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Hindi News ›   Education ›   After Plastic Thermocol is also banned, How school projects to be made now in UP

अब थर्मोकोल पर भी लगा प्रतिबंध, जानें क्यों सरकार को उठाना पड़ा ये कदम

Sat, 07 Sep 2019 12:42 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Sat, 07 Sep 2019 12:42 PM IST
सार

  • प्लास्टिक के बाद अब थर्मोकोल पर लगा प्रतिबंध
  • स्कूलों में थर्मोकोल से प्रोजेक्ट भी नहीं बना सकते स्टूडेंट्स

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After Plastic Thermocol is also banned, How school projects to be made now in UP
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

देश भर में प्लास्टिक पर तो प्रतिबंध लगा ही है। अब थर्मोकोल भी इसके दायरे में आने लगा है। उत्तर प्रदेश में इसकी शुरुआत हो चुकी है। यूपी सरकार ने राज्य में सभी प्लास्टिक और थर्मोकोल की चीजों पर प्रतिबंध लगाया। इसके कुछ दिनों बाद अब राज्य के बेसिक शिक्षा परिषद ने भी स्कूलों में इसके प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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इसका मतलब ये हुआ कि अब स्कूल में बनने वाले प्रोजेक्ट्स या अन्य गतिविधियों में शिक्षक व विद्यार्थी थर्मोकोल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसकी जगह उन्हें कार्डबोर्ड या इस तरह की अन्य सामग्रियों का उपयोग करना होगा। 
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गौरतलब है कि हर स्कूल में प्रोजोक्ट्स से लेकर क्लासरूम के डेकोरेशन और अन्य गतिविधियों तक में थर्मोकोल का खूब इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अब ये देखने को नहीं मिलेगा।
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हालांकि शिक्षकों ने सरकार के इस कदम की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि इस फैसले से क्लास प्रोजोक्ट्स का बजट भी कम रह सकेगा और साथ ही बच्चे कबाड़ का इस्तेमाल कर कुछ नया बनाना सीख सकेंगे। देश, समाज और विद्यार्थियों की बेहतरी की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है।

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क्यों लगाया गया प्रतिबंध

बेसिक शिक्षा परिषद की सचिव रूबी सिंह का कहना है कि 'प्लास्टिक की तरह ही थर्मोकोल से बने प्रोजेक्ट्स भी स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। ये आसानी से अपघटित (decompose) नहीं होते। इस कारण मिट्टी और पर्यावरण कई सालों तक प्रदूषित रहते हैं।'

लखनऊ के एक शिक्षक के अनुसार, 'अधिकांश स्टूडेंट्स को ये नहीं पता कि थर्मोकोल भी प्लास्टिक की तरह की बेहद हानिकारक वस्तु है। इसलिए प्रतिबंध लागू करने से पहले उन्हें इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में बताना भी जरूरी है।'

इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है। उन्हें सख्ती से स्कूलों में इसका पालन कराना है। 

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