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Delhi News: कथाकारों ने उकेरे स्त्री जीवन के विविध रंग
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कथाकारों ने उकेरे स्त्री जीवन के विविध रंग
नई दिल्ली। साहित्य अकादमी की तरफ से आयोजित साहित्य मंच कार्यक्रम में बुधवार को तीन समकालीन हिंदी कथाकारों ने अपनी कहानियां प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आयोजन में स्त्री जीवन की जटिलताओं, संवेदनाओं और संघर्षों को विविध रूपों में अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध लेखिका योगिता यादव की कहानी ‘गंध’ से हुई, जिसमें उन्होंने मिग-21 विमान हादसे के बाद मुख्य पात्र सारिका के जीवन में आए मानसिक तूफान को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। कहानी के माध्यम से स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दे को गहराई से उठाया गया।
हरियश राय ने अपनी कहानी ‘अंतिम पड़ाव’ में वृंदावन की विधवा सोना घोष के जीवन के माध्यम से सामाजिक उपेक्षा और अकेलेपन की करुण कथा बयां की। इसके बाद हरिसुमन बिष्ट की ‘अदृश्य पंखों पर उड़ान’ ने दादी-पोती के आत्मीय संवादों के ज़रिए पहाड़ की स्त्रियों की संघर्षगाथा को उजागर किया।
कार्यक्रम में जानकी प्रसाद शर्मा, वंदना यादव, हीरालाल नागर, अशोक मिश्र सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। तीनों कहानियां स्त्रियों की आवाज बनकर उभरीं और लंबे समय तक श्रोताओं के मन में गूंजती रहीं।
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नई दिल्ली। साहित्य अकादमी की तरफ से आयोजित साहित्य मंच कार्यक्रम में बुधवार को तीन समकालीन हिंदी कथाकारों ने अपनी कहानियां प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आयोजन में स्त्री जीवन की जटिलताओं, संवेदनाओं और संघर्षों को विविध रूपों में अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध लेखिका योगिता यादव की कहानी ‘गंध’ से हुई, जिसमें उन्होंने मिग-21 विमान हादसे के बाद मुख्य पात्र सारिका के जीवन में आए मानसिक तूफान को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। कहानी के माध्यम से स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दे को गहराई से उठाया गया।
हरियश राय ने अपनी कहानी ‘अंतिम पड़ाव’ में वृंदावन की विधवा सोना घोष के जीवन के माध्यम से सामाजिक उपेक्षा और अकेलेपन की करुण कथा बयां की। इसके बाद हरिसुमन बिष्ट की ‘अदृश्य पंखों पर उड़ान’ ने दादी-पोती के आत्मीय संवादों के ज़रिए पहाड़ की स्त्रियों की संघर्षगाथा को उजागर किया।
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कार्यक्रम में जानकी प्रसाद शर्मा, वंदना यादव, हीरालाल नागर, अशोक मिश्र सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। तीनों कहानियां स्त्रियों की आवाज बनकर उभरीं और लंबे समय तक श्रोताओं के मन में गूंजती रहीं।
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