भारत के बिहार में भी देखने को मिल रहा है। भारी बारिश के कारण बिहार की कोसी नदी में बाढ़ (Flood Situation Near Koshi River) जैसे हालात बने हुए हैं। बिहार में कोसी, गंडक, बागमती नदी कहर बरपा रही है। बिहार की कोसी नदी को 'बिहार का शोक' नाम से भी जाना जाता है। अक्सर इससे जुड़े सवाल प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछ लिए जाते हैं।

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हर साल बरसात के मौसम में बिहार भी चर्चा में आ जाता है। इस सीजन में कोसी समेत विभिन्न नदियां उफान पर आ जाती हैं, जिससे बिहार के कई जिलों में बाढ़ का संकट बढ़ जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि बिहार में इतनी ज्यादा बाढ़ आती क्यों है? क्या ये सिर्फ बारिश के कारण होता है? कोसी नदी क्यों बिहार का शोक कही जाती है? बिहार की बाढ़ का कनेक्शन हर बार नेपाल से क्यों जुड़ता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब।

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बिहार में क्या है बाढ़ का हाल?

बिहार आपदा विभाग के मुताबिक, बिहार भारत का सर्वाधिक बाढ़ ग्रस्त राज्य है। यहां कुल आबादी के 76 प्रतिशत लोग बाढ़-आवर्ति क्षेत्र में रहते है। बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 73% यानी लगभग 68800 वर्ग किमी क्षेत्र बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आता है। बिहार में बाढ़ की समस्या आज से नहीं बल्कि ऐतिहासिक है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1953 में तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने कोसी परियोजना का शिलान्यास किया था और कहा था कि अगले 15 साल में बिहार में बाढ़ पर नियंत्रण पा लिया जाएगा। हालांकि, आज भी बिहार में बाढ़ की स्थिति वही है।

बाढ़ का नेपाल कनेक्शन और कोसी नदी की भूमिका

बिहार का मैदानी इलाका नेपाल से सटा हुआ है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, बागमती समेत कई नदियां नेपाल की ओर से बहकर बिहार में आती हैं। बिहार का पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया व किशनगंज जिला नेपाल से सटा है। जब भी नेपाल में बारिश होती है तो वहां की नदियों का पानी बिहार में आने लगता है।

कोसी नदी या कोशी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भारत में दाखिल होती है। इसमें आने वाली बाढ से बिहार में बहुत तबाही होती है जिससे इस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। नेपाल की 7 नदियां कोसी में मिलती है जो कि बिहार में हर साल भारी बाढ़ लाकर तबाही मचाती है। इसलिए कोसी को बिहार का शोक भी कहते हैं।

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बड़े बांध का न होना बाढ़ की बड़ी वजह

बिहार सरकार के मंत्रियों समेत कई जानकारों का मानना है कि नेपाल में जब तक कोसी नदी पर हाई डैम नहीं बनता तब तक बिहार में बाढ़ की समस्या जारी रहेगी। भारत और नेपाल के बीच इसे लेकर कई दौर की बातचीत हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। कोसी नदी पर हाई डैम को लेकर नेपाल के लोग विरोध में हैं। उनका मानना है कि कोसी पर हाई डैम बनने से पर्यावरण पर बुरा असर होगा और साथ ही नेपाल का बहुत बड़ा भू-भाग डूब जाएगा। 

फरक्का बराज भी बाढ़ की वजह

बिहार में बाढ़ आने के कारणों में एक कारण फरक्का बराज भी है। गंगा व अन्य सहायक नदियां अपने साथ गाद (सिल्ट) बहाकर लाती हैं, जिससे नदी का जलप्रवाह बाधित होता है। पहले गाद पानी के साथ बह जाती थी लेकिन अब तटबंधों और बराज के कारण ये बह नहीं पाती हैं। इस कारण ये नदी को उथला बना देती हैं जिससे नदियों का पानी बाढ़ का कारण बनता है। 

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