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तालिबान का खौफ: जेएनयू में पढ़ रहे 22 अफगान छात्र नहीं जाना चाहते वापस, कर रहे वीजा बढ़ाने की मांग

Mon, 16 Aug 2021 11:21 AM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Mon, 16 Aug 2021 11:21 AM IST
सार

 अफगान छात्र, पीएचडी जैसे शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने वीजा का विस्तार करना चाहते हैं।

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Afghan students at Jawaharlal Nehru University fear to go back due to taliban, seek visa extension
जेएनयू : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पढ़ रहे अफगानिस्तान के लगभग 22 छात्र अपने देश वापस जाने के इच्छुक नहीं हैं और अकादमिक पाठ्यक्रमों के बहाने से अपने वीजा को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। अफगान छात्र भारत में अपने प्रवास को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उनका वीजा कुछ महीनाें के भीतर समाप्त होने वाला है।

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पीएचडी जैसे विकल्पों का कर रहे हैं चयन
सूत्रों के मुताबिक इन विदेशी छात्रों में से अधिकांश के वीजा की सीमा इस साल दिसंबर के महीने तक खत्म हो रही है, हालांकि, अफगानिस्तान में स्थिति अस्थिर होने के कारण, कोई भी वापस नहीं जाना चाहता है और वे पीएचडी जैसे शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपने वीजा का विस्तार करना चाहते हैं।

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23 सितंबर तक छोड़ना होता है छात्रावास

जेएनयू में अफगान छात्रों ने एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि अफगानिस्तान जैसे युद्धग्रस्त देश में अधिकांश लोग बड़े पैमाने पर बेरोजगार हैं और मौत या कैद से बचने की कोशिश कर रहे हैं। भारी शुल्क की व्यवस्था करना असंभव लगता है। वहीं टर्मिनल के छात्रों को 23 सितंबर तक छात्रावास छोड़ना पड़ता है, जिसकी वजह से अब उन्हें।

उम्मीद है प्रशानसन हमारी मदद करेगा

जेएनयू के एक छात्र जलालुद्दीन ने बताया कि अफगानिस्तान की स्थिति बेहद गंभीर है। मुझे उम्मीद है कि प्रशासन हमारी स्थिति को समझेगा और मेरा वीजा परमिट बढ़ा देगा। साथ ही, जेएनयू में पीएचडी विदेशी नागरिकों के लिए और गरीब परिवारों के लिए बहुत महंगा है। हालांकि, वर्तमान में, मैं वास्तव में नहीं जानता कि क्या करना है।

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मेरा परिवार तालिबान के कब्जे वाले इलाके में है - सुल्तान

जेएनयू में इंटरनेशनल रिलेशंस एंड एरिया स्टडीज के छात्र शफीक सुल्तान ने बताया कि मेरा वीजा 31 दिसंबर तक खत्म हो जाएगा। मैं यहां पढ़ने के लिए आने से पहले एक सरकारी कर्मचारी था। मुझे यकीन है कि अगर मैं वापस जाऊंगा तो वे मुझे पकड़ लेंगे। मेरा परिवार तालिबान के कब्जे वाले इलाके में रह रहा है और मैं पिछले डेढ़ हफ्ते से उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा हूं। तनाव बढ़ रहा है, हमें निश्चित रूप से मदद की जरूरत है।

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