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Hindi News ›   Education ›   Bible Controversy Bengaluru Archbishop Peter Machado said that no student of other religion has become Christian in our school

Bible Controversy: आर्क बिशप ने किया आरोपों का खंडन, बोले- हमारे स्कूल में अन्य धर्म का कोई छात्र ईसाई नहीं बना

Thu, 28 Apr 2022 07:17 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Thu, 28 Apr 2022 07:17 PM IST
सार

दरअसल बीते दिनों बेंगलुरु के क्लेरेंस हाईस्कूल में छात्रों के लिए बाइबल अनिवार्य करने का कथित मामला सामने आया था। हिंदू जनजागृति समिति ने आरोप लगाया था कि हाईस्कूल ने छात्रों के अभिवावकों को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा है।

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Bible Controversy Bengaluru Archbishop Peter Machado said that no student of other religion has become Christian in our school
Bengaluru Archbishop Peter Machado - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद अब बाइबल को लेकर विवाद जारी हो गया है। हाल ही में बेंगलुरु में स्थित एक सदी से भी पुराने क्लेरेंस हाईस्कूल में कथित तौर पर सभी छात्रों के लिए बाइबल को अनिवार्य करने को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश जारी किए थे। अब इस मामले पर बेंगलुरु के आर्क बिशॉप का भी बयान सामने आया है। 

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क्या कहा आर्क बिशॉप ने?
बेंगलुरु के आर्क बिशॉप पीटर मैकेडो ने कहा कि शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं कि उनके (ईसाई) स्कूलों में बाइबिल का इस्तेमाल होता है या धर्म पढ़ाया जाता है। इस बात का उन्हें बहुत दुख हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम बहादुरी से कह सकते हैं कि हमारे स्कूल में दूसरे धर्म का कोई भी छात्र ईसाई नहीं बना है। 

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गैर-ईसाई छात्रों को बाइबल पढ़ने की आवश्यकता नहीं
बेंगलुरु के आर्क बिशॉप पीटर मैकेडो ने आगे कहा कि गैर-ईसाई छात्रों को स्कूलों में बाइबल पढ़ने की आवश्यकता नहीं है और न ही उनके लिए कोई बाइबल का निर्देश है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि राज्य में श्रीमद्भागवत गीता को अगले साल नैतिक शिक्षा पाठ के रूप में पेश किया जाएगा, जबकि बाइबिल और कुरान को धार्मिक ग्रंथ माना जाता है, इसलिए उन्हें अनुमति नहीं दी जाएगी।
 
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल बीते दिनों बेंगलुरु के क्लेरेंस हाईस्कूल में छात्रों के लिए बाइबल अनिवार्य करने का कथित मामला सामने आया था। हिंदू जनजागृति समिति ने आरोप लगाया था कि हाईस्कूल ने छात्रों के अभिवावकों को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा है। इसमें अभिवावकों को स्वीकार करना है कि उनके बच्चे/छात्र को बाइबल की कक्षा में भाग लेना होगा। समिति के प्रवक्ता मोहन गौड़ा ने कहा था कि यह नियम केवल किसी और धर्म का पालन करने के लिए छात्र को मजबूर करना है। यह नियम सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संविधान के अनुच्छेद 25 का खुले तौर पर उल्लंघन करता है। इसके साथ ही यह बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम का भी उल्लंघन है।

सरकार करे जांच
आर्कबिशप पीटर मैकेडो ने कर्नाटक सरकार से उन छात्रों की संख्या की जांच करने के लिए कहा, जिन्होंने पिछले 100 वर्षों में ईसाई स्कूलों में अध्ययन किया और ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए। उन्होंने कहा कि संस्था स्कूल के समय से पहले या बाद में ईसाई छात्रों के लिए बाइबिल या धार्मिक कक्षाएं संचालित करती है, और ऐसी प्रथा जिसके लिए उन्हें बाइबिल ले जाने की आवश्यकता होती है वह अतीत में मौजूद थी, वर्तमान में नहीं।
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