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Delhi Library: किताबों की खुशबू बरकरार, राजधानी के पुस्तकालय गुलजार

Mon, 02 Oct 2023 08:26 AM IST
अनुज कुमार आयुशी ध्यानी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आयुशी ध्यानी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 02 Oct 2023 08:26 AM IST
सार

डीयू, जेएनयू और जामिया विश्वविद्यालय के नजदीक के पुस्तकालयों में रोज काफी संख्या में युवा किताबें पढ़ने आते हैं। पुस्तकालयों में कभी-कभी तो सीट मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

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there are a large number of youth reading books library In digital era
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : निखिल मेहता

विस्तार

दुनियाभर की किताबें बेशक मोबाइल की स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन हाथ में लेकर पुस्तक पढ़ने का क्रेज अभी भी कम नहीं हुआ है। खासकर डीयू, जेएनयू और जामिया विश्वविद्यालय के नजदीक के पुस्तकालयों में रोज काफी संख्या में युवा किताबें पढ़ने आते हैं। पुस्तकालयों में कभी-कभी तो सीट मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

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चांदनी चौक स्थित दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के चेयरमैन सुभाष चंद्र कांखेरिया बताते हैं कि शहरों के तंग कमरों में पढ़ाई करने में बाधा आती रहती है, जबकि लाइब्रेरी में ऐसा नहीं है। यहां पढ़ाई पर फोकस करना ज्यादा आसान है। वहीं, यूपीएससी की तैयारी कर रहे राजीव बाहिर ने बताया कि वह दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में दो साल से आ रहे हैं। रोज करीब आठ घंटे यहीं गुजरते हैं। यहां हर तरह की पुस्तकें मिल जाती हैं। वहीं वर्चुअल पुस्तकों की बात करें तो देर तक मोबाइल या लैपटॉप पर पढ़ने से आंखों पर जोर पड़ता है।

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आंखों पर जोर डालता है मोबाइल
जब कोई व्यक्ति मोबाइल फोन पर किताब पढ़ता है तो उसे तरह-तरह की दिक्कतें आती हैं जैसे आंखों पर जोर पड़ने की वजह से नींद नहीं आ पाती। इसके नतीजे अच्छे नहीं होते, जबकि किताबें पढ़ने वाले लोग ध्यान लगाकर और गहराई से चीजों को समझते हैं। इन लोगों में धैर्य, रचानात्मकता, सकारात्मकता और सीखने की चाह रहती है। -डॉ. लोकेश, मनोरोग विशेषज्ञ, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल

किताबें पढ़ने से कम होता है तनाव
जो लोग अच्छी किताबें पढ़ते हैं, उनमें सोचने समझने की शक्ति ज्यादा होती है। असल में किताब पढ़ते वक्त आप दूसरी दुनिया का अनुभव लेते हैं, जो आपको व्यक्तिगत स्थिति से हटाता है। किताबें पढ़ने से तनाव कम होता है। इससे अच्छी नींद आती है। -डॉ. अंकित दराल, मनोरोग विशेषज्ञ, इंद्रा गांधी हॉस्पिटल

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नया अनुभव सिखाता है पन्ने पलटना
डिजिटल के जमाने में भी किताबों का दौर बना हुआ है। हर एक किताब का पन्ना पलटना एक नया अनुभव सिखाता है। यह मोबाइल में संभव नहीं। पाठक आज भी चाहता है कि वह हाथ में किताब पकड़े, उसका हर एक पन्ना पलटे। नई पीढ़ी काफी जिज्ञासु है, वह किताबों से ही अतीत को जानना चाहती है और अपने अनुभवों से उनकी तुलना करती है। वर्चुअली इसका अनुभव बेहद अलग होता है। जैसे फोन को स्क्रॉल करते-करते भूल जाते हैं कि हमने कहानी कहां खत्म की थी, जबकि किताब को जहां पढ़कर छोड़ते हैं, वहीं से अगले दिन पढ़ना शुरू कर सकते हैं। -अशोक चक्रधर, साहित्यकार

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