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जल संरक्षण: पानी के लिए तरस जाएगी नवाबों की नगरी लखनऊ, 25 मीटर तक गिर सकता है जलस्तर

Sat, 05 Jun 2021 10:38 PM IST
शाहरुख खान अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 05 Jun 2021 10:38 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर लखनऊ में जल के उपयोग को लेकर ठोस नीति नहीं बनाई गई तो अगले दस सालों में ही यहां के जल स्तर में 20 से 25 मीटर तक की गिरावट आ सकती है।

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Water Conservation: Water level may fall up to 25 meters in Lucknow
फाइल फोटो - फोटो : pixabay

विस्तार

भूजल विभाग, उत्तर प्रदेश की सहायता से टेरी ने लखनऊ में पानी की खपत और उसके उपयोग को लेकर एक अध्ययन किया है। शुक्रवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार प्री मानसून सीजन में गोमती नदी और वर्षा जल के द्वारा जितना भूजल रिचार्ज होता है, उसका 17 गुना ज्यादा भूजल का उपयोग लखनऊवासी इसी दौरान कर लेते हैं। 
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विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर लखनऊ में जल के उपयोग को लेकर ठोस नीति नहीं बनाई गई तो अगले दस सालों में ही यहां के जल स्तर में 20 से 25 मीटर तक की गिरावट आ सकती है। लखनऊ की 71 प्रतिशत जनसंख्या जलनिगम द्वारा सप्लाई किए गये जल का उपयोग करती है तो 72 प्रतिशत घरों में सीधे भूजल से जल प्राप्त किया जाता है। 
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अनुमानत: 43 प्रतिशत लोग भूजल और निगम की ओर से सप्लाई किये जाने वाले जल दोनों का उपयोग करते हैं। शहर के कम से कम 64 प्रतिशत घरों में जल शुद्ध करने के लिए आरओ सिस्टम या वाटर प्योरीफायर का उपयोग किया जाता है जिसे पानी की बर्बादी के लिए बहुत ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है।
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भूजल का सबसे ज्यादा उपयोग होटलों, रेस्टोरेंट्स, अस्पताल, मॉल और ऊंची इमारतों वाली सोसाइटीज में रहने वाले लोगों के द्वारा उपयोग किया जाता है। जिन सोसाइटीज में भूजल का दोहन किया जा रहा है, उनमें से 60 प्रतिशत में जलस्तर 200 फीट या इससे अधिक पहुंच चुका है। भारी जलदोहन से यह स्तर लगातार गिर रहा है।

लखनऊ शहर में जिस तेजी के साथ भूजल का दोहन हो रहा है, अनुमान है कि 2031 तक मध्य लखनऊ के भूजल स्तर में तेज गिरावट आएगी। यह 2020 के भूजल स्तर से 20-25 मीटर तक नीचे जा सकता है, जबकि अपेक्षाकृत कम घनी आबादी वाले किनारे के इलाकों में यह गिरावट 5-10 मीटर तक हो सकती है।

क्या हैं उपाय
दी एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (teri, टेरी) के सीनियर फेलो डॉक्टर श्रेष्ठ तायल ने अमर उजाला को बताया कि देश की विशाल आबादी को पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी के सदुपयोग को बढ़ाने और इसके दुरूपयोग को रोकने की जरूरत है। अच्छे क्वालिटी के टैप्स लगाने पर घरों में पानी की खपत आधी तक रह जाती है। यानी इस तरह हम हर घर से पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं।

अगर सरकार दो से तीन लाख घरों में अच्छी क्वालिटी की पानी वाली टोंटी उपलब्ध कराती है तो इस पर 30 से 40 करोड़ तक की ही लागत आती है, जबकि इसके कारण प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत हो सकती है। सरकारों को इसके बारे में विचार करना चाहिए।    

एक बार पेशाब करने के बाद फ्लश चलाने पर पांच से दस लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। एक बार शेविंग करने या टूथब्रश करने के दौरान टोंटी से पानी चलते रहने पर भी पांच से दस लीटर तक पानी बर्बाद हो जाता है। लेकिन अगर घरों में स्मार्ट टैप का इस्तेमाल किया जाए तो प्रत्येक घर के लिए होने वाली पानी की खपत को 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है। 

यह तरीका घरों के साथ-साथ होटलों, रेस्टोरेंट्स या किसी भी सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल किये जाने पर पानी की बचत को भारी बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर सरकारें लोगों को मुफ्त या सब्सिडी में अच्छे वाटर टैप्स उपलब्ध कराएं तो पानी की बचत में यह अहम कदम साबित हो सकता है।

अगर आने वाले समय में सबको जल उपलब्ध कराना है तो भूजल के उपयोग में कमी लानी होगी। घरों में बेतहाशा आरओ और वाटर प्योरीफायर के बढ़ते अनावश्यक उपयोग को रोकना होगा। निश्चित क्षेत्रफल वाले सभी घरों, माल्स, अस्पताल और बड़े सरकारी भवनों में वर्षा जल संग्रहण की नीति को बाध्यकारी बनाना होगा।

शहर से निकल रहे गंदे जल का संशोधन भूजल गिरावट को कम करने का एक प्रमुख साधन हो सकता है। अगर गंदे जल को शोधित कर पार्कों, सड़क किनारे लगे पौधों, वन क्षेत्र में सिंचाई और वाहनों की ढुलाई जैसे कार्यों में उपयोग किया जा सके तो इससे स्वच्छ भूजल के दोहन में भारी कमी की जा सकती है। 

इसके लिए सरकार को उचित नीतियाँ बनाने के साथ-साथ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में निवेश भी करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार अगर लखनऊ की लगभग पांच फीसदी एरिया या 40 वर्ग किमी में ही जल संरक्षण का उपाय उचित ढंग से इस्तेमाल किया जाता है तो इससे पूरे शहर की पूरे साल की प्यास बुझाई जा सकती है।
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