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Hindi News ›   Delhi ›   The High Court said that the judges should not do the work of creating doubt in the minds of the litigants and lawyers

High Court: हाईकोर्ट का जजों को आदेश, कहा- वादियों-वकीलों के मन में शंका पैदा करने का काम ना करें

Sun, 05 Jun 2022 03:45 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 05 Jun 2022 03:45 AM IST
सार

साकेत कोर्ट के जज की ओर से दोनों पक्षों को अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर देने व एक पक्ष से चैंबर में मिलने पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि जज को वादियों और वकीलों के मन में शंका पैदा करने के लिए किसी भी तरह से कार्य नहीं करना चाहिए। 

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The High Court said that the judges should not do the work of creating doubt in the minds of the litigants and lawyers
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने कहा कि जज को वादियों और वकीलों के मन में शंका पैदा करने के लिए किसी भी तरह से कार्य नहीं करना चाहिए। यह एक तय नियम है कि न्याय न केवल किया जाना चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी एक मामले में साकेत कोर्ट के जज की ओर से दोनों पक्षों को अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर देने व एक पक्ष से चैंबर में मिलने पर नाराजगी जताते हुए कही। अदालत ने मामले को फैमिली न्यायाधीश की अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया।

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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि न्यायाधीशों को खुद को बार-बार याद दिलाना पड़ता है कि उनके आचरण को वादियों द्वारा बारीकी से देखा और नोट किया जाता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा, दुर्भाग्य से दोनों पक्षों के साथ अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर साझा करने के लिए न्यायाधीश के आचरण के कारण और चैंबर में एक पक्ष से मिलने के कारण अनावश्यक रूप से पूर्वाग्रह की उचित आशंका का कारण बन गया है।
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न्यायमूर्ति शर्मा साकेत की एक फैमिली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उसने अपने नाबालिग बच्चे को दिल्ली से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी थी। उसी प्रभाव के एक बाद के आदेश को भी चुनौती दी गई थी।
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याचिका में कहा गया है कि जब कार्यवाही उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है लेकिन न्यायाधीश ने संरक्षकता याचिका का फैसला किया और पिता को बच्चे से मुलाक़ात का अधिकार दिया। उसे न केवल सप्ताह के दिनों में बल्कि शनिवार को और कई दिनों तक लंबे सप्ताहांत और छुट्टियों पर भी बच्चे को देखने की अनुमति दी।

याची ने कहा कि कार्यवाही के दौरान फैमिली अदालत ने पार्टियों के साथ अपना निजी मोबाइल नंबर साझा किया और पिता से अपने कक्षों में न्यायाधीश ने मुलाकात की। कहा गया कि इससे याचिकाकर्ता मां के मन में एक आशंका पैदा हो गई।

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