दिल्ली : अनलॉक-1 की नीति को लेकर व्यापारियों में बेहद रोष, कहा- फैक्टरी खोल दो और जहां माल बिके उसे बंद कर दो
भारत का खुदरा बाजार देश की वितरण व्यवस्था की रीढ है। कोविड की स्थिति सुधरने तक दिल्ली को चरणबद्ध तरीके से खोला जाना चाहिए। व्यापारिक संगठनों ने फैक्ट्रियों को खोले जाने का स्वागत किया है। साथ ही पूछा है कि फैक्ट्री चलेंगी कैसे, मल बिकेगा कहा।
विस्तार
दिल्ली सरकार द्वारा तैयार अनलॉक-1 की नीति को लेकर व्यापारियों में बेहद रोष है। व्यापारिक संगठनों ने इसे ढीली-ढाली नीति बताया है। कहा है कि इस लचर नीति से न तो लघु उद्योग को ही फायदा होगा और न ही आर्थिक स्थितियों में सुधार होगा। उन्होंने इस निर्णय को बेहद तर्कहीन और औचित्यहीन बताया है।
भारत का खुदरा बाजार देश की वितरण व्यवस्था की रीढ़ है। कोविड की स्थिति सुधरने तक दिल्ली को चरणबद्ध तरीके से खोला जाना चाहिए। व्यापारिक संगठनों ने फैक्टरियों को खोले जाने का स्वागत किया है। साथ ही पूछा है कि फैक्टरी चलेगी कैसे, माल बिकेगा कहां।
व्यापारियों ने सरकार से पूछे कई सवाल
सरकार की अनलॉक-1 की नीति पर व्यापारिक संगठनों ने कई सवाल भी किए हैं। कहा है कि हमेशा दिल्ली की जनता से राय लेकर फैसला करने का दावा करने वाली सरकार की औद्योगिक नीति की कलई खुल गई है। व्यापारियों ने पूछा है कि क्या निर्णय लेने से पहले सरकार ने इस बात को ध्यान रखा कि बिना मार्केट खुले फैक्टरियों को कच्चे माल की आपूर्ति कहां से होगी? उत्पादन शुरू होने के बाद निर्मित सामान बिकने के लिए किस बंद मार्केट में जाएगा?
फैक्टरियों के लिए स्पेयर पार्ट्स कहां से आएंगे? बड़ी संख्या में दुकानदारों का माल पिछले 40 दिनों से ट्रांसपोर्ट पर पड़ा हुआ है और वो खराब हो रहा है, इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? दुकानों में रखा हुआ माल देखभाल के अभाव में खराब हो रहा है, बारिश में अनेक दुकानों में पानी से नुकसान हुआ है, इसकी भरपाई कौन करेगा? पेमेंट का लेनदेन, बैंकों व अन्य लोन की किश्त समेत कई सवाल सरकार से किए हैं।
छोटे व मंझोले व्यापारियों की बढ़ी परेशानी
अनलॉक-1 की नीति को व्यापारिक संगठनों ने छोटे व मंझोले व्यापारियों के लिए नुकसानदेह बताया है। कहा कि सरकार के निर्णय से छोटे और मंझोले व्यापारियों की हालात बिगड़ जाएगी। व्यापार में हौसला टूटेगा और आर्थिक व्यवस्था को दुरुस्त करने वाले व्यापारियों में निराशा घर कर जाएगी। सभी व्यापारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से निराश व्यापारियों ने उपराज्यपाल से लगाई गुहार
दिल्ली को अनलॉक करने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो रही है। दिल्ली सरकार की नीतियों से निराश व्यापारियों ने अब दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से गुहार लगाई है। व्यापारिक संगठनों ने ज्ञापन लिखकर व्यापार के नुकसान से अवगत कराया है। यह भी मांग की है कि 31 मई से दिल्ली के बाजार को खोला जाए।
संक्रमण दर कम होने का दिया हवाला
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने कहा है कि दिल्ली में कोविड का संक्रमण दर लगातार कम हो रहा है। 19 अप्रैल को जब दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा हुई थी तब संक्रमण दर 26.12 प्रतिशत थी। अब यह घटकर 1.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऐसे में कोरोना सुरक्षा के सभी उपाय के साथ दुकानें खुलनी चाहिए।
