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Education for Bharat: 'लंदन की कॉपी' कर रहे शिक्षित लोग, गांधी जी भी थे इससे चिंतित- सुधांशु त्रिवेदी

Sat, 06 Dec 2025 05:31 PM IST
जागृति न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: जागृति Updated Sat, 06 Dec 2025 05:31 PM IST
सार

Amar Ujala Education for Bharat: एजुकेशन ऑफ भारत के सातवें पैनल में राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने एआई युग पर विस्तृत चर्चा की। इस मौके पर इन्होंने इतिहास का भी जिक्र किया। चलिए जानते हैं पैनल की मुख्य बातें विस्तार से...
 

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अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत में राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने शनिवार को 'अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत-2025' कॉन्क्लेव में पाश्चात्य शिक्षा पद्धति और औपनिवेशिक मानसिकता पर तीखा प्रहार किया। 'एआई युग में नेतृत्व, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण' विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें 1837 में थोपी गई उस सोच से बाहर निकलना होगा, जो मानती है कि केवल अंग्रेजी और पश्चिमी तौर-तरीके ही शिक्षा का पैमाना हैं।

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शिक्षित समाज में गोली से बचना सिखाया जा रहा

डॉ. त्रिवेदी ने विकसित देशों की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज दुनिया में जहां सबसे ज्यादा शिक्षा है, वहां स्कूलों में यह सिखाया जा रहा है कि गोली से कैसे बचें। क्या यही वह विकास है जिसकी हम कल्पना करते हैं? उनका इशारा पश्चिमी देशों में स्कूलों में होने वाली हिंसा की ओर था।

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लंदन की कॉपी करने वालों पर गांधी जी को थी चिंता

महात्मा गांधी के विचारों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी जी ने एक बार कहा था कि मुझे इस देश के शिक्षित लोगों को देख कर चिंता हो रही है, क्योंकि ये लोग लंदन की कॉपी कर रहे हैं। हमें अपनी जड़ों से जुड़ी शिक्षा की जरूरत है, न कि अंधानुकरण की।

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1837 की मानसिकता और भाषा का भ्रम

भारतीय शिक्षा इतिहास का जिक्र करते हुए डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि 1837 के दौर में यह बोला गया कि हमारे स्कूलों में जो भाषा हम आपको सीखा रहे हैं, उसको ही सीख कर आप शिक्षित हो सकते हैं। इस मानसिकता ने हमें अपनी संस्कृति से दूर करने का काम किया। आज एआई के दौर में हमें तकनीक के साथ-साथ अपने नैतिक मूल्यों और भारतीयता को भी पुनः स्थापित करना होगा।


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