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इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को जल्द शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने द्वारका में बनने वाले इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को कोरोना महामारी के चलते जल्द शुरु करने का निर्णय लिया है। सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल में नर्सिंग व अन्य अधिकारियों की तैनाती शुरू कर दी है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने द्वारका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वाईपी सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर द्वारका के सेक्टर-9 में 1700 बिस्तर वाले इस अस्पताल को शुरू करने के बारे में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने अब सुनवाई 6 मई तय की है।
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि इसे जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी, कर्मचारियों की तैनाती के लिए आदेश भी जारी कर दिया है। इससे पहले उन्होंने बताया कि अस्पताल में बिजली की समस्या है और उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता यशवर्धन सोम ने खंडपीठ को बताया कि द्वारका में लाखों लोग रहते हैं, लेकिन इलाके में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इंदिरा गांधी अस्पताल बनकर तैयार है और पिछले साल मार्च में ही शुरू होना था, लेकिन आज तक नहीं हुआ। साथ ही कहा गया है कि कोरोना महामारी में सरकार के पास बेड की कमी है, इसकी कमी से लोगों की जानें जा रही हैं। बावजूद इसके सरकार इस अस्पताल को शुरू नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली की समस्या जनरेटर से पूरी कर सकती है या फिर बिजली कंपनी को बिजली सप्लाई के लिए कह सकती है। याचिका में इस अस्पताल में वकीलों के लिए 500 बेड, न्यायिक अधिकारियों के लिए 50 और कोर्ट कर्मचारियों के लिए 150 बेड आरक्षित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित वकीलों, न्यायिक अधिकारियों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है। इसलिए इस अस्पताल में बेड आरक्षित किए जाने चाहिए।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने द्वारका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वाईपी सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर द्वारका के सेक्टर-9 में 1700 बिस्तर वाले इस अस्पताल को शुरू करने के बारे में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने अब सुनवाई 6 मई तय की है।
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सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि इसे जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने इस अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी, कर्मचारियों की तैनाती के लिए आदेश भी जारी कर दिया है। इससे पहले उन्होंने बताया कि अस्पताल में बिजली की समस्या है और उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता यशवर्धन सोम ने खंडपीठ को बताया कि द्वारका में लाखों लोग रहते हैं, लेकिन इलाके में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इंदिरा गांधी अस्पताल बनकर तैयार है और पिछले साल मार्च में ही शुरू होना था, लेकिन आज तक नहीं हुआ। साथ ही कहा गया है कि कोरोना महामारी में सरकार के पास बेड की कमी है, इसकी कमी से लोगों की जानें जा रही हैं। बावजूद इसके सरकार इस अस्पताल को शुरू नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली की समस्या जनरेटर से पूरी कर सकती है या फिर बिजली कंपनी को बिजली सप्लाई के लिए कह सकती है। याचिका में इस अस्पताल में वकीलों के लिए 500 बेड, न्यायिक अधिकारियों के लिए 50 और कोर्ट कर्मचारियों के लिए 150 बेड आरक्षित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित वकीलों, न्यायिक अधिकारियों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है। इसलिए इस अस्पताल में बेड आरक्षित किए जाने चाहिए।