इकोनॉमी के ताले की चाबी हैं खुले बाजार
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा है कि बाजार आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है। आवश्यक वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानों व बाजारों के माध्यम से कोविड के समय में भी जनजीवन का चक्र चलाते रहे हैं। इस व्यापार को चलाने वाले अब दुकानों व गोदामों में दूषित हो रहे माल के नुकसान की भरपाई करने के लिए दुकान खोलना चाह रहे हैं। खुदरा बाजार खुलेंगें तो अर्थव्यवस्था का सुरक्षा चक्र भी घूमेगा। देश को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य पूरा करना है तो जल्द अनुमति मिलनी चाहिए।
आर्थिक संकट खड़ा हो गया है
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केन्टाइल एसोसिएशन का कहना है कि व्यापार बंद होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बीते तीन महीने में ही शादी व त्योहारों में कपड़े की खरीदारी होती है। वह समय तो खत्म हो गया है, लेकिन अब जल्द व्यापार नहीं खुला तो छोटे, मझोले व्यापारियों की पूंजी डूब जाएगी।
अराजकता फैलने का भय
रेडिमेड गारर्मेंट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन गांधी नगर ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि जिस तरह से अनलॉक-1 की प्रक्रिया शुरू की गई है इससे अराजकता फैलने का भय है। फैक्टरी का निरंतर चालू रहना भी मार्केट से मिल रहे कच्चे माल और बिक्री से प्राप्त भुगतान से ही संभव है। मुख्यमंत्री अपने फैसले पर फिर से विचार करें।
ब्लैक मार्केटिंग को मिलेगा बढ़ावा
एसोसिएशन ऑफ होलसेल रेडिमेड गारमेंट्स-मार्केट्स सुभाष रोड के उप प्रधान विपिन कुमार जैन का कहना है कि सरकार की नीति समझ से बाहर है। फैक्टरियां खुलेंगी तो रॉ मटेरियल कहां से आएगा। फैक्टरियों में जो पहले से माल पड़ा है उसे जब तक दुकानों पर नहीं भेजा जाएगा तब तक प्रोडक्शन कैसे होगा। भले ही चार घंटे के लिए दुकान खुले, लेकिन खुलना चाहिए। इस निर्णय से यही होगा कि ब्लैक मार्केंटिंग होगी व पुलिस की आड़ में माल एक जगह से दूसरी जगह जाएगा। बदरपुर, सरिया, कंक्रीट जब मिलेगा ही नहीं तो निर्माण कार्य कैसे संभव है। मजदूरों की बात करना भी बेमानी है। सुनिल कुमार जैन ने कहा कि मुसीबत बड़ी थी, लेकिन अब हफ्ते में कम दिन ही सही लेकिन व्यापार खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए।
उठाया सवाल
. कर्मचारियों की तनख्वाह कैसे दी जाएगी
. बिजली-पानी के खर्चे, प्रॉपर्टी टैक्स और दुकानों का किराया कहां से देंगे।
. पटरी से उतर चुके व्यापार को कैसे व्यवस्थित किया जाएगा।
. वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद तक नहीं है।
. दिल्ली में करीब 15 लाख छोटे बड़े व्यापारी है।
. दिल्ली के बाजारों में करीब 35 लाख से अधिक लोग रोजगार करते हैं।
कोविड संक्रमण रोकने के लिए सुझाया उपाय
. ऑड इवन के माध्यम से बाजार को खोला जाए
. वैक्सीन के दोनों डोज लगाने वालों को दुकान खोलने की अनुमति दी जाए।
. कार्य के समय को कम किया जा सकता है।
. दिल्ली को विभिन्न जोन में बांट कर व्यापार खोला जा सकता है।
. रात्रि कर्फ्यू लगाया जा सकता है
. सप्ताहांत में दो दिन का लॉकडाउन लगाया जा सकता है।