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दिल्ली नगर निगम के चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह से करवाने का मामला फिर हाईकोर्ट में

Sat, 27 Feb 2021 04:47 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Sat, 27 Feb 2021 04:47 PM IST
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The petitioner said that DMC Act is being violated
delhi high court

दिल्ली नगर निगम के चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह से करवाने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पंहुच गया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली सरकार व राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह से करवाने का निर्देश दिया जाए। 

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अदालत ने उन्हें 13 अप्रैल से पूर्व अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने यह निर्देश नवादा वार्ड से चुनाव लड़ चुकी अल्का गहलोत की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता हरज्ञान सिंह गहलोत ने अदालत को बताया कि डीएमसी एक्ट 1957 में निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह के करवाने का प्रावधान है लेकिन तय रूल का नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी मुवक्किला की याचिका पर 27 मई 2019 को चुनाव आयोग को इस मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था लेकिन आयोग ने बिना उनकी मुवक्किल का पक्ष सुने एक अक्तूबर 2019 व चार नवंबर 2020 को उनके आवेदन को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल निगम के वर्ष 19 में हुए चुनाव में नवादा वार्ड से चुनाव लड़ी थी लेकिन उन्हें चुनाव से 15 दिन पहले चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया।
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 वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनाव चिन्ह पहले से अरक्षित रखा गया। ऐसे में यह सरासर संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए बराबरी के अधिकार का हनन है। उन्होंने कहा चुनाव के दौरान वैलेट पेपर पर प्रत्याशी के फोटो के अलावा चुनाव चिन्ह का प्रावधान खत्म किया जाना जरूरी है ताकि आम लोग ईमानदार व प्रतिष्ठा व फेस वैल्यु को देखकर अपना प्रतिनिधि चुन सके।


उन्होंने कहा राजधानी की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और निगम उसे रोकने में असफल रहा है जो एनसीआर प्लांनिग बोर्ड का उल्लंघन है और राजधानी विश्व की सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। इसके अलावा राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह के चलते इलाकों का सही तरीके से विकास भी नहीं हो पा रहा। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अगले वर्ष होने वाले निगम चुनाव बिना राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह से करवाने का निर्देश दिया जाए।

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