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दिल्ली: यमुना नदी में हर तरफ पसरी झाग, राघव चड्ढा बोले- यूपी और हरियाणा यमुना नदी को कर रहे हैं गंदा
Mon, 08 Nov 2021 07:30 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 08 Nov 2021 07:30 PM IST
सार
जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा यमुना नदी में गंदा पानी छोड़ रहे हैं। वहीं दिल्ली जल बोर्ड अनुपचारित अपशिष्ट पानी यमुना नदी में जाने से रोकने के लिए अपनी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
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राघव चड्ढा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यमुना नदी में अमोनिया की मात्रा कम होने से बेशक पेयजल की समस्या खत्म हो गई है, लेकिन छठ पर्व के पहले हर तरफ फैली झाग से व्रतियों पर गहरा संकट है। झाग के बीच नदी में उतरने की उनकी मजबूरी है। सोमवार को आईटीओ से कालिंदी कुंज के बीच के घाटों पर छठ व्रती नदी में स्नान करते हुए दिखाई दिए। स्नान करने के बाद भी उनके शरीर से झाग ही झाग लिपटी हुई थी।
दिल्ली सरकार का इस बारे में स्पष्टीकरण है कि यमुना का प्रदूषण दिल्ली का अपना नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड उपाध्यक्ष राघव चड्ढा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा यमुना नदी को गंदा कर रहे हैं। दोनों राज्यों से यमुना नदी में झाग रोकने के लिए अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करने का आग्रह किया है।
देश में सोमवार से नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ पर्व आरंभ हो गया है। इस सिलसिले में राजधानी में रह रहे अनेक पूर्वांचली यमुना नदी स्थित वजीराबाद, यमुना बाजार, आईटीओ, कालिंदी कुंज आदि घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। उन्हें अधिकतर घाटों पर चारों ओर झाग ही झाग मिले, लेकिन उनकी आस्था झागों पर भारी पड़ी।
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उन्होंने झाग के बीच ही यमुना नदी में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा की। जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा यमुना नदी में गंदा पानी छोड़ रहे हैं। वहीं दिल्ली जल बोर्ड अनुपचारित अपशिष्ट पानी यमुना नदी में जाने से रोकने के लिए अपनी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण यमुना नदी में झाग बन रहे है। ओखला बैराज उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के अधीन आता है। उसके ढुलमुल रवैये के कारण चारों तरफ जलकुंभी के पौधे उग आते हैं और ये पौधे सड़ जाते हैं तब वे फॉस्फेट जैसे सर्फेक्टेंट छोड़ते हैं। फॉस्फेट जैसे सर्फेक्टेंट वाला पानी जब कालिंदी कुंज में ऊंचाई से गिरता है तो यह झाग पैदा करता है।
बड़ी मात्रा में निकलने वाले झाग पानी की सतह पर तैरते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर में संचालित कागज और चीनी उद्योग भी सर्फेक्टेंट युक्त गंदे पानी को ओखला बैराज में हिंडन नहर के माध्यम से कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी में छोड़ते हैं। इससे झाग बनने लगता है और यमुना में जमा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का गंदा पानी शाहदरा नाले और हरियाणा का नजफगढ़ नाले के माध्यम से दिल्ली आता है। दोनों राज्यों के गंदे पानी की वजह से ओखला बैराज का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो जाता है। ये दोनों राज्य 150 एमजीडी गंदा पानी यमुना नदी में छोड़ते हैं।
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दिल्ली सरकार का इस बारे में स्पष्टीकरण है कि यमुना का प्रदूषण दिल्ली का अपना नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड उपाध्यक्ष राघव चड्ढा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा यमुना नदी को गंदा कर रहे हैं। दोनों राज्यों से यमुना नदी में झाग रोकने के लिए अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करने का आग्रह किया है।
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देश में सोमवार से नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ पर्व आरंभ हो गया है। इस सिलसिले में राजधानी में रह रहे अनेक पूर्वांचली यमुना नदी स्थित वजीराबाद, यमुना बाजार, आईटीओ, कालिंदी कुंज आदि घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। उन्हें अधिकतर घाटों पर चारों ओर झाग ही झाग मिले, लेकिन उनकी आस्था झागों पर भारी पड़ी।
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उन्होंने झाग के बीच ही यमुना नदी में आस्था की डुबकी लगाई और पूजा की। जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा यमुना नदी में गंदा पानी छोड़ रहे हैं। वहीं दिल्ली जल बोर्ड अनुपचारित अपशिष्ट पानी यमुना नदी में जाने से रोकने के लिए अपनी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण यमुना नदी में झाग बन रहे है। ओखला बैराज उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग के अधीन आता है। उसके ढुलमुल रवैये के कारण चारों तरफ जलकुंभी के पौधे उग आते हैं और ये पौधे सड़ जाते हैं तब वे फॉस्फेट जैसे सर्फेक्टेंट छोड़ते हैं। फॉस्फेट जैसे सर्फेक्टेंट वाला पानी जब कालिंदी कुंज में ऊंचाई से गिरता है तो यह झाग पैदा करता है।
बड़ी मात्रा में निकलने वाले झाग पानी की सतह पर तैरते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर में संचालित कागज और चीनी उद्योग भी सर्फेक्टेंट युक्त गंदे पानी को ओखला बैराज में हिंडन नहर के माध्यम से कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी में छोड़ते हैं। इससे झाग बनने लगता है और यमुना में जमा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का गंदा पानी शाहदरा नाले और हरियाणा का नजफगढ़ नाले के माध्यम से दिल्ली आता है। दोनों राज्यों के गंदे पानी की वजह से ओखला बैराज का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो जाता है। ये दोनों राज्य 150 एमजीडी गंदा पानी यमुना नदी में छोड़ते हैं।