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दिल्ली : वाहन प्रदूषण कम करने के लिए सरकार के इस कदम से मिलेगी मामूली राहत
Mon, 31 Jan 2022 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सर्वेश कुमार , नई दिल्ली
सर्वेश कुमार , नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 31 Jan 2022 05:08 AM IST
सार
विशेषज्ञ बोले- सार्वजनिक परिवहन को करना चाहिए बेहतर। सड़कों से निजी वाहन कम होंगे तो स्थिति में आएगा सुधार।
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प्रदूषण जांच केंद्र
- फोटो : PTI File
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विस्तार
दिल्ली सरकार वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। प्रमाण पत्र नहीं होने पर वाहनों में ईंधन नहीं भरवा सकेंगे। इतना ही नहीं, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार के लिए उठाए जा रहे इस कदम को लागू करने से पहले दिल्ली सरकार की ओर से आम लोगों से राय भी ली जाएगी।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अगर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं तो इसका फायदा मिलेगा, लेकिन बहुत अधिक राहत की उम्मीद कम है। हालात में सुधार के लिए जरूरी है कि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर किया जाए, ताकि लोगों को कम से कम निजी वाहनों का इस्तेमाल करना पड़े।
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दिल्ली में परिवहन और पर्यावरण विभाग की सख्ती के बाद रोजाना 30-40 हजार से अधिक वाहनों का प्रदूषण जांचा जा जा रहा है। करीब तीन महीने पहले पंपों पर पेट्रोल या डीजल भरवाने के दौरान वाहन मालिकों से प्रमाण पत्र की जांच की जा रही थी। सख्ती के कारण प्रदूषण की जांच करवाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। अब प्रमाण पत्र के बगैर ईंधन न देने पर घरों से निकलने वाले शत-प्रतिशत वाहनों का प्रदूषण नियंत्रित दायरे मेें होगा।
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दिल्ली में जल्द ही बगैर प्रदूषण प्रमाण पत्र, पंपों पर वाहनों में पेट्रोल-डीजल नहीं भरवा जा सकेंगे। पहले प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसके लिए सरकार जल्द ही नई नीति लागू करने जा रही है, ताकि वायु प्रदूषण से राहत मिल सके। इसके लिए सभी पंपों पर कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
वाहनों के लिए नियंत्रित प्रदूषण प्रमाण पत्र पहले से ही अनिवार्य है। ईंधन भरवाने के वक्त अगर हर बार दिखाना पड़े तो कई बार जल्दबाजी में होने पर परेशानी हो सकती है। अगर घर में बंद पड़े वाहनों पर भी रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर जुर्माना किया जाता है तो इससे परेशानी होगी।
- सुबोध सिंह, गोयला डेयरी निवासी
नियंत्रित प्रदूषण का प्रमाण पत्र न होने पर अगर पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाता है तो इससे हालात सुधरेंगे, लेकिन अगर जांच करवाने में एक-दो दिन की देरी हो जाती है तो अचानक उन पर इस तरह की सख्ती नहीं होनी चाहिए। इससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
- देवराज सिंह, पालम निवासी
वाहनों पर सख्ती बढ़ाने से प्रदूषण में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। इसके लिए केवल वाहनों से होने वाला प्रदूषण ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि और कई कारण हैं। वाहनों से फिलहाल करीब 40 फीसदी प्रदूषण होता है। ऐसे कदम उठाने के बाद उन वाहनों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी, जिन्होंने पहले नियमित तौर पर प्रदूषण जांच नहीं करा रखी है। प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है कि सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या में कमी की जाए।
इसके लिए जरूरी है कि सार्वजनिक परिवहन को सुलभ बनाया जाए। अभी भी दिल्ली के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां अंतिम छोर तक के लिए परिवहन सुविधा माकूल नहीं है। इस वजह
से लोगों को निजी वाहनों का इस्तेेमाल करना पड़ता है। इसमें सुधार से हालात में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
- डॉ. एसके त्यागी, सेवानिवृत्त अधिकारी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड