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JNU: जेएनयू अरावली शिखर सम्मेलन में जुटेंगे दिग्गज, 2047 की वैश्विक और भारत नीति की तैयारी पर होगी चर्चा
Sat, 04 Oct 2025 08:49 AM IST
शाहीन परवीन
अमर उजाला, ब्यूरो
अमर उजाला, ब्यूरो
Published by: शाहीन परवीन
Updated Sat, 04 Oct 2025 08:49 AM IST
सार
Aravali Summit: जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज अपने 70वें स्थापना दिवस पर अरावली शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इस सम्मेलन में विशेषज्ञ और दिग्गज जुटेंगे और मुख्य विषय होगा “भारत और विश्व व्यवस्था: 2047 की तैयारी”। कार्यक्रम छह तारीख से शुरू होगा।
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जानकारी देते एसआईएस डीन प्रो. अमिताभ मट्टू व अन्य।
- फोटो : स्रोत : आयोजक
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विस्तार
JNU:जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) के 70वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भारत और विश्व व्यवस्था: 2047 की तैयारी विषय पर अरावली शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। छह अक्तूबर से शुरू होने वाला दो दिवसीय सम्मेलन विदेश मंत्रालय और चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित होगा।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ जेएनयू के पूर्व छात्र और केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। सम्मेलन को जेएनयू कुलाधिपति कंवल सिब्बल और जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित भी संबोधित करेंगे। एसआईएस डीन प्रो. अमिताभ मट्टू ने बताया कि अरावली शिखर सम्मेलन संस्थान के 70वर्ष का एक निर्णायक क्षण है। एसआईएस लंबे समय से एक ऐसा केंद्र रहा है जहां विद्वता और नीति का मिलन होता है। यह सम्मेलन उसी भावना का प्रतीक है।
भारत के विचारकों और कार्यकर्ताओं की अगली पीढ़ी को 2047 तक एक न्यायसंगत और सुदृढ़ विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा। सम्मेलन के मौके पर एसआईएस के इतिहास को लेकर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री और स्कूल को लेकर विशेष जर्नल जारी किया जाएगा।
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सम्मेलन की सह संयोजक प्रो. मीता मेहरा और प्रो. प्रीति ने बताया कि सम्मेलन में वैश्विक व्यवस्था, भारत की आर्थिक तरक्की, प्रौद्योगिकी और नवाचार, भारत की वैश्विक उपस्थिति, एक सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में भारत, भारत किस प्रकार से वैश्विक शक्ति होगा सहित कई दूसरे विषयों पर दिग्गज अपने विचार रखेंगे।
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सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ जेएनयू के पूर्व छात्र और केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। सम्मेलन को जेएनयू कुलाधिपति कंवल सिब्बल और जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित भी संबोधित करेंगे। एसआईएस डीन प्रो. अमिताभ मट्टू ने बताया कि अरावली शिखर सम्मेलन संस्थान के 70वर्ष का एक निर्णायक क्षण है। एसआईएस लंबे समय से एक ऐसा केंद्र रहा है जहां विद्वता और नीति का मिलन होता है। यह सम्मेलन उसी भावना का प्रतीक है।
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भारत के विचारकों और कार्यकर्ताओं की अगली पीढ़ी को 2047 तक एक न्यायसंगत और सुदृढ़ विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा। सम्मेलन के मौके पर एसआईएस के इतिहास को लेकर 15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री और स्कूल को लेकर विशेष जर्नल जारी किया जाएगा।
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सम्मेलन की सह संयोजक प्रो. मीता मेहरा और प्रो. प्रीति ने बताया कि सम्मेलन में वैश्विक व्यवस्था, भारत की आर्थिक तरक्की, प्रौद्योगिकी और नवाचार, भारत की वैश्विक उपस्थिति, एक सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में भारत, भारत किस प्रकार से वैश्विक शक्ति होगा सहित कई दूसरे विषयों पर दिग्गज अपने विचार रखेंगे।
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