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Delhi News: गरीब मजदूरों के परिजनों के पास शव गांव ले जाने के भी पैसे नहीं
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दरियागंज में जर्जर इमारत का पिछला हिस्सा गिरने का मामला
रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई
पुलिस व प्रशासन से शव गांव ले जाने का इंतजाम कराने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दरियागंज हादसे में मौत के मुंह में समा गए जुबैर, तौफीक और गुल सागर के परिजनों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वह पोस्टमार्टम के बाद शवों को बिहार अपने गांव ले जा सकें। मजदूरी करके उनको 600 या 700 रुपये मिलते थे। हादसा हुआ तो ठेकेदार व मालिक मौके से भाग निकले। मजदूरों के पास खाने के भी पैसे नहीं थे।
रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। इसके अलावा परिजन पुलिस व प्रशासन से गुहार लगा रहे थे कि वह शवों को गांव ले जाने का इंतजाम करा दें। हादसे की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर दिल्ली में रहने वाले मजदूरों के परिजन एलएनजेपी अस्पताल पहुंच गए।
एक परिजन ने बताया कि जुबैर कुछ दिनों पहले ही चाचा तौफीक के पास दिल्ली आया था। तौफीक की मौसी महरुन खातून ने रोते हुए बताया कि एक महीने पहले जुबैर बिहार से दिल्ली घूमने आया था। कुछ दिन वह आनंद विहार उनके घर पर रुका। करीब 10 दिन पहले वह अपने चाचा तौफीक के साथ चिड़ियाघर घूमने गया था।
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एक अन्य मजदूर इमरान ने बताया कि तीनों ही मजदूर आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से दिल्ली में काम के लिए आए थे। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक सभी यहां पर काम करते थे। तौफीक के परिवार में पत्नी निशा बेगम के अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं। वह बच्चों को पढ़ाने लिखाने के लिए दिल्ली में काम करने आया था।
परिवार में तौफीक ही अकेला कमाने वाला था। गांव में इनकी मौत की सूचना मिलने पर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ परिजन इनकी मौत की सूचना मिलने पर बिहार से दिल्ली के लिए रवाना भी हो गए हैं।
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रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई
पुलिस व प्रशासन से शव गांव ले जाने का इंतजाम कराने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दरियागंज हादसे में मौत के मुंह में समा गए जुबैर, तौफीक और गुल सागर के परिजनों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वह पोस्टमार्टम के बाद शवों को बिहार अपने गांव ले जा सकें। मजदूरी करके उनको 600 या 700 रुपये मिलते थे। हादसा हुआ तो ठेकेदार व मालिक मौके से भाग निकले। मजदूरों के पास खाने के भी पैसे नहीं थे।
रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। इसके अलावा परिजन पुलिस व प्रशासन से गुहार लगा रहे थे कि वह शवों को गांव ले जाने का इंतजाम करा दें। हादसे की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर दिल्ली में रहने वाले मजदूरों के परिजन एलएनजेपी अस्पताल पहुंच गए।
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एक परिजन ने बताया कि जुबैर कुछ दिनों पहले ही चाचा तौफीक के पास दिल्ली आया था। तौफीक की मौसी महरुन खातून ने रोते हुए बताया कि एक महीने पहले जुबैर बिहार से दिल्ली घूमने आया था। कुछ दिन वह आनंद विहार उनके घर पर रुका। करीब 10 दिन पहले वह अपने चाचा तौफीक के साथ चिड़ियाघर घूमने गया था।
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एक अन्य मजदूर इमरान ने बताया कि तीनों ही मजदूर आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से दिल्ली में काम के लिए आए थे। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक सभी यहां पर काम करते थे। तौफीक के परिवार में पत्नी निशा बेगम के अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं। वह बच्चों को पढ़ाने लिखाने के लिए दिल्ली में काम करने आया था।
परिवार में तौफीक ही अकेला कमाने वाला था। गांव में इनकी मौत की सूचना मिलने पर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ परिजन इनकी मौत की सूचना मिलने पर बिहार से दिल्ली के लिए रवाना भी हो गए हैं।