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कोरोना टीकाकरण: दिल्ली में अब दो से छह साल के बच्चों पर होगा वैक्सीन परीक्षण, पहला चरण पूरा
Wed, 30 Jun 2021 09:54 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 30 Jun 2021 09:54 PM IST
सार
दिल्ली में बच्चों के वैक्सीनेशन की स्क्रीनिंग मंगलवार से शुरू हुई थी। अब इसी सप्ताह उन्हें कोवैक्सिन की खुराक दी जाएगी। अभी तक 6 से 17 वर्ष तक के बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया है जिसके बाद कोई दुष्प्रभाव नहीं मिला है।
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कोवैक्सिन वैक्सीन
- फोटो : ट्विटर
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विस्तार
राजधानी दिल्ली में बच्चों पर वैक्सीन परीक्षण का अगला चरण शुरू हो चुका है। एम्स में अब दो से छह साल तक की आयु के बच्चों को वैक्सीन देने के लिए स्क्रीनिंग शुरू हो गई है। इसी सप्ताह में इन बच्चों को वैक्सीन की खुराक भी देना शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले छह से 17 वर्ष तक की आयु वालों को वैक्सीन देने का काम पूरा हो चुका है।
डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक बच्चों में कोवैक्सिन का कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिला है। इन बच्चों को वही कोवैक्सिन दी जा रही है, जो वर्तमान में टीकाकरण कार्यक्रम के तहत व्यस्कों को मिल रही है।
दिल्ली एम्स से मिली जानकारी के अनुसार बीते मंगलवार से दूसरे चरण के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू हुई, जो बुधवार को भी जारी रही। गुरुवार और शुक्रवार को इनमें से कुछ बच्चों को वैक्सीन लगेगी। स्क्रीनिंग के दौरान पहले बच्चे के संक्रमित होने या न होने की जांच की जाती है।
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इसके बाद रक्त नमूना लेकर एंटीबॉडी का स्तर जांचने की प्रक्रिया होती है, ताकि यह पता रहे कि बच्चा पहले कभी संक्रमित हुआ था या नहीं। अभी तक परीक्षण के परिणाम संतोषजनक बताए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष सामने आने में करीब दो माह का वक्त लग सकता है।
525 बच्चों पर चल रहा कोवैक्सिन का परीक्षण
दिल्ली एम्स सहित देश के छह अलग-अलग अस्पतालों में दो से 17 वर्ष की आयु के 525 बच्चों पर कोवाक्सिन का परीक्षण चल रहा है। अभी तक बच्चों में कोरोना का वैक्सीन सुरक्षित है अथवा नहीं, इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद कम हैं। इसलिए सरकार देश में बच्चों के टीकाकरण में कोरोना वैक्सीन शामिल करने से पहले यह अध्ययन करा रही है।
इसके तहत एम्स में 9 जून को पहले 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों को पहली खुराक दी गई थी। इसके बाद छह से 12 साल की उम्र के बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है और इन्हें अगले दो दिन में खुराक मिल जाएगी। व्यस्कों की भांति बच्चों को भी 28 दिन के अंतराल में दो खुराक दी जाएंगी।
अलग-अलग समूह में बांटे गए इन बच्चों को वैक्सीन की दोनों खुराक देने के 15-15 दिन बाद तक फॉलोअप लिया जाएगा और उसके आधार पर निष्कर्ष निकाला जाएगा। अगले माह के अंत तक परीक्षण में शामिल बच्चों को दूसरी खुराक भी लगेगी। ऐसे में सितंबर के शुरुआत में अंतरिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
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डॉक्टरों का कहना है कि अभी तक बच्चों में कोवैक्सिन का कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिला है। इन बच्चों को वही कोवैक्सिन दी जा रही है, जो वर्तमान में टीकाकरण कार्यक्रम के तहत व्यस्कों को मिल रही है।
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दिल्ली एम्स से मिली जानकारी के अनुसार बीते मंगलवार से दूसरे चरण के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू हुई, जो बुधवार को भी जारी रही। गुरुवार और शुक्रवार को इनमें से कुछ बच्चों को वैक्सीन लगेगी। स्क्रीनिंग के दौरान पहले बच्चे के संक्रमित होने या न होने की जांच की जाती है।
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इसके बाद रक्त नमूना लेकर एंटीबॉडी का स्तर जांचने की प्रक्रिया होती है, ताकि यह पता रहे कि बच्चा पहले कभी संक्रमित हुआ था या नहीं। अभी तक परीक्षण के परिणाम संतोषजनक बताए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष सामने आने में करीब दो माह का वक्त लग सकता है।
525 बच्चों पर चल रहा कोवैक्सिन का परीक्षण
दिल्ली एम्स सहित देश के छह अलग-अलग अस्पतालों में दो से 17 वर्ष की आयु के 525 बच्चों पर कोवाक्सिन का परीक्षण चल रहा है। अभी तक बच्चों में कोरोना का वैक्सीन सुरक्षित है अथवा नहीं, इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद कम हैं। इसलिए सरकार देश में बच्चों के टीकाकरण में कोरोना वैक्सीन शामिल करने से पहले यह अध्ययन करा रही है।
इसके तहत एम्स में 9 जून को पहले 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों को पहली खुराक दी गई थी। इसके बाद छह से 12 साल की उम्र के बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है और इन्हें अगले दो दिन में खुराक मिल जाएगी। व्यस्कों की भांति बच्चों को भी 28 दिन के अंतराल में दो खुराक दी जाएंगी।
अलग-अलग समूह में बांटे गए इन बच्चों को वैक्सीन की दोनों खुराक देने के 15-15 दिन बाद तक फॉलोअप लिया जाएगा और उसके आधार पर निष्कर्ष निकाला जाएगा। अगले माह के अंत तक परीक्षण में शामिल बच्चों को दूसरी खुराक भी लगेगी। ऐसे में सितंबर के शुरुआत में अंतरिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है।