World Lung Day : एम्स की अनूठी पहल, सांस की बनी रहेगी आस, मुफ्त में फेफड़ा बदलेगा संस्थान
World Lung Day: टूटती सांस बचाने की आस लगाए मरीजों के लिए एम्स उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। एम्स प्रशासन ने मुफ्त में फेफड़ा प्रत्यारोपण का फैसला लिया है। प्रत्यारोपण का सारा खर्च एम्स प्रशासन उठाएगा।
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टूटती सांस बचाने की आस लगाए मरीजों के लिए एम्स उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है। एम्स प्रशासन ने मुफ्त में फेफड़ा प्रत्यारोपण का फैसला लिया है। प्रत्यारोपण का सारा खर्च एम्स प्रशासन उठाएगा।
दवा समेत दूसरे सभी खर्च भी मरीज को नहीं देने पड़ेंगे। इसका सीधा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जो पैसों के अभाव में प्रत्यारोपण करवाने से बचते हैं। वजह यह है कि इस पर न्यूनतम 50 लाख रुपये का खर्च आता है। एम्स प्रशासन ने अब तक पांच मरीजों की प्रतीक्षा सूची तैयार कर राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) को भेज दी है। यहां से फेफड़ा मिलने के बाद एम्स प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू करेगा।
15 प्रत्यारोपण निशुल्क करने का लक्ष्य
एम्स प्रशासन ने अभी 15 मरीजों के फेफड़े के प्रत्यारोपण निशुल्क करने का लक्ष्य रखा है। मई में एक मरीज का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया जा चुका है। एम्स में फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए गठित टीम के सदस्य और कार्डियोलाजी विभाग के प्रोफेसर डा. संदीप सेठ ने बताया कि इसकी प्रक्रिया चल रही है। अभी 15 मरीजों का मुफ्त इलाज होगा। प्रत्यारोपण में आने वाले खर्च के लिए एम्स अपने स्तर व अन्य स्त्रोत से फंड जुटाने का प्रयास कर रहा है। लक्ष्य हासिल होने के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सरकारी में 50 लाख तो निजी अस्पतालों में 1.50 करोड़ तक खर्च
- विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अमूमन फेफड़ा प्रत्यारोपण पर करीब 50 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि निजी अस्पतालों में 70 लाख से 1.50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं
- डब्ल्यूएचओ से जुड़े जीओडीटी के आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में भारत में 133 फेफड़ों का प्रत्यारोपण हुआ है। साल 2020 में 67 और साल 2019 में 114 प्रत्यारोपण हुए थे। इसमें सबसे ज्यादा प्रत्यारोपण दक्षिणी भारत के अस्पतालों में हुए हैं
छह मई को हुआ था पहला लंग्स ट्रांसप्लांट
एम्स में 6 मई को पहला लंग्स ट्रांसप्लांट हुआ था। 5 साल से निमोनिया पीड़ित 36 साल की सपना के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के माध्यम से स्वस्थ लंग्स मिलने के बाद 6 मई को ट्रांसप्लांट किया गया। तीन दिन बाद उसे होश आया और 20 जुलाई को छुट्टी दे दी गई।
इन्हें करवाना पड़ता है फेफड़ा ट्रांसप्लांट
- अत्यधिक सिगरेट पीने वाले, जन्मजात बीमारी से पीड़ित लोग कोविड के कारण खराब हुए लंग्स