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Ukraine vs Russia: यूक्रेन में आफत के बाद स्लोवाकिया सीमा पर राहत, ज्यादा पैदल नहीं चलना पड़ रहा

Sat, 05 Mar 2022 05:02 AM IST
अनुराग सक्सेना शुभम बंसल, नई दिल्ली
शुभम बंसल, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sat, 05 Mar 2022 05:02 AM IST
सार

ओखला के मोहम्मद तारिक ने बताया कि 23 फरवरी तक वह पोल्टावा में अपने हॉस्टल में सुरक्षित थे। 24 फरवरी को कीव से भारत आने के लिए उसे फ्लाइट पकड़नी थी। 23 की मध्य रात्रि वह कीव एयरपोर्ट पहुंच गया और तड़के ही कीव पर हमला हो गया।

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Ukraine vs Russia: Relief on the Slovak border after the disaster in Ukraine not much walking
मिलने के बाद पिता-पुत्री भावुक हो गए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पोलैंड और रोमानिया बॉर्डर के विपरीत स्लोवाकिया बॉर्डर की तरफ जाने वाले छात्रों को बड़ी सहूलियत है। शुक्रवार को स्लोवाकिया बॉर्डर से आईजीआई पहुंचे छात्रों के एक समूह ने बताया कि उन्हें सीमा तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तक पैदल नहीं चलना पड़ा।

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जाम नहीं होने के कारण टैक्सियां स्लोवाकिया बॉर्डर तक आसानी से पहुंच रही हैं। वहीं, एक से दो घंटे के बीच बॉर्डर पार करना भी संभव है। हालांकि, कई छात्रों का दर्द यह भी है कि 24 फरवरी की तयशुदा फ्लाइट पकड़ने के लिए वह कीव पहुंचकर युद्ध क्षेत्र में फंस गए थे। एक हफ्ते तक बम धमाकों के बीच भूखे-प्यासे बैरक में पड़े रहे। किसी तरह वहां से बाहर निकले।

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ओखला के मोहम्मद तारिक ने बताया कि 23 फरवरी तक वह पोल्टावा में अपने हॉस्टल में सुरक्षित थे। 24 फरवरी को कीव से भारत आने के लिए उसे फ्लाइट पकड़नी थी। 23 की मध्य रात्रि वह कीव एयरपोर्ट पहुंच गया और तड़के ही कीव पर हमला हो गया। सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। माहौल डरावना हो गया था। समझ में नहीं आया कि क्या करें। सुरक्षित जोन से युद्ध क्षेत्र में पहुंचने के लिए किस्मत को भी कोस रहा था। किसी तरह पास के एक हॉस्टल के बंकर में शरण ली। यहां से धमाकों की आवाज, चीख पुकार सुनाई पड़ती रहती थी। छह दिन कैसे गुजरे, बयां नहीं कर सकता। एक मार्च की सुबह टैक्सी कर ल्वीव रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां भीड़ होने की वजह से स्टेशन पर दो दिन इंतजार करना पड़ा। इसके बाद स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंचा। इस बीच सहूलियत यह रही कि पैदल नहीं चलना पड़ा और आसानी से एक घंटे में बार्डर पार कर गया।

खारकीव में मिसाइल हमले से हिल गया था रेलवे और मेट्रो स्टेशन

ग्रेटर नोएडा। खारकीव में मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में  छिपी एमबीबीएस की छात्रा व गामा एक सेक्टर निवासी पूजा यादव उस समय दहल गईं जब कुछ ही दूरी पर एक इमारत पर रूसी सेना के मिसाइल का हमला हुआ था।

इमारत पर हमले की गूंज और कंपन मेट्रो स्टेशन तक महसूस हुई। घबराते हुए बाहर निकलीं पूजा अपने साथियों के साथ रेलवे स्टेशन की तरफ दौड़ीं। खारकीव स्टेशन पहुंचने तक हमले से तहस तहस हुई इमारत से उठता धुएं का गुबार देखा था। शुक्रवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर वह मां को देखकर भावुक हुई तो मां भी रोने लगीं।

छात्र को लगीं चार गोलियां, चार दिन बाद छतरपुर में परिजनों से हो सका संपर्क


यूक्रेन की राजधानी कीव से पोलैंड की तरफ जा रहे भारतीय छात्र हरजोत सिंह (31) बीच रास्ते में फायरिंग होने से घायल हो गए हैं। उन्हें चार गालियां लगी हैं और उनका कीव के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। चार दिन बाद इसकी सूचना छतरपुर एक्सटेंशन में रहने वाले उनके परिजनों को मिली है, जिससे पूरा परिवार दहशत में है। बेटे की वापसी के लिए वह भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। उधर, अस्पताल में हरजोत सिंह की हालत स्थिर बनी हुई है। दो दिन पहले दुबारा परिवारवालों का संपर्क हो सका है। परिवारवालों की भारत सरकार से मांग है कि उनके बेटे की जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। मूलत: पंजाब के लुधियाना जिले के जगरांव निवासी हरजोत के पिता केसर सिंह परिवार के साथ दिल्ली के छतरपुर में रहते हैं। इनका यहां अपना कारोबार है।

हरजोत के भाई प्रभजोत ने बताया कि पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बीएससी करने के बाद हरजोत ने गुरुग्राम व नोएडा की मल्टीनेशनल कंपनियों में दो-तीन साल काम किया है। 2021 कीव स्थित इंटरनेशनल यूरोपियन यूनिवर्सिटी में यूरोपियन लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया। वह तीन महीने पहले यूक्रेन गए थे। 26 को बातचीत में भाई ने बताया था कि वह अगले दिन भारत के लिए निकल रहा है। इसके बाद फोन से संपर्क नहीं हो सका। शुक्रवार को वीडियो कॉल पर बात दुबारा हो सकी।

सुरक्षाकर्मियों ने कैब रोकी और हो गई फायरिंग

प्रभजोत के मुताबिक, 27 फरवरी को यूक्रेन व रूस में तनाव बढ़ने के बाद अपने दो दोस्तों के साथ कीव से पोलैंड बॉर्डर की तरफ बढ़े। ल्वीव में सुरक्षाकर्मियों ने उनकी कैब रोक ली। इस दौरान फायरिंग हो गई और इसके बाद हरजोत को होश नहीं रहा। तीन दिन बाद होश आने पर उसने खुद को अस्पताल में पाया। उसे चार गोलियां लगी थीं।

केसर सिंह ने बताया कि बेटे से बात नहीं होने के कारण वह परेशान हो रहे थे। उसका फोन स्विच आफ जाने लगा था। दो मार्च को बेटे ने अस्पताल से फोन किया। एक बारगी उसकी आवाज सुनने पर लगा कि जैसे उसका दुबारा जन्म हुआ हो। बातचीत में उसने बताया कि 27 फरवरी को यूक्रेन से निकलने के लिए वह ट्रेन में सवार होने गया था, लेकिन ट्रेन में नहीं बैठ सका। इस पर उसने दो दोस्तों के साथ मिलकर टैक्सी ली। रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सुरक्षा जांच की जाने लगी। इस दौरान वहां गोलीबारी होने लगी। इसमें उसे चार गोलियां लग गईं। इसके बाद हरजोत बेहोश हो गए थे।

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