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12 तदर्थ शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति के लिए सीएम से लगाई गुहार
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने अब विवेकानंद महिला कॉलेज के 12 तदर्थ शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से न्याय की गुहार लगाई है। डूटा के आह्वान पर शिक्षकों ने मंगलवार को तदर्थ शिक्षकों की ज्वाइनिंग और कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल को हटाने को लेकर एक हल्ला बोल ऑनलाइन धरना दिया। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री सेे हस्तक्षेप की मांग की है।
कोरोना की महामारी के कारण शिक्षकों ने अपने-अपने घरों पर सुबह नौ बजे से सायं चार बजे तक हाथों में विवेकानंद कॉलेज के 12 तदर्थ शिक्षकों की ज्वाइनिंग और प्रिंसिपल को हटाने के पोस्टर लेकर बैठे थे। सभी ने उसे सोशल मीडिया पर साझा भी किया। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक काफी शिक्षकों ने जूम पर एकत्रित होकर कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष से कॉलेज प्रिंसिपल को हटाने की मांग की।
डूटा उपाध्यक्ष डॉ आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि विवेकानंद कॉलेज दिल्ली सरकार के आंशिक अनुदान से चलने वाला कॉलेज है। यहां कॉलेज अध्यक्ष भी दिल्ली सरकार से नामित व्यक्ति है। ऐसे में सरकार को 12 शिक्षकों की ज्वाइनिंग कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रबंध समिति ने सभी शिक्षकों की ज्वाइनिंग का फैसला किया था। इसके दो सप्ताह बाद भी कुछ नहीं हुआ है।
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उन्होंने कहा कि मामले में मुख्यमंत्री को इसमें हस्तक्षेप कर शिक्षकों की ज्वाइनिंग के लिए चेयरमैन को निर्देश देना चाहिए। डूटा के संयुक्त सचिव डॉ प्रेमचंद ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री न्याय नहीं देते हैं तो मजबूरन शिक्षकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
धरने में डूटा अध्यक्ष राजीब रे, पूर्व डूटा अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा, डूटा सचिव राजिंदर सिंह, डूटा कोषाध्यक्ष आभा देव, पूर्व कार्यकारी परिषद सदस्य राजेश झा, समेत संगठन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
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कोरोना की महामारी के कारण शिक्षकों ने अपने-अपने घरों पर सुबह नौ बजे से सायं चार बजे तक हाथों में विवेकानंद कॉलेज के 12 तदर्थ शिक्षकों की ज्वाइनिंग और प्रिंसिपल को हटाने के पोस्टर लेकर बैठे थे। सभी ने उसे सोशल मीडिया पर साझा भी किया। सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक काफी शिक्षकों ने जूम पर एकत्रित होकर कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष से कॉलेज प्रिंसिपल को हटाने की मांग की।
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डूटा उपाध्यक्ष डॉ आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि विवेकानंद कॉलेज दिल्ली सरकार के आंशिक अनुदान से चलने वाला कॉलेज है। यहां कॉलेज अध्यक्ष भी दिल्ली सरकार से नामित व्यक्ति है। ऐसे में सरकार को 12 शिक्षकों की ज्वाइनिंग कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रबंध समिति ने सभी शिक्षकों की ज्वाइनिंग का फैसला किया था। इसके दो सप्ताह बाद भी कुछ नहीं हुआ है।
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उन्होंने कहा कि मामले में मुख्यमंत्री को इसमें हस्तक्षेप कर शिक्षकों की ज्वाइनिंग के लिए चेयरमैन को निर्देश देना चाहिए। डूटा के संयुक्त सचिव डॉ प्रेमचंद ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री न्याय नहीं देते हैं तो मजबूरन शिक्षकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
धरने में डूटा अध्यक्ष राजीब रे, पूर्व डूटा अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्रा, डूटा सचिव राजिंदर सिंह, डूटा कोषाध्यक्ष आभा देव, पूर्व कार्यकारी परिषद सदस्य राजेश झा, समेत संगठन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।