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देश विरोधी बातें करने वालों को परेशान करने के लिए बनाई सुल्ली डील्स एप

Tue, 11 Jan 2022 01:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jan 2022 01:21 AM IST
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The app was made to harass those who talk anti-national
नई दिल्ली। देश विरोधी बातें करने वालों को परेशान करने के लिए सुल्ली डील्स एप बनाई गई थी। आरोपी ओंकारेश्वर इन लोगों को परेशान करना चाहता था और उसका मकसद हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ बोलने वालों को भी सबक सिखाना था। ओंकारेश्वर ने पुलिस पूछताछ में यह खुलासा किया है। आरोपी ने सुल्ली डील्स एप बनाते हुए तीन देशों की लोकेशन(आईपी एड्रेस) दिखाई थी।
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की यूनिट इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑप्स(आईएफएसओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओंकारेश्वर ठाकुर ने जून-जुलाई में सुल्ली डील्स एप बनाई थी।वह इसके जरिए देश व हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ बोलने वालों को परेशान करना चाहता था। उसने इस एप पर मुस्लिम महिलाओं को अपमानित करने के लिए करीब 104 फोटो डाली थीं। हालांकि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका उद्ेश्य महिलाओं को अपमानित (बोली लगाना नहीं था) करना नहीं, बल्कि इन महिलाओं की फोटो डालकर व बोली लगाकर अपने एजेंडे को लेकर सोशल मीडिया में प्रसिद्ध होना चाहता था। इसने ट्विटर हैंडल पर ट्रेडमहासभा नाम से जो ग्रुप बनाया था उस पर 30 लोग जुड़े हुए थे। शुरू में इस ग्रुप से तीन लोग जुड़े थे और अन्य लोगों ने बाद में ज्वाइन किया था। बुल्लीबाई एप के निर्माता व मास्टरमाइंड नीरज बिश्वनोई भी ओंकारेश्वर के ट्रेड महासभा ग्रुप से जुड़ा हुआ था। नीरज के खुलासे के बाद ही ओंकारेश्वर को गिरफ्तार किया गया है। ओंकारेश्वर ने भी नीरज की तरह सुल्ली डील्स बनाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क(वीपीएन) का इस्तेमाल किया था। उसने एप को बनाते समय शुरू में पौलेंड की लोकेशन(आईपी एड्रेस) दिखाई थी। बाद में ट्विटर हैंडल पर ग्रुप को बनाते समय लोकेशन न्यूजीलैंड व बांग्लादेश दिखाई। वीपीएन पर दो तरह की फ्री व पेड सर्विस होती हैं। ओंकारेश्वर ने नीरज की तरह वीपीएन की फ्री सर्विस का इस्तेमाल किया था। मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद ओंकारेश्वर ने एप को डिलीट कर दिया था, जबकि नीरज ने बुल्लीबाई एप को डिलीट नहीं किया था। उसे सुरक्षा एजेंसियों ने डिलीट करवाया था।
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ट्रेड महासभा ग्रुप में बदले हुए नाम से जुड़े थे
ओंकारेश्वर ठाकुर ने बताया कि ट्रेड महासभा ग्रुप में ज्यादातर लोग चीकू, 007, गीयू 44 आदि नामों से जुड़े थे। असली नाम से कोई जुड़ा नहीं था। सदस्य एक-दूसरे को नहीं जानते थे और न ही कभी मिले थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उपनाम रखने की वजह से लोगों की पहचान करना मुश्किल है।
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लैपटॉप में ज्यादातर गेम्स भरे हैं
आईएफएसओ की लैब में आरोपी के मोबाइल व लैपटॉप की जांच की जा रही है। लैपटॉप में बहुत सारे गेम्स अपलोड हैं। जांच में ये देखा जा रहा है कि आरोपी ने सुल्ली से पहले या बाद में कोई और एप तो नहीं बनाई। आरोपी किसी और एप से तो जुड़ा तो नहीं है। आईएफएसओ के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ओंकारेश्वर ठाकुर पूछताछ में सहयोग कर रहा है। अब बुल्ली बाई एप का निर्माता भी पूछताछ में सहयोग करने लगा है।
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