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टूलकिट: दिशा रवि का बड़ा खुलासा, बताया- व्हाट्सएप ग्रुप का नाम था 'इंटरनेशनल फार्मर्स स्ट्राइक', ग्रेटा से की थी चैट

Tue, 16 Feb 2021 09:52 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 16 Feb 2021 09:52 PM IST
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toolkit case Disha Ravi big revealing in police interrogation Whatsapp group was named International Farmers Strike
दिशा रवि (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
टूलकिट मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। मंगलवार को टूलकिट मामले की जांच के दौरान अनिता लाल नाम की महिला का नाम भी सामने आया है। खालिस्तानी संगठन से जुड़ी पाएटिक जटिस फाउंडेशन की को-फाउंडर और वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन की फाउंडर अनिता, एमओ धालीवाल की बेहद करीब है। 
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जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि टूलकिट तैयार करने में अनिता भी शामिल रही हैं। टूलकिट बनाने और उसको इंटरनेशनल लेवल पर भेजने के लिए दिशा रवि ने इंटरनेशनल फार्मर्स स्ट्राइक के नाम से अपना व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था। स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग ने जब टूलकिट को ट्वीट कर दिया तो दिशा ने यूएपीए के डर से आनन-फानन में ट्वीट डिलीट करवाकर सबूत नष्ट करना शुरू कर दिए। 
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इसी कड़ी में व्हाट्सऐप ग्रुप को भी डिलीट कर दिया गया। हालांकि तब तक सुरक्षा एजेंसियों को इन लोगों के डिजीटल फुटप्रिंट हाथ लग चुके थे। मंगलवार को पुलिस की टीमों ने निकिता जैकब और शांतनु मुलुक की तलाश में छापेमारी जारी रखी। वहीं दिशा की गलत तरीके से गिरफ्तारी के आरोप लगने के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने सफाई देते हुए कहा कि उसकी गिरफ्तारी नियमों और कानून के तहत हुई है।
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दिशा से पूछताछ के बाद पता चला है कि उसने जो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था। उसमें कुल 67 नामी लोग शामिल थे। इसमें कई विदेशी लोग भी शामिल थे। व्हाट्सऐप ग्रुप पर टूलकिट का मसौदा तैयार हुआ। 11 जनवरी को हुई जूम मीटिंग में तय किया गया कि किसान आंदोलन से जुड़ी टूलकिट को पूरे विश्व स्तर पर फैलाया जाएगा। 
 

इसके लिए मीटिंग में मौजूद लोगों से कहा गया कि वह अपने-अपने जानकार इंटरनेशनल सेलिब्रिटीज को टूलकिट भेजेंगे। ताकि पूरी दुनिया को पता चल सके कि भारत में किसानों के साथ ज्यादती हो रही है। मीटिंग में एमओ धालीवाल, निकिता, शांतनु के अलावा करीब 70 लोग शामिल हुए थे। 

दिल्ली पुलिस ने जूम को पत्र लिखकर मीटिंग में शामिल हुए लोगों की सूची मांगी है। छानबीन के दौरान पुलिस के हाथ दिशा रवि और ग्रेटा थनबर्ग की एक वहाट्सऐप चैट भी हाथ लगी है। चूंकि दिशा और ग्रेटा का पर्यावरण से संबंध था, इसलिए दोनों एक दूसरे को पहले से जानते थे। 

ऐसे में दिशा ने बिना एडिट की हुई टूलकिट ग्रेटा को भेज दी थी। इस गूगल टूलकिट में उसे बनाने वालों के नाम थे। ग्रेटा के ट्वीट करते ही दिशा के होश उड़ गए। उसने चैट कर ग्रेटा से तुरंत ट्वीट को डिलीट करने के लिए कहा। इसके लिए दिशा अपने वकील से बात करने और यूएपीए के तहत कार्रवाई का भी डर जता रही है। ग्रेटा ने ट्वीट डिलीट किया बाद में एडिट किया हुआ ट्वीट पोस्ट किया गया। हालांकि तब तक सुरक्षा एजेंसियों के हाथ वह गूगल डोकोमेंट लग चुका था।

सुरक्षा एजेंसियों के राडर पर आते ही दिशा ने आनन-फानन में ग्रुप डिलीट करने के अलावा, गूगल से जानकारियां और लिंक डिलीट करना शुरू कर दिए। मामले का पता चलते ही पुलिस ने चार फरवरी को इस संबंध में केस दर्ज कर लिया। चूंकि गूगल डोकोमेंट में दिशा रवि के अलावा निकिता और शांतनु के भी नाम थे, इसलिए पुलिस की जांच उन तक भी पहुंच गई। 

लेकिन इससे पहले कि पुलिस उनको गिरफ्तार कर पाती, निकिता और शांतनु फरार हो गए। पुलिस तभी से उनकी तलाश कर रही है। दिशा से पूछताछ के बाद पता चला है कि कुछ लोग दिल्ली से भी इनके साथ जुड़े हुए थे। पुलिस उन तक पहुंचने का भी प्रयास कर रही है।
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