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Delhi: दवा संग स्पीच थेरेपी से जल्द लौट रही बोलने-समझने की शक्ति, एक साल में दिखने लगता है सकारात्मक परिणाम

Sat, 25 Feb 2023 09:15 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Sat, 25 Feb 2023 09:15 AM IST
सार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग सहित देश के अन्य राज्यों के बड़े अस्पताल एक मंच पर आए हैं। सभी मिलकर स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग देने के साथ इस दिशा में शोध भी कर रहे हैं।

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With speech therapy with medicine power speaking and understanding is returning soon
दवा संग स्पीच थेरेपी से जल्द लौट रही बोलने-समझने की शक्ति - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सड़क हादसे के बाद लकवाग्रस्त हुए 47 साल के महेंद्र में बोलने-समझने की शक्ति नहीं रही। परिवार जब उनसे मल-मूत्र करने के बारे में पूछते तो कुछ बता नहीं पाता था। कपड़े खराब होने पर महेंद्र को खुद भी अच्छा नहीं लगाता। दवाओं से ज्यादा सुधार नहीं हो रहा था। इस तरह का केस केवल महेंद्र की नहीं बल्कि लकवाग्रस्त सैकड़ों मरीजों का है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में अफेजिया कहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज का दिमाग बोलने व समझने की क्षमता खो देता है। ऐसे मरीजों में सुधार में लिए न्यूरोलॉजी विभाग दवाइयों के साथ स्पीच लैंग्वेज थेरेपी (वाणी चिकित्सा) भी दे रहा है जिससे सुधार की गति बढ़ी है। अधिकतर मरीजों में एक साल में ही सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। इसमें और सुधार लाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग सहित देश के अन्य राज्यों के बड़े अस्पताल एक मंच पर आए हैं। सभी मिलकर स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग देने के साथ इस दिशा में शोध भी कर रहे हैं।

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समय पर उपचार जरूरी : डॉ. ज्योति
आरएमएल अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गर्ग ने बताया कि अफेजिया से पीड़ित मरीज के दिमाग का वह हिस्सा काम नहीं करता जो बोलने व समझने में मदद करता है। ऐसे मरीजों में सुधार के लिए दवाइयों के साथ स्पीच थेरेपी दी जा रही है। इससे अधिकतर मरीजों में एक साल में ही सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि अफेजिया के मरीज जीने की चाह खो देते हैं। यदि ऐसे मरीजों का समय पर उपचार करवाएं तो ठीक हो सकते हैं। अस्पताल में पिछले कुछ साल में ऐसे काफी मरीज ठीक हुए हैं। इन मरीजों को तुरंत अस्पताल आना चाहिए। डॉ. ज्योति ने कहा कि ऐसे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए एम्स के डॉ. अचल श्रीवास्तव, आरएमएल के डॉ. अजय चौधरी सहित अन्य अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टर एक मंच पर आए। उन्होंने मरीजों व उनकी देखभाल करने वालों के बीच मेलजोल बढ़ाने, स्पीच थेरेपी का प्रयोग बढ़ाने, कर्मियों को प्रशिक्षण देने व शोध कर रहे हैं।
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हर साल आते हैं 60-70 हजार मरीज
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में हर साल 60 से 70 हजार मरीज आते हैं। विभाग की ओपीडी में आने वाले इन मरीजों में से करीब 20 फीसदी मरीज लकवाग्रस्त होते हैं। इनमें से करीब 5 से 10 फीसदी मरीज अफेजिया के होते हैं, जो बोलने व समझने की शक्ति को खो देते हैं। डॉ. ज्योति ने बताया कि इन मरीजों को दवाइयों के साथ स्पीच थेरेपी भी दी जा रही है, जिससे बोलने व समझने की शक्ति में सुधार जल्दी देखा जा रहा है।
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इन मरीजों को होती है समस्या
- ब्रेन स्ट्रोक
- सिर में लगी गंभीर चोट
- दिमाग में ट्यूमर

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