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ठगी का पर्दाफाश : दिल्ली- यूपी से अमेरिका तक बनाए शिकार, हजारों को फंसाकर करोड़ों डकारे

Sat, 16 Jul 2022 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/नोएडा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 16 Jul 2022 06:25 AM IST
सार

1000 से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये ठगे, दिल्ली में 18 गिरफ्तार। लखनऊ एसटीएफ ने किया फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा। 
 

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Victims made from Delhi and UP to America, trapping thousands and robbing crores
गिरफ्त में आरोपी... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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अपराध शाखा ने अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर मालिक समेत 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अमेरिकी सरकार की ओर से एजुकेशन लोन देने के नाम पर ठगी करते थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि 1000 से ज्यादा लोगों के साथ करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने 20 लाख रुपये, 11 डेस्कटॉप, आठ लैपटॉप बरामद किए हैं। 

अपराध शाखा डीसीपी विचित्र वीर के मुताबिक एसआई सीताराम को 12 जुलाई को सूचना मिली थी कि मुंडका गांव में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। सूचना के बाद एसीपी अभिनेंद्र जैन की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज ठकरान व एसआई सीताराम आदि की टीम गठित की गई। टीम ने दबिश दी तो यहां काम करने वाले लोग अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर रहे थे। 
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जांच में पता लगा कि नजफगढ़ निवासी नितिन सिंह (30) कॉल सेंटर का मालिक है।  वह नोएडा, यूपी निवासी दया निधि प्रसाद के साथ मिलकर कॉल सेंटर को चला रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर मालिक नितिन सिंह व अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 16 अन्य आरोपी टेलीकॉलर थे। इनकी पहचान सिकंदपुर, हरियाणा निवासी  हैरी(20), जासन (26), गुरुग्राम, हरियाणा निवासी माइक तामंग (25), दिल्ली निवासी हेनरी थॉमस (30), जॉहन लोना (32), बिल्ली सीवा (29), फ्रेंसाइज (19), अलबर्ट पामे (24), जॉन (32), जैक्सन पामे (21), केविन फॉस्टर  (26), केविन लनाह (21), ट्रोय एनएस (26), जेम्स सीएस (25), तिंगबाग्वे कौरिंग  (26) और रेमंड मिजो (29) के रूप में हुई है।  
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आरोपी नितिन ने पूछताछ में बताया कि वह कमल नाम के आरोपी से अमेरिकी नागरिकों का डाटा लेता था। इसके बाद टेलीकॉलर इंटरनेट के जरिये कॉल करते थे। नागरिकों से आरोपियों को जो गिफ्ट वाउचर का नंबर मिलते थे उनको रुपयों में दया कैश कराता था। 

ऐसे करते थे ठगी
आरोपी अमेरिकी नागरिकों को इंटरनेट कॉल करते थे। ये लोगों को कहते थे कि वह अमेरिकी सरकार के ग्रांट विभाग से बोल रहे हैं। ये कहते थे कि उनका चयन हायर एजुकेशन के लिए फ्री लोन के लिए हुआ है। पीड़ित जब लोन लेने के लिए तैयार हो जाता था तो ये उससे कहते कि उसे पंजीकरण कराना होगा। ये रजिस्ट्रेशन के नाम पर विभिन्न कंपनियों के वाउचर खरीदवाते थे। इसके बाद वह पीड़ित से वाउचर का नंबर पूछ लेते थे। नितिन दया के जरिये इन वाउचर को रुपयों में कैश करा   लेता था। 

अमेरिका से दुबई तक किया खेल कंप्यूटर हैक कर 170 करोड़ ठगे

लखनऊ विशेष जांच दल (एसटीएफ) ने विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा देकर 170 करोड़ रुपये ठगने वाले फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया है। एसटीएफ ने शुक्रवार को नोएडा सेक्टर-59 स्थित बी-36 में चल रहे कॉल सेंटर से सरगना सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अमेरिका से लेकर दुबई तक के सैकड़ाें लोगों से ठगी की है।

कॉल सेंटर से वीओआईपी कॉलिंग का सर्वर लगाकर विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डाला जाता था। फिर टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर संपर्क कर लैपटॉप-कंप्यूटर को रिमोट पर लेकर ऑनलाइन अकाउंट से भारतीय अकाउंट में रकम ट्रांसफर की जाती थी। 

यूपी एसटीएफ के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सेक्टर-44 निवासी करन मोहन, बेगमगंज गोंडा निवासी विनोद सिंह, सेक्टर-92 निवासी ध्रुव नारंग, सेक्टर-49 निवासी मयंक गोगिया, सेक्टर-15ए निवासी अक्षय मलिक, गढ़ी चौखंडी निवासी दीपक सिंह, गौड़ सिटी निवासी आहूजा पॉडवाल, दिल्ली निवासी अक्षय शर्मा, जयंत सिंह व मुकुल रावत के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 12 मोबाइल, 76 डेस्कटॉप, 81 सीपीयू, 56 वीओआईपी डायलर, 37 क्रेडिट कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है।

दुबई से लेकर अमेरिका तक फैला है नेटवर्क
फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क दुनिया के कई देशों में है। आरोपियों ने अमेरिका, कनाडा, लेबनान, ऑस्ट्रेलिया, दुबई से लेकर कई पश्चिमी देशों के लोगों से ठगी की है। नोएडा के कॉल सेंटर में पचास से अधिक लोग रोजाना काम कर रहे थे। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।

किराए के विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर करते थे
फर्जी दस्तावेज से आरोपियों ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बना रखी थीं। कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों से संपर्क कर कंप्यूटर व लैपटॉप में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा दिया जाता था। टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर आरोपी अलग-अलग सॉफ्टवेयर से लैपटॉप-कंप्यूटर को हैक कर लेते थे और विदेशी नागरिकों के ऑनलाइन खाते या क्रेडिट कार्ड की डिटेल चुराकर किराए पर लिए गए विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर कर लेते थे।

हवाला के माध्यम से आता था पैसा
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता था। किराए के अकाउंट में डॉलर में पैसे जाते थे। फिर किराए पर अकाउंट देने वाले कमीशन काटकर भारत में रुपये ट्रांसफर कर देते थे।

यह होता है वीओआईपी
वीओआईपी का मतलब वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल होता है। यह व्हाट्स एप कॉलिंग जैसे काम करता है यानी इसकी रिकॉर्डिंग आदि नहीं होती है। यह इंटरनेट कॉलिंग है। 

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