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कामयाबी की तरफ बढ़ रहा कोरोना वैक्सीन का परीक्षण, नहीं दिखे दुष्प्रभाव
Fri, 07 Aug 2020 01:43 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 01:43 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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एम्स में कोरोना की वैक्सीन का परीक्षण कामयाबी की तरफ बढ़ता दिख रहा है। दो सप्ताह में किसी पर भी इसके दुष्प्रभाव नहीं दिखे हैं। इससे प्रोजेक्ट में लगे चिकित्सकों को उम्मीद है कि पहला फेज सफल रहेगा। दूसरी तरफ वैक्सीन देने के लिए एम्स में रोज स्क्रीनिंग भी की जा रही है। इससे दूसरे लोगों पर भी इसका परीक्षण किया जाएगा।
एम्स प्रशासन का कहना है कि अभी तक 16 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई है। पहले वालंटियर को वैक्सीन दिए हुए करीब दो सप्ताह हो गए हैं। वह लगातार डॉक्टरों की निगरानी में है। 14 बाद भी उसमें कोई दुष्प्रभाव नजर नहीं आए हैं। एम्स में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने बताया कि दो सप्ताह से व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। वह पूरी तरह से ठीक है।
संजय राय के मुताबिक, रोज वैक्सीन के लिए करीब 30 लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। स्क्रीनिंग के बाद ब्लड टेस्ट सहित अन्य टेस्ट होते हैं, जिनमें तीन दिन का समय लग जाता है। 16 लोगों पर परीक्षण के बाद वैक्सीन की सुरक्षा रिपोर्ट एथिक्स समिति को भेजी गई है। समिति के मूल्यांकन के बाद ट्रायल आगे बढ़ाया जाएगा।
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पहले चरण का उद्देश्य यह देेखना है कि वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं और इसकी कितनी खुराक प्रभावी होगी। वैक्सीन के प्रथम चरण में अभी 84 और वालंटियर को शामिल किया जाना है। प्रथम चरण को पूरा होने में महीना भर लग सकता है। वैक्सीन के दो चरण में 60 दिन का समय लगता है। यह मानक पूरी दुनिया में एक है।
इन बातों से पता चलता है कि वैक्सीन कारगर है या नहीं
वैक्सीन कारगर साबित हो रही है या नहीं, यह जानने के दो नियम होते हैं। पहला यह कि वैक्सीन देने के बाद मरीज कोरोना संक्रमण से पीड़ित न हो और दूसरा यह कि व्यक्ति के शरीर में वायरस से लड़ने की एंटीबॉडी कितनी बनी है। एंटीबॉडी का स्तर छह महीने तक जांचा जाएगा। वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि जिन लोगों की जांच की गई है, उनमें करीब पांच फीसदी लोगों में पहले ही एंटीबॉडी मिली है। यानी, ये लोग संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं।
1120 लोगों पर होना है परीक्षण
देश के 12 अस्पतालों में वैक्सीन का परीक्षण होना है। 1120 लोगों पर होने वाले इस परीक्षण का सबसे अहम भाग दिल्ली के एम्स में हो रहा है। यहां 100 लोगों पर परीक्षण किया जाना है। इसकी शुरुआत 24 जुलाई को हो गई थी।
कुछ देशों का दावा, सभी ट्रायल पूरे
दुनियाभर में अब तक करीब 15 संभावित कोरोना वैक्सीन विकसित की जा चुकी हैं। इनमें शुरुआती परीक्षण में अच्छे नतीजे आए हैं। अब इनके अगले चरण का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, कुछ देशों का दावा है कि उन्होंने वैक्सीन के सभी ट्रायल पूरे कर लिए हैं।
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एम्स प्रशासन का कहना है कि अभी तक 16 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई है। पहले वालंटियर को वैक्सीन दिए हुए करीब दो सप्ताह हो गए हैं। वह लगातार डॉक्टरों की निगरानी में है। 14 बाद भी उसमें कोई दुष्प्रभाव नजर नहीं आए हैं। एम्स में सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने बताया कि दो सप्ताह से व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है। वह पूरी तरह से ठीक है।
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संजय राय के मुताबिक, रोज वैक्सीन के लिए करीब 30 लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। स्क्रीनिंग के बाद ब्लड टेस्ट सहित अन्य टेस्ट होते हैं, जिनमें तीन दिन का समय लग जाता है। 16 लोगों पर परीक्षण के बाद वैक्सीन की सुरक्षा रिपोर्ट एथिक्स समिति को भेजी गई है। समिति के मूल्यांकन के बाद ट्रायल आगे बढ़ाया जाएगा।
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पहले चरण का उद्देश्य यह देेखना है कि वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं और इसकी कितनी खुराक प्रभावी होगी। वैक्सीन के प्रथम चरण में अभी 84 और वालंटियर को शामिल किया जाना है। प्रथम चरण को पूरा होने में महीना भर लग सकता है। वैक्सीन के दो चरण में 60 दिन का समय लगता है। यह मानक पूरी दुनिया में एक है।
इन बातों से पता चलता है कि वैक्सीन कारगर है या नहीं
वैक्सीन कारगर साबित हो रही है या नहीं, यह जानने के दो नियम होते हैं। पहला यह कि वैक्सीन देने के बाद मरीज कोरोना संक्रमण से पीड़ित न हो और दूसरा यह कि व्यक्ति के शरीर में वायरस से लड़ने की एंटीबॉडी कितनी बनी है। एंटीबॉडी का स्तर छह महीने तक जांचा जाएगा। वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि जिन लोगों की जांच की गई है, उनमें करीब पांच फीसदी लोगों में पहले ही एंटीबॉडी मिली है। यानी, ये लोग संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं।
1120 लोगों पर होना है परीक्षण
देश के 12 अस्पतालों में वैक्सीन का परीक्षण होना है। 1120 लोगों पर होने वाले इस परीक्षण का सबसे अहम भाग दिल्ली के एम्स में हो रहा है। यहां 100 लोगों पर परीक्षण किया जाना है। इसकी शुरुआत 24 जुलाई को हो गई थी।
कुछ देशों का दावा, सभी ट्रायल पूरे
दुनियाभर में अब तक करीब 15 संभावित कोरोना वैक्सीन विकसित की जा चुकी हैं। इनमें शुरुआती परीक्षण में अच्छे नतीजे आए हैं। अब इनके अगले चरण का परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, कुछ देशों का दावा है कि उन्होंने वैक्सीन के सभी ट्रायल पूरे कर लिए हैं।