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100 करोड़ की धोखाधड़ी में दो निदेशक गिरफ्तार
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नई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने आम्रपाली अध्या ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य प्रबंध निदेशक और निदेशक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन्होंने 124 निवेशकों के शेयरों का गबन किया है। यह धोखाधड़ी करीब 100 करोड़ की बताई गई है। पुलिस ने इस संबंध में 21 सितंबर 2017 को मुकदमा दर्ज किया था।
ईओडब्ल्यू के ज्वाइंट सीपी ओपी मिश्रा के मुताबिक, गिरफतार किए गए आरोपियों के नाम संजीव कुमार सिन्हा और नारायण ठाकुर है। पवन कुमार चौधरी और 30 अन्य लोगों ने इनके खिलाफ शिकायत दी थी। आरोप था कि ग्राहकों की बिना अनुमति के कंपनी व उसके निदेशकों ने शेयरों को अपने मूल खातों में स्थानांतरित कर दिया। धन लाभ के लिए कंपनी ने अपने ग्राहकों के शेयरों को गिरवी रख दिया था। अपने कर्मचारियों के खातों के माध्यम से ग्राहकों के शेयरों को बेचा भी गया और किसी भी ग्राहक को कोई भुगतान नहीं किया। पुलिस ने केस दर्ज कर पाया कि कुल 124 शेयर धारकों ने इस संबंध में शिकायत दी है। उनके शेयरों का मूल्य लगभग 100 करोड़ था। जांच के दौरान, एनएसई और सेबी की भी शिकायतें भी पुलिस को मिली। जांच शुरू होते ही कंपनी के खातों को फ्रीज कर दिया गया। सेबी से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लि. से प्राप्त जवाब से पता चला है कि एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 की अवधि के बीच कथित कंपनी का रिकॉर्ड फर्जी था। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने एक सुनियोजित साजिश रची और शेयर धारकों को अपनी कंपनी के माध्यम से व्यापार करने का लालच दिया। उन्हें आकर्षक प्रोत्साहन राशि देने का आश्वासन दिया। ग्राहकों के शेयरों को अपने पूल खातों में स्थानांतरित कर दिया और बाद में उनकी बगैर जानकारी के शेयरों को अपने कर्मचारी के खातों के माध्यम से बेचा गया। पुलिस ने दोनों आरोपी निदेशकों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है।
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ईओडब्ल्यू के ज्वाइंट सीपी ओपी मिश्रा के मुताबिक, गिरफतार किए गए आरोपियों के नाम संजीव कुमार सिन्हा और नारायण ठाकुर है। पवन कुमार चौधरी और 30 अन्य लोगों ने इनके खिलाफ शिकायत दी थी। आरोप था कि ग्राहकों की बिना अनुमति के कंपनी व उसके निदेशकों ने शेयरों को अपने मूल खातों में स्थानांतरित कर दिया। धन लाभ के लिए कंपनी ने अपने ग्राहकों के शेयरों को गिरवी रख दिया था। अपने कर्मचारियों के खातों के माध्यम से ग्राहकों के शेयरों को बेचा भी गया और किसी भी ग्राहक को कोई भुगतान नहीं किया। पुलिस ने केस दर्ज कर पाया कि कुल 124 शेयर धारकों ने इस संबंध में शिकायत दी है। उनके शेयरों का मूल्य लगभग 100 करोड़ था। जांच के दौरान, एनएसई और सेबी की भी शिकायतें भी पुलिस को मिली। जांच शुरू होते ही कंपनी के खातों को फ्रीज कर दिया गया। सेबी से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लि. से प्राप्त जवाब से पता चला है कि एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 की अवधि के बीच कथित कंपनी का रिकॉर्ड फर्जी था। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने एक सुनियोजित साजिश रची और शेयर धारकों को अपनी कंपनी के माध्यम से व्यापार करने का लालच दिया। उन्हें आकर्षक प्रोत्साहन राशि देने का आश्वासन दिया। ग्राहकों के शेयरों को अपने पूल खातों में स्थानांतरित कर दिया और बाद में उनकी बगैर जानकारी के शेयरों को अपने कर्मचारी के खातों के माध्यम से बेचा गया। पुलिस ने दोनों आरोपी निदेशकों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है।
